मानसा में नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या पर पंजाब बंद, कई जिलों में कामकाज ठप
सारांश
मुख्य बातें
नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की मानसा, पंजाब में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या के बाद उनके परिवार और न्याय की माँग करने वाले संगठनों के आह्वान पर 15 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) को राज्यभर में बंद रखा गया। हल्की बारिश के बावजूद पंजाब के कई इलाकों में बाज़ार, व्यापारिक प्रतिष्ठान और कामकाज सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक बंद रहे। विपक्षी दलों, किसान संगठनों, व्यापारियों और सामाजिक समूहों ने इस विरोध प्रदर्शन में अपना समर्थन दिया।
हत्या का घटनाक्रम
मंगलवार को मानसा में परविंदर सिंह झोटा एक मेडिकल स्टोर मालिक अश्वनी कुमार के साथ नशीली दवाओं की कथित अवैध बिक्री को लेकर हुई बहस को लाइव-स्ट्रीम कर रहे थे, तभी उन्हें गोली मार दी गई। पूरी घटना वीडियो में कैद हो गई, जिसके बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। पुलिस ने झोटा के पिता भीम सिंह की शिकायत पर मामला दर्ज किया और बुधवार को राजस्थान से मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। जाँचकर्ताओं के अनुसार, इस कथित साजिश में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी जाँच की जाएगी।
झोटा इस इलाके में केमिस्ट की दुकानों के ज़रिए होने वाली नशीली दवाओं की कथित अवैध बिक्री के खिलाफ चल रहे अभियान का एक प्रमुख चेहरा बन गए थे। उनकी हत्या ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग, लत लगाने वाली दवाओं की उपलब्धता और नशा बेचने वालों का विरोध करने वाले लोगों के सामने मौजूद खतरों को लेकर फिर से गंभीर चिंताएँ खड़ी कर दी हैं।
परिवार की माँगें और विरोध की स्थिति
झोटा के पिता भीम सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और पुलिस महानिदेशक गौरव यादव के इस्तीफे की माँग की है। इसके अलावा, उन्होंने जिले में नशा-नियंत्रण और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की माँग की है। परिवार ने तब तक झोटा का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है, जब तक न्याय की माँगें पूरी नहीं हो जातीं।
प्रदर्शनकारी इस हत्या की केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) से जाँच कराने की माँग कर रहे हैं। साथ ही वे राज्य प्रशासन से नशीले पदार्थों की कथित अवैध बिक्री के लिए जवाबदेही तय करने और नशा-विरोधी अभियान चलाने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग कर रहे हैं।
राजनीतिक दलों और संगठनों का समर्थन
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस), शिरोमणि अकाली दल, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और 'वारिस पंजाब दे' जैसे राजनीतिक दलों ने इस बंद का समर्थन किया। किसान यूनियनों, कर्मचारी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन में अपनी आवाज़ मिलाई। अमृतसर के गोल्डन गेट पर किसानों और विभिन्न संगठनों के सदस्यों ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और सरकार को बर्खास्त करने की माँग की। भारी बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान का पुतला फूँका; इस प्रदर्शन का नेतृत्व किसान मजदूर संघर्ष समिति ने किया।
मानसा में तनाव और प्रशासनिक कार्रवाई
बुधवार को मानसा में स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब प्रदर्शनकारियों ने आरोपी के मेडिकल स्टोर को तोड़कर उसमें आग लगा दी। प्रशासन ने भी आरोपी के घर के एक हिस्से को अवैध निर्माण का हवाला देते हुए गिरा दिया। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि जन आक्रोश किस हद तक पहुँच गया है।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का वादा किया है और पंजाब पुलिस को मामले की गहन जाँच का निर्देश दिया है। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और भरोसा दिलाया कि साजिश में शामिल पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पंजाब में नशे की समस्या से निपटने को लेकर राज्य सरकार पहले से ही आलोचनाओं के घेरे में है। CBI जाँच की माँग और परिवार के अंतिम संस्कार से इनकार से यह स्पष्ट है कि सरकार के लिए यह मामला जल्द थमने वाला नहीं है।