20 अक्टूबर 2026
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झोटा हत्याकांड: सीबीआई जांच पर BJP नेता सुनील जाखड़ का तंज — 'मान सरकार ने बहुत देर कर दी'

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झोटा हत्याकांड: सीबीआई जांच पर BJP नेता सुनील जाखड़ का तंज — 'मान सरकार ने बहुत देर कर दी'

सारांश

पंजाब में परमिंदर सिंह झोटा हत्याकांड की सीबीआई जांच का ऐलान होते ही सियासी तीखापन बढ़ा — BJP के सुनील जाखड़ ने देरी पर सवाल उठाए, मंत्री हरपाल चीमा ने केंद्र पर पलटवार किया। राज्य-केंद्र के बीच नशे की ज़िम्मेदारी का यह टकराव अब सड़क से संसद तक का मुद्दा बन सकता है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 20 अक्टूबर 2026 को परमिंदर सिंह झोटा हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने का ऐलान किया।
BJP नेता सुनील जाखड़ ने एक्स पोस्ट के ज़रिए AAP सरकार पर निशाना साधा, कहा — 'बहुत देर कर दी।' जाखड़ ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अनुरोध किया कि जांच को व्यापक दायरे और तय समय सीमा में पूरा किया जाए।
कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा ने दावा किया — पंजाब देश का पहला राज्य है जिसने अपने खर्च पर सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम लागू किया।
चीमा ने केंद्र पर आरोप लगाया कि बॉर्डर पर ड्रग्स सप्लाई रोकने में कोई मदद नहीं मिली।

पंजाब के परमिंदर सिंह झोटा हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के फैसले के बाद चंडीगढ़ में सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार की सुबह एक्स पोस्ट के ज़रिए यह ऐलान किया, जिसके कुछ ही घंटों बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर कड़ा प्रहार किया।

जाखड़ का सरकार पर निशाना

सुनील जाखड़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'सीबीआई जांच का आदेश करते-करते सीएम भगवंत मान ने बहुत देर कर दी।' उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार को अंततः जनाक्रोश के आगे झुकते हुए यह कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा।

जाखड़ ने यह भी आरोप लगाया कि यह कोई इकलौता मामला नहीं है — उनके अनुसार AAP सरकार के कार्यकाल में कई ऐसी घटनाएँ हुई हैं जहाँ नशा तस्करों के विरुद्ध आवाज़ उठाने वाले लोगों की कथित तौर पर हत्या की गई या उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया।

केंद्रीय गृह मंत्री से अनुरोध

पंजाब दौरे पर आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जाखड़ ने अनुरोध किया कि सीबीआई जांच को व्यापक दायरे में और एक निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए, ताकि इस मामले के पीछे के पूरे नेटवर्क को उजागर किया जा सके और पीड़ित परिवार को पूरा न्याय मिल सके। गौरतलब है कि शाह की पंजाब यात्रा ऐसे समय हुई है जब राज्य में नशे की समस्या और उससे जुड़ी हिंसा एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में आ गई है।

मुख्यमंत्री मान का पक्ष

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक्स पर लिखा, 'हम नशों के खिलाफ लड़ रहे परमिंदर सिंह झोटा के परिवार के साथ हर समय मजबूती से खड़े हैं। परिवार की माँग मानते हुए हम यह मामला सीबीआई को सौंप रहे हैं।' मान ने आगे कहा कि नशा तस्करों के विरुद्ध उनकी सरकार की लड़ाई 'निर्णायक और पूरी ताकत से लड़ी जाने वाली लड़ाई' है और पंजाब को नशा-मुक्त बनाने के लिए जो भी कड़े कदम उठाने होंगे, वे पीछे नहीं हटेंगे।

कैबिनेट मंत्री चीमा का केंद्र पर पलटवार

पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर जवाबी हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि BJP नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने सीमा पर ड्रग्स की सप्लाई रोकने के लिए कोई सहायता नहीं दी।

चीमा ने कहा, 'पंजाब देश का पहला राज्य है जिसने अपने खर्च पर बॉर्डर पर एंटी-ड्रोन सिस्टम लागू किया है।' उन्होंने अमित शाह पर सवाल उठाते हुए पूछा कि 'तीन काले कानून' लाने वाली केंद्र सरकार ड्रग्स के विरुद्ध कानून बनाने की उनकी माँग पर विचार क्यों नहीं करती।

आगे क्या होगा

परमिंदर सिंह झोटा हत्याकांड अब औपचारिक रूप से सीबीआई की जाँच के दायरे में आ गया है। यह मामला पंजाब में नशा-विरोधी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और राज्य-केंद्र के बीच नशा तस्करी पर जवाबदेही के बड़े प्रश्नों से जुड़ा है। आने वाले दिनों में सीबीआई की जाँच की दिशा और उसके निष्कर्ष पंजाब की सियासत को और गहरे रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि इतने महीनों की देरी में राज्य पुलिस ने जो जांच की, उसकी विश्वसनीयता क्या बचती है। जाखड़ का 'देर' वाला तंज सतही लगता है, लेकिन पंजाब में नशा-विरोधी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा की व्यापक विफलता का सवाल उससे कहीं गहरा है। उधर, चीमा का केंद्र पर पलटवार एक राजनीतिक रक्षात्मक चाल है — एंटी-ड्रोन सिस्टम का दावा सराहनीय हो सकता है, लेकिन जब तक राज्य के भीतर वितरण नेटवर्क पर कार्रवाई नहीं होती, सीमा-सुरक्षा अधूरी है। असली परीक्षा यह है कि सीबीआई जांच महज एक मामले तक सिमटती है या पूरे तंत्र को उजागर करती है।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परमिंदर सिंह झोटा हत्याकांड क्या है?
परमिंदर सिंह झोटा पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक व्यक्ति थे, जिनकी हत्या कर दी गई। इस मामले ने पंजाब में नशा तस्करी और उससे जुड़ी हिंसा के मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।
झोटा हत्याकांड की जांच सीबीआई को क्यों सौंपी गई?
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 20 अक्टूबर 2026 को परिवार की माँग मानते हुए यह मामला सीबीआई को सौंपने का ऐलान किया। BJP नेता सुनील जाखड़ के अनुसार, सरकार जनाक्रोश के दबाव में यह कदम उठाने पर मजबूर हुई।
सुनील जाखड़ ने मान सरकार पर क्या आरोप लगाए?
जाखड़ ने कहा कि सीबीआई जांच का आदेश देने में मान सरकार ने बहुत देरी की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि AAP सरकार के कार्यकाल में नशा तस्करों के खिलाफ बोलने वाले कई लोगों की हत्या हुई या उन्हें आत्महत्या पर मजबूर किया गया।
पंजाब सरकार ने केंद्र पर क्या आरोप लगाए?
कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि केंद्र सरकार ने बॉर्डर पर ड्रग्स की सप्लाई रोकने के लिए कोई सहायता नहीं दी। उन्होंने दावा किया कि पंजाब देश का पहला राज्य है जिसने अपने खर्च पर सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम लागू किया।
इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की क्या भूमिका है?
सुनील जाखड़ ने पंजाब दौरे पर आए गृह मंत्री अमित शाह से अनुरोध किया कि सीबीआई जांच को व्यापक दायरे में और तय समय सीमा के भीतर पूरा कर पीड़ितों को पूरा न्याय दिलाया जाए। शाह की यात्रा के दौरान राज्य में नशे पर केंद्र-राज्य की जवाबदेही का सवाल भी उठा है।
राष्ट्र प्रेस
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