परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड: भाजपा नेता बाजवा का भगवंत मान सरकार पर सीधा हमला
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता फतेह जंग सिंह बाजवा ने 15 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ में नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह उर्फ झोटा की हत्या को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और पंजाब पुलिस को सीधे कटघरे में खड़ा किया। बाजवा ने आरोप लगाया कि नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने में राज्य सरकार की नाकामी ने ऐसी त्रासदियों के लिए ज़मीन तैयार की है।
हत्या का घटनाक्रम
बाजवा के अनुसार, झोटा ने घटना से पहले तरनतारन के डीएसपी को पूरे मामले की जानकारी दी थी और पुलिस अधिकारी ने मौके पर पहुँचने का आश्वासन दिया था। जब झोटा की एक केमिस्ट शॉप के संचालक से विवाद शुरू हुआ, तो उन्होंने दोबारा डीएसपी को फोन कर मदद माँगी। इसी दौरान दुकानदार ने रिवॉल्वर निकालकर गोली चला दी, जिससे झोटा की मौत हो गई। पुलिस समय पर नहीं पहुँची — यही बिंदु बाजवा के आरोपों की धुरी है।
सरकार और पुलिस पर आरोप
बाजवा ने दावा किया कि पुलिस को नशीले पदार्थ बेचने वालों की पहले से जानकारी रहती है, फिर भी कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने माँग की कि समय पर कार्रवाई न करने वाले जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएँ। उन्होंने घटना के बाद घर तोड़े जाने और दुकान जलाए जाने की घटनाओं का भी उल्लेख किया और कहा कि जनता का गुस्सा सरकार की विफलता को दर्शाता है, हालाँकि कानून हाथ में लेना उचित नहीं है।
पंजाब बंद और राजनीतिक प्रतिक्रिया
झोटा की हत्या के विरोध में बुलाए गए पंजाब बंद को विभिन्न राजनीतिक दलों और आम लोगों का समर्थन मिला। बाजवा ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा बुलाई गई आपात बैठक भी जनता के उबलते गुस्से की प्रतिक्रिया है। झोटा के परिवार के साथ कई राजनीतिक दल एकजुट हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में नशा तस्करी से जुड़ी हिंसा को लेकर राज्य सरकार पहले से ही विपक्ष के निशाने पर है।
जंतर-मंतर मसले पर बाजवा का रुख
बाजवा ने केंद्र सरकार के जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पिछले प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने ऐसे मॉड्यूल के लोगों को पकड़ा था जो वहाँ गड़बड़ी फैलाने की फिराक में थे। हालाँकि, उन्होंने विरोध प्रदर्शन के अधिकार को अक्षुण्ण रखने पर ज़ोर दिया और सुझाव दिया कि बड़े प्रदर्शनों के लिए रामलीला मैदान जैसे वैकल्पिक स्थान चिह्नित किए जाएँ।
आगे क्या
बाजवा ने दावा किया कि पंजाब में कानून-व्यवस्था और नशे की समस्या पर नियंत्रण के लिए भाजपा एक प्रभावी विकल्प के रूप में सामने आ सकती है। गौरतलब है कि पंजाब में AAP सरकार ने सत्ता में आते समय नशामुक्ति को प्रमुख एजेंडा बताया था। झोटा की हत्या उस वादे पर सबसे बड़ा सवालिया निशान बन गई है। आने वाले दिनों में पुलिस कार्रवाई और सरकार की प्रतिक्रिया पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।