पंजाब बंद: परविंदर झोटा हत्या पर अमृतसर के गोल्डन गेट पर किसानों का प्रदर्शन, भगवंत मान से इस्तीफे की माँग
सारांश
मुख्य बातें
नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में बुलाए गए पंजाब बंद के दौरान गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता सरवन सिंह पंधेर के नेतृत्व में किसानों और समर्थकों ने अमृतसर के गोल्डन गेट पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। राज्यव्यापी बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान का पुतला फूँका और उनके इस्तीफे की माँग की।
प्रदर्शन का स्वरूप और समर्थन
बंद के आह्वान के जवाब में अनेक किसान यूनियनों, छात्र संगठनों और ट्रेड यूनियनों ने नेशनल हाईवे-44 को जाम करने की घोषणा की। गोल्डन गेट पर बड़ी संख्या में एकत्रित भीड़ को देखते हुए अमृतसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। इस बंद को विपक्षी दलों, किसान संगठनों और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) का समर्थन मिला।
सरवन सिंह पंधेर ने कहा, 'हमें जो रिपोर्ट मिल रही है, उसके अनुसार पंजाबियों ने नशे के मुद्दे पर कारोबार बंद कर बहुत समर्थन दिखाया है और मैं इसके लिए उन्हें धन्यवाद देता हूँ। गोल्डन गेट पर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए, जहाँ हमने भगवंत मान सरकार का पुतला फूँका।' उन्होंने यह भी माँग की कि मुख्यमंत्री भगवंत मान नैतिक आधार पर इस्तीफा दें और डीजीपी पद छोड़ें।
परविंदर झोटा हत्याकांड — मामले की पृष्ठभूमि
मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या ने पंजाब में व्यापक आक्रोश पैदा किया है। झोटा के पिता भीम सिंह ने प्रशासन की कार्यशैली की आलोचना करते हुए 15 अक्टूबर को पंजाब बंद का आह्वान किया था। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पंजाब में नशे की समस्या राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है।
पंधेर ने निष्पक्ष जाँच की माँग करते हुए कहा, 'केमिस्ट की दुकान के पीछे जो भी है — चाहे वह कोई नेता हो या माफिया से जुड़ा हो — उसकी जाँच होनी चाहिए। न्याय होना चाहिए।' उन्होंने 10 थानों के कर्मियों की जाँच के लिए 10 डॉक्टरों की टीम गठित करने की भी माँग की तथा आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी नशे के प्रभाव में हो सकते हैं। हालाँकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को हत्या में शामिल लोगों के लिए सबसे कड़ी सजा का वादा किया था। उन्होंने कहा था, 'हमने चिट्टा और अन्य नशों के खिलाफ जंग छेड़ी है। जो भी शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, चाहे वह कोई भी हो।' मान ने जनता से शांति बनाए रखने की भी अपील की और आश्वासन दिया कि हत्या के लिए जिम्मेदार सभी लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।
गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार शुरू से ही नशा तस्करी के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' का दावा करती रही है। आलोचकों का कहना है कि यह घटना उस दावे पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
आम जनता और राजनीतिक दलों का असर
बंद के दौरान राज्यभर में व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे और कई स्थानों पर यातायात प्रभावित हुआ। विपक्षी दलों ने बंद को समर्थन देकर आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को घेरने का अवसर भुनाया। यह ऐसे समय में हुआ जब पंजाब में अगले चुनावी चक्र से पूर्व राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो रही हैं।
क्या होगा आगे
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक हत्याकांड में निष्पक्ष जाँच और दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी की आगे की रणनीति सरकार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी। पंजाब की नशा समस्या और कानून व्यवस्था की स्थिति अब राज्य सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन चुकी है।