13 अक्टूबर 2026
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परविंदर झोटा हत्याकांड: मानसा अस्पताल पहुंचे रवनीत बिट्टू पंजाब पुलिस की हिरासत में, AAP सरकार पर उठाए सवाल

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परविंदर झोटा हत्याकांड: मानसा अस्पताल पहुंचे रवनीत बिट्टू पंजाब पुलिस की हिरासत में, AAP सरकार पर उठाए सवाल

सारांश

नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद मानसा अस्पताल पहुंचे BJP नेता रवनीत बिट्टू को पंजाब पुलिस ने हिरासत में लिया। बिट्टू ने AAP सरकार पर प्रवर्तन विफलता और झोटा को पर्याप्त सुरक्षा न देने का आरोप लगाया — यह घटना पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा पर गहरे सवाल खड़े करती है।

मुख्य बातें

BJP नेता रवनीत सिंह बिट्टू को 13 अक्टूबर 2026 को पंजाब पुलिस ने मानसा के सिविल अस्पताल में हिरासत में लिया।
नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की कथित तौर पर गोली मारकर हत्या की गई; बिट्टू घायलों का हालचाल जानने अस्पताल पहुंचे थे।
बिट्टू ने भगवंत मान की AAP सरकार पर कार्यकर्ताओं को पर्याप्त सुरक्षा न देने और नशा प्रवर्तन में विफलता का आरोप लगाया।
बिट्टू का दावा — कथित तौर पर तीन जिलों के लिए केवल एक ड्रग इंस्पेक्टर तैनात।
पुलिस की 'व्यक्तिगत दुश्मनी' वाली शुरुआती धारणा पर बिट्टू ने सवाल उठाए, निष्पक्ष और व्यापक जाँच की माँग की।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता रवनीत सिंह बिट्टू को मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को पंजाब पुलिस ने हिरासत में ले लिया। बिट्टू नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर की गई हत्या के बाद घायलों से मिलने मानसा के सिविल अस्पताल पहुंचे थे, उसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। यह घटना पंजाब में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर नई राजनीतिक बहस छेड़ गई है।

मुख्य घटनाक्रम

नशे के खिलाफ खुलकर आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद रवनीत सिंह बिट्टू मानसा के सिविल अस्पताल में घायलों का हालचाल जानने पहुंचे, जहाँ पंजाब पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। बिट्टू ने हिरासत में लिए जाने को राजनीतिक दमन करार दिया।

बिट्टू ने AAP सरकार पर साधा निशाना

बिट्टू ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "यदि नशे की खुलेआम बिक्री की शिकायतें लगातार उठाई जा रही थीं तो प्रशासन प्रभावी कार्रवाई करने में क्यों विफल रहा? जब लोग इस समस्या की ओर खुलकर ध्यान दिला रहे थे, तब प्रशासनिक तंत्र कहाँ था? सरकार को बताना चाहिए कि नशा तस्करी के खिलाफ बोलने वालों को पर्याप्त सुरक्षा क्यों नहीं दी गई।"

बिट्टू ने यह भी सवाल उठाया कि झोटा को लगातार मिल रही धमकियों के बावजूद उन्हें पर्याप्त सुरक्षा क्यों नहीं प्रदान की गई। गौरतलब है कि झोटा कथित तौर पर नशा तस्करों के खिलाफ सक्रिय रूप से अभियान चला रहे थे।

प्रवर्तन तंत्र पर उठे सवाल

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि कथित तौर पर तीन जिलों के लिए केवल एक ड्रग इंस्पेक्टर तैनात है। उन्होंने तर्क दिया कि जब पर्याप्त प्रवर्तन कर्मचारी ही नहीं हैं, तो राज्य सरकार नशे की समस्या से प्रभावी ढंग से कैसे निपटेगी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य मंत्री की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए।

जाँच की दिशा पर विवाद

बिट्टू ने पुलिस की उस शुरुआती धारणा को भी चुनौती दी, जिसमें कथित तौर पर इस घटना को व्यक्तिगत दुश्मनी का नतीजा बताया गया था। उन्होंने कहा, "निष्पक्ष और व्यापक जाँच पूरी होने से पहले पुलिस किसी व्यक्तिगत दुश्मनी के निष्कर्ष पर कैसे पहुँच सकती है? इस मामले के हर पहलू की जाँच होनी चाहिए, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या इस घटना का संबंध नशे के कारोबार से है। जाँच निष्पक्ष, सबूतों पर आधारित और किसी भी राजनीतिक दबाव से मुक्त होनी चाहिए।"

आगे क्या होगा

यह मामला पंजाब में नशा विरोधी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और राज्य में नशे के कथित खुले कारोबार को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है। आलोचकों का कहना है कि यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब सरकार पहले से ही कानून व्यवस्था को लेकर दबाव में है। बिट्टू की हिरासत और उनके द्वारा उठाए गए सवालों के बाद अब सरकार पर स्पष्ट जवाब देने का दबाव बढ़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह पंजाब में राजनीतिक असहिष्णुता की बढ़ती प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है। इससे भी बड़ा सवाल यह है कि नशे के खिलाफ सार्वजनिक रूप से आवाज उठाने वाले एक कार्यकर्ता को क्यों कोई सुरक्षा नहीं मिली, जबकि उन्हें लगातार धमकियाँ मिल रही थीं। यदि तीन जिलों पर एक ड्रग इंस्पेक्टर का दावा सच है, तो यह AAP सरकार के 'नशा मुक्त पंजाब' के वादे और ज़मीनी हकीकत के बीच गहरी खाई दर्शाता है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है — असली जवाबदेही का सवाल राजनीतिक नहीं, प्रशासनिक है।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परविंदर सिंह झोटा कौन थे और उनकी हत्या कैसे हुई?
परविंदर सिंह झोटा पंजाब के एक नशा विरोधी कार्यकर्ता थे, जो कथित तौर पर नशा तस्करों के खिलाफ सक्रिय रूप से अभियान चला रहे थे। उन्हें कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी गई; मामले की जाँच जारी है।
रवनीत बिट्टू को पंजाब पुलिस ने क्यों हिरासत में लिया?
BJP नेता रवनीत सिंह बिट्टू परविंदर झोटा हत्याकांड में घायल लोगों का हालचाल जानने मानसा के सिविल अस्पताल पहुंचे थे, तभी पंजाब पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। हिरासत का आधिकारिक कारण तत्काल स्पष्ट नहीं हुआ।
बिट्टू ने AAP सरकार पर क्या आरोप लगाए?
बिट्टू ने AAP सरकार पर झोटा को धमकियों के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा न देने, नशा प्रवर्तन तंत्र कमज़ोर रखने और राज्य में नशे के कथित खुले कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि कथित तौर पर तीन जिलों के लिए केवल एक ड्रग इंस्पेक्टर तैनात है।
पुलिस की जाँच पर बिट्टू ने क्या सवाल उठाए?
बिट्टू ने पुलिस की उस शुरुआती धारणा को चुनौती दी जिसमें इस घटना को व्यक्तिगत दुश्मनी का नतीजा बताया गया था। उन्होंने माँग की कि यह भी जाँचा जाए कि क्या हत्या का संबंध नशे के कारोबार से है, और जाँच किसी राजनीतिक दबाव से मुक्त होनी चाहिए।
इस मामले का पंजाब की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
यह घटना पंजाब में नशा विरोधी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर विपक्ष और सत्तारूढ़ AAP सरकार के बीच टकराव को और तेज़ करेगी। बिट्टू की हिरासत राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बन सकती है और सरकार पर जवाब देने का दबाव बढ़ेगा।
राष्ट्र प्रेस
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