पंजाब बंद: नशे के खिलाफ किसान संगठनों का अमृतसर में गोल्डन गेट पर जोरदार प्रदर्शन
सारांश
मुख्य बातें
किसान मजदूर संघर्ष समिति (KMSC) और अन्य किसान संगठनों के आह्वान पर 15 अक्टूबर 2026 को पंजाब बंद का आयोजन किया गया, जिसके तहत अमृतसर के प्रतिष्ठित गोल्डन गेट के सामने किसान नेता सरवन सिंह पंधेर के नेतृत्व में दर्जनों किसानों और समर्थकों ने राज्य सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन किया। यह आंदोलन पंजाब में नशे के बढ़ते प्रभाव और ड्रग्स माफिया पर सरकार की कथित निष्क्रियता के विरोध में किया जा रहा है।
बंद की पृष्ठभूमि और मांगें
किसान मजदूर संघर्ष समिति तथा किसान मजदूर मोर्चा (KMM) की विभिन्न यूनियनों ने इस बंद का आह्वान किया। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर के अनुसार, राज्य में ड्रग्स माफिया पर अंकुश लगाने और किसानों की लंबित माँगों पर सरकार द्वारा ध्यान न दिए जाने के कारण यह विरोध प्रदर्शन आवश्यक हो गया। पंधेर ने स्पष्ट किया कि पुतला दहन के बाद प्रदर्शनकारी एकजुट होकर मार्च निकालेंगे।
गौरतलब है कि पंजाब में नशे की समस्या वर्षों से एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा रही है। राज्य की युवा पीढ़ी पर इसके प्रभाव को लेकर विभिन्न किसान और नागरिक संगठन लंबे समय से आवाज़ उठाते रहे हैं।
जनता का स्वतःस्फूर्त समर्थन
पंधेर ने बताया कि पूरे पंजाब और जिला मुख्यालयों पर बंद को भारी समर्थन मिला। उनके अनुसार, लोगों ने स्वतः ही अपनी दुकानें और प्रतिष्ठान बंद रखकर इस आंदोलन को सफल बनाया, जो जनभावना की व्यापकता को दर्शाता है। किसान नेता ने पंजाब के आम नागरिकों का आभार व्यक्त किया।
आपातकालीन सेवाओं को छूट, शांति की अपील
आंदोलन के दौरान आम जनता को होने वाली असुविधाओं को ध्यान में रखते हुए सरवन सिंह पंधेर ने स्पष्ट किया कि बंद के दौरान एम्बुलेंस और सभी आपातकालीन सेवाओं को पूरी तरह छूट दी गई है। उन्होंने आंदोलनकारियों और पंजाब के लोगों से अपील की कि प्रदर्शन पूर्णतः शांतिपूर्ण रहे।
पंधेर ने यह भी चेतावनी दी कि कोई भी असामाजिक या शरारती तत्व इस प्रदर्शन के दौरान माहौल बिगाड़ने की कोशिश न करे। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में राजनीतिक तनाव और किसान आंदोलनों की आवृत्ति दोनों बढ़ी हैं।
सरकार पर दबाव और आगे की राह
किसान नेता ने साफ़ शब्दों में कहा कि जब तक पंजाब सरकार राज्य में नशे के कारोबार पर नकेल नहीं कसती और किसानों की माँगों पर ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक उनका संघर्ष और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। यह बंद किसान संगठनों द्वारा सरकार को दिया गया एक स्पष्ट संकेत है कि वे अपनी माँगों से पीछे हटने को तैयार नहीं।
आने वाले दिनों में किसान संगठनों की अगली रणनीति और पंजाब सरकार की प्रतिक्रिया पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।