पंजाब बंद: एंटी ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या पर SGPC, SAD, कांग्रेस एकजुट
सारांश
मुख्य बातें
एंटी ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की मानसा में कथित हत्या के विरोध में 14 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) को पंजाब भर में बंद का आह्वान किया गया है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC), शिरोमणि अकाली दल (SAD), कांग्रेस और कई किसान संगठन इस बंद के समर्थन में आ गए हैं, जो राज्य में नशे की समस्या पर व्यापक राजनीतिक आक्रोश का संकेत है।
हत्या का घटनाक्रम
45 वर्षीय झोटा की कथित तौर पर मंगलवार को मानसा के एक मेडिकल स्टोर में उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई, जब वे स्टोर मालिक अश्वनी कुमार के साथ कथित रूप से ड्रग्स बेचने को लेकर बहस कर रहे थे। यह पूरी बहस फेसबुक पर लाइव प्रसारित हो रही थी। गोलीबारी में झोटा के चार सहयोगी भी घायल हो गए। आरोपी अश्वनी कुमार को बाद में राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया गया।
संयुक्त कार्रवाई समिति की माँगें
हत्या के बाद गठित संयुक्त कार्रवाई समिति ने बंद का आह्वान करते हुए कई तीखी माँगें सामने रखी हैं। समिति ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से मामले की जांच, मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे और पुलिस महानिदेशक गौरव यादव को पद से हटाने की माँग की है। इसके अलावा समिति ने चंडीगढ़ के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) के एक विशेषज्ञ पैनल से पोस्टमार्टम कराने की माँग भी की है।
पुलिस पर लापरवाही के आरोप
पीड़ित परिवार ने प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने में हुई देरी पर गहरा रोष जताया है। परिवार के अनुसार, घटना के करीब 30 घंटे बाद एफआईआर दर्ज की गई। उन्होंने आरोप लगाया है कि घटना के दौरान और उसके बाद पुलिस की ओर से गंभीर लापरवाही बरती गई। मानसा में प्रदर्शनकारियों ने यह भी साफ कर दिया है कि जब तक उनकी सभी माँगें पूरी नहीं होतीं, वे झोटा का अंतिम संस्कार नहीं होने देंगे।
बंद का व्यापक समर्थन
SGPC ने घोषणा की है कि बंद के समर्थन में उसके सभी कार्यालय और संस्थान गुरुवार को बंद रहेंगे। SGPC अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने नशा-विरोधी अभियान और पीड़ित परिवार के प्रति एकजुटता जताई है। बंद का समय सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित है, जिसके चलते दुकानें, परिवहन सेवाएँ और अन्य संस्थान बंद रहने की संभावना है और दैनिक यात्रियों को असुविधा हो सकती है। आगे और प्रदर्शनों की आशंका को देखते हुए पुलिस ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से एक ज्वलंत राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा रही है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी नशा-विरोधी कार्यकर्ता को निशाना बनाए जाने की खबरें आई हों। धार्मिक, राजनीतिक और किसान संगठनों का एक साथ आना यह दर्शाता है कि जनता में पुलिस जवाबदेही और नशा तस्करी पर अंकुश लगाने को लेकर व्यापक असंतोष है। आने वाले दिनों में राज्य सरकार पर दबाव और बढ़ने की संभावना है।