15 अक्टूबर 2026
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पंजाब बंद: परविंदर झोटा हत्या पर अमृतसर के गोल्डन गेट पर किसानों का प्रदर्शन, भगवंत मान से इस्तीफे की माँग

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पंजाब बंद: परविंदर झोटा हत्या पर अमृतसर के गोल्डन गेट पर किसानों का प्रदर्शन, भगवंत मान से इस्तीफे की माँग

सारांश

नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या ने पंजाब को हिला दिया। अमृतसर के गोल्डन गेट पर किसान सड़कों पर उतरे, भगवंत मान का पुतला फूँका और इस्तीफे की माँग की। पंजाब बंद को SGPC और विपक्ष का समर्थन — राज्य सरकार के 'जीरो टॉलरेंस' दावे पर सीधा सवाल।

मुख्य बातें

15 अक्टूबर 2026 को परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड के विरोध में पंजाब बंद का आयोजन हुआ।
किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता सरवन सिंह पंधेर के नेतृत्व में अमृतसर के गोल्डन गेट पर बड़ी संख्या में किसान एकत्रित हुए।
प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान का पुतला फूँका और उनसे तथा डीजीपी से इस्तीफे की माँग की।
बंद को विपक्षी दलों, किसान यूनियनों और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) का समर्थन मिला।
मुख्यमंत्री मान ने हत्यारों के लिए कड़ी सजा और नशे के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति का वादा दोहराया।
पंधेर ने 10 थानों के कर्मियों की जाँच हेतु 10 डॉक्टरों की टीम बनाने की माँग की — आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं।

नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में बुलाए गए पंजाब बंद के दौरान गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता सरवन सिंह पंधेर के नेतृत्व में किसानों और समर्थकों ने अमृतसर के गोल्डन गेट पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। राज्यव्यापी बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान का पुतला फूँका और उनके इस्तीफे की माँग की।

प्रदर्शन का स्वरूप और समर्थन

बंद के आह्वान के जवाब में अनेक किसान यूनियनों, छात्र संगठनों और ट्रेड यूनियनों ने नेशनल हाईवे-44 को जाम करने की घोषणा की। गोल्डन गेट पर बड़ी संख्या में एकत्रित भीड़ को देखते हुए अमृतसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। इस बंद को विपक्षी दलों, किसान संगठनों और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) का समर्थन मिला।

सरवन सिंह पंधेर ने कहा, 'हमें जो रिपोर्ट मिल रही है, उसके अनुसार पंजाबियों ने नशे के मुद्दे पर कारोबार बंद कर बहुत समर्थन दिखाया है और मैं इसके लिए उन्हें धन्यवाद देता हूँ। गोल्डन गेट पर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए, जहाँ हमने भगवंत मान सरकार का पुतला फूँका।' उन्होंने यह भी माँग की कि मुख्यमंत्री भगवंत मान नैतिक आधार पर इस्तीफा दें और डीजीपी पद छोड़ें।

परविंदर झोटा हत्याकांड — मामले की पृष्ठभूमि

मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या ने पंजाब में व्यापक आक्रोश पैदा किया है। झोटा के पिता भीम सिंह ने प्रशासन की कार्यशैली की आलोचना करते हुए 15 अक्टूबर को पंजाब बंद का आह्वान किया था। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पंजाब में नशे की समस्या राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है।

पंधेर ने निष्पक्ष जाँच की माँग करते हुए कहा, 'केमिस्ट की दुकान के पीछे जो भी है — चाहे वह कोई नेता हो या माफिया से जुड़ा हो — उसकी जाँच होनी चाहिए। न्याय होना चाहिए।' उन्होंने 10 थानों के कर्मियों की जाँच के लिए 10 डॉक्टरों की टीम गठित करने की भी माँग की तथा आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी नशे के प्रभाव में हो सकते हैं। हालाँकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को हत्या में शामिल लोगों के लिए सबसे कड़ी सजा का वादा किया था। उन्होंने कहा था, 'हमने चिट्टा और अन्य नशों के खिलाफ जंग छेड़ी है। जो भी शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, चाहे वह कोई भी हो।' मान ने जनता से शांति बनाए रखने की भी अपील की और आश्वासन दिया कि हत्या के लिए जिम्मेदार सभी लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।

गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार शुरू से ही नशा तस्करी के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' का दावा करती रही है। आलोचकों का कहना है कि यह घटना उस दावे पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

आम जनता और राजनीतिक दलों का असर

बंद के दौरान राज्यभर में व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे और कई स्थानों पर यातायात प्रभावित हुआ। विपक्षी दलों ने बंद को समर्थन देकर आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को घेरने का अवसर भुनाया। यह ऐसे समय में हुआ जब पंजाब में अगले चुनावी चक्र से पूर्व राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो रही हैं।

क्या होगा आगे

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक हत्याकांड में निष्पक्ष जाँच और दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी की आगे की रणनीति सरकार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी। पंजाब की नशा समस्या और कानून व्यवस्था की स्थिति अब राज्य सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन चुकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति की परीक्षा है। आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार का 'जीरो टॉलरेंस' का नारा तब खोखला लगने लगता है जब एक नशा विरोधी कार्यकर्ता ही खुद हत्या का शिकार हो जाए। असली सवाल यह है कि क्या सरकार केवल बयानबाज़ी तक सीमित रहेगी या झोटा मामले में ऐसी जाँच होगी जो राजनीतिक और माफिया दोनों कनेक्शन को बेनकाब करे। जब तक पारदर्शी और स्वतंत्र जाँच नहीं होती, किसान संगठनों का यह आंदोलन राज्य सरकार के लिए राजनीतिक दबाव बनाता रहेगा।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परविंदर सिंह झोटा कौन थे और उनकी हत्या कहाँ हुई?
परविंदर सिंह झोटा पंजाब के मानसा जिले में सक्रिय एक नशा विरोधी कार्यकर्ता थे। उनकी हत्या ने राज्यभर में व्यापक आक्रोश पैदा किया और उनके पिता भीम सिंह ने 15 अक्टूबर 2026 को पंजाब बंद का आह्वान किया।
पंजाब बंद का आयोजन किसने किया और इसे किसका समर्थन मिला?
पंजाब बंद का आह्वान झोटा के परिवार और किसान संगठनों ने किया। इसे विपक्षी दलों, अनेक किसान यूनियनों, छात्र संगठनों, ट्रेड यूनियनों और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) का समर्थन प्राप्त हुआ।
किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
नेता सरवन सिंह पंधेर ने माँग की है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान और डीजीपी नैतिक आधार पर इस्तीफा दें। इसके अलावा हत्याकांड की निष्पक्ष जाँच, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और 10 थानों के कर्मियों की जाँच हेतु 10 डॉक्टरों की टीम गठित करने की माँग भी की गई है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को हत्यारों के लिए सबसे कड़ी सजा का वादा किया। उन्होंने नशा तस्करी के खिलाफ अपनी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति दोहराते हुए कहा कि चिट्टा और अन्य नशों के खिलाफ जंग जारी रहेगी और जनता से शांति बनाए रखने की अपील की।
पंजाब बंद के दौरान क्या-क्या हुआ?
बंद के दौरान अमृतसर के गोल्डन गेट पर बड़ी संख्या में किसान और समर्थक एकत्रित हुए और भगवंत मान सरकार का पुतला फूँका। राज्यभर में व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे, कई यूनियनों ने नेशनल हाईवे-44 जाम करने की घोषणा की, और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
राष्ट्र प्रेस
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