पंजाब में नशा विरोधी कार्यकर्ता की हत्या पर राघव चड्ढा का मान सरकार पर हमला, कानून-व्यवस्था को बताया विफल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद राघव चड्ढा ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को पंजाब में नशे के कारोबार और नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार पर तीखा प्रहार किया। चड्ढा ने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और नशे के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
एक्स पर क्या बोले चड्ढा
राघव चड्ढा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में दावा किया कि पंजाब अब कथित तौर पर 'नशा बेचने में आसानी के सूचकांक' में पहले स्थान पर पहुँच गया है। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि जिस तरह किसी नज़दीकी दुकान से या घर बैठे 10 मिनट में सामान की होम डिलीवरी मिलती है, उसी सहजता से नशा उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार आने के बाद राज्य में इस नेटवर्क का विस्तार हुआ है।
परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला
चड्ढा के अनुसार, मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। उन्होंने दावा किया कि झोटा की एक मेडिकल स्टोर संचालक के साथ कथित तौर पर नशीले पदार्थों की बिक्री को लेकर बहस हुई थी, जिसके बाद उन्हें गोली मार दी गई। चड्ढा ने यह भी दावा किया कि पूरी घटना कैमरे में दर्ज हुई। झोटा कई वर्षों से पंजाब में 'चिट्टा' के कारोबार के खिलाफ सक्रिय रूप से आवाज़ उठा रहे थे।
परिवार का रुख और केंद्र सरकार से गुहार
चड्ढा ने दावा किया कि झोटा के पिता ने आरोपियों और स्थानीय नशा विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई होने तक अपने बेटे का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है। उनके अनुसार, मृतक के पिता ने अपने बेटे की मौत के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। चड्ढा ने कहा कि जब नशे के खिलाफ लड़ने वाले परिवार को अपनी सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार से गुहार लगानी पड़े, तो यह पंजाब की मौजूदा स्थिति का आईना है।
'युद्ध नशे के विरुद्ध' अभियान पर सवाल
चड्ढा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नशा विरोधी अभियान 'युद्ध नशे के विरुद्ध' पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यह मुहिम असल में नशे के कारोबार के खिलाफ लड़ने वाले लोगों के लिए ही मुश्किलें पैदा कर रही है। उन्होंने दावा किया कि जो दल कभी पंजाब से नशे के कारोबार को खत्म करने का वादा करता था, उसी की सरकार में कथित तौर पर खुलेआम 'चिट्टा' बेचा जा रहा है।
आगे क्या
गौरतलब है कि पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से राजनीतिक विवाद का केंद्र रही है और 2022 के विधानसभा चुनाव में AAP की जीत में नशा-विरोधी वादों की बड़ी भूमिका रही थी। चड्ढा के इन आरोपों पर भगवंत मान सरकार की अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मानसा हत्याकांड की जाँच और आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर दबाव बढ़ने की संभावना है।