22 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पंजाब नशा संकट: एबीवीपी का चंडीगढ़ में पुलिस मुख्यालय घेराव, कई कार्यकर्ता हिरासत में

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पंजाब नशा संकट: एबीवीपी का चंडीगढ़ में पुलिस मुख्यालय घेराव, कई कार्यकर्ता हिरासत में

सारांश

पंजाब में नशे की बेकाबू होती समस्या एक बार फिर सड़क पर आई — एबीवीपी ने चंडीगढ़ में पुलिस मुख्यालय का घेराव किया, कई कार्यकर्ता हिरासत में। एंटी-ड्रग स्क्वाड के पुलिसकर्मी पर 15 किलो हेरोइन तस्करी का आरोप और नशा विरोधी कार्यकर्ता की हत्या — ये दो घटनाएँ इस विरोध की असली चिंगारी हैं।

मुख्य बातें

एबीवीपी ने 22 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ के सेक्टर-9 स्थित पंजाब पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया; कई कार्यकर्ता हिरासत में।
एबीवीपी नेता गौरव वीर सिंह सोहल ने भगवंत मान सरकार और डीजीपी गौरव यादव पर नशे की समस्या के प्रति उदासीनता का आरोप लगाया।
नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह की दिनदहाड़े हत्या और एंटी-ड्रग स्क्वाड के एक पुलिसकर्मी द्वारा कथित तौर पर 15 किलो हेरोइन तस्करी प्रदर्शन की प्रमुख वजह।
एबीवीपी ने केंद्र सरकार से सीबीआई और एनआईए को पंजाब में तैनात करने की माँग की।
'युद्ध नशा विरुद्ध' अभियान को बैनरों और सोशल मीडिया तक सीमित बताते हुए जमीनी विफलता का आरोप।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने 22 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ के सेक्टर-9 स्थित पंजाब पुलिस मुख्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और भगवंत मान सरकार तथा पंजाब पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के विरुद्ध तीखी नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने डीजीपी कार्यालय का घेराव करने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

प्रदर्शन का कारण और मांगें

एबीवीपी का यह विरोध प्रदर्शन पंजाब में नशे की लगातार बढ़ती समस्या और राज्य सरकार की कथित निष्क्रियता के विरोध में आयोजित किया गया। पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के पूर्व अध्यक्ष एवं एबीवीपी नेता गौरव वीर सिंह सोहल ने प्रदर्शन से पहले कहा, 'पंजाब के युवाओं की आवाज आज चीख-चीख कर सामने आ रही है लेकिन पंजाब सरकार और पुलिस-प्रशासन को इससे रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ रहा।'

सोहल ने कहा कि पूरा प्रदेश नशे की गिरफ्त में है और मुख्यमंत्री व डीजीपी को इस बात की परवाह नहीं कि पंजाब का युवा नशे में डूब रहा है या नहीं। उन्होंने 'युद्ध नशा विरुद्ध' अभियान को केवल बैनरों और सोशल मीडिया कैंपेन तक सीमित बताते हुए आरोप लगाया कि जमीनी स्तर पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा।

नशा विरोधी कार्यकर्ता की हत्या का मुद्दा

सोहल ने हाल ही में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह की दिनदहाड़े हुई हत्या का मसला भी उठाया। उन्होंने कहा कि इस घटना पर डीजीपी गौरव यादव ने एक भी बयान नहीं दिया। उन्होंने एसएसपी के उस बयान पर भी सवाल उठाया जिसमें परविंदर सिंह की मौत को 'आपसी रंजिश' करार दिया गया था। एबीवीपी नेता ने कहा कि मंत्री हरपाल चीमा ने भी इसी तरह का बयान दिया था, जिसे उन्होंने 'बेहद घटिया' बताया।

पुलिस की साख पर सवाल

सोहल ने आरोप लगाया कि एंटी-ड्रग स्क्वाड का एक पुलिसकर्मी कथित तौर पर 15 किलो हेरोइन की तस्करी करते हुए पकड़ा गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पुलिस खुद इस धंधे में शामिल हो, तो आम जनता की सुरक्षा की क्या उम्मीद रखी जाए। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में नशे के मुद्दे पर विपक्षी दलों और नागरिक समूहों की ओर से राज्य सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।

सोहल ने कहा, 'हमें पंजाब पुलिस पर भरोसा नहीं है, हमें डीजीपी गौरव यादव पर भरोसा नहीं है और हमें सीएम भगवंत मान पर भी भरोसा नहीं है। पंजाब में आग लगी हुई है और मुख्यमंत्री फ्रांस में अपना जन्मदिन मनाकर आ रहे हैं।'

केंद्रीय जांच एजेंसियों की मांग

एबीवीपी ने मांग की कि केंद्र सरकार, सीबीआई और एनआईए को पंजाब में तैनात करे। संगठन का कहना है कि सबसे पहले पंजाब पुलिस के भीतर ही जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि कौन-कौन किस स्तर पर तस्करी में संलिप्त है।

प्रदर्शन में शामिल एक छात्रा ने कहा कि उनकी मांग सिर्फ छात्रों के हित में है — पंजाब में ड्रग्स का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है और हर छात्र का भविष्य खतरे में है, लेकिन सरकार चुप्पी साधे बैठी है।

राजनीतिक संकेत और आगे की राह

सोहल ने 2027 के विधानसभा चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि जिस तरह से भगवंत मान सरकार ने पंजाबियों को 'तंग' किया है, जनता उसका जवाब मतपेटी में देगी। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब एबीवीपी ने पंजाब में नशे के मुद्दे पर सड़क पर उतरकर सरकार को घेरा हो — आने वाले महीनों में इस मुद्दे की राजनीतिक तीव्रता और बढ़ने की संभावना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एबीवीपी ने चंडीगढ़ में प्रदर्शन क्यों किया?
एबीवीपी ने 22 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ में पंजाब में बढ़ती नशे की समस्या और भगवंत मान सरकार की कथित निष्क्रियता के विरोध में पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह की हत्या और एंटी-ड्रग स्क्वाड के एक पुलिसकर्मी पर 15 किलो हेरोइन तस्करी का आरोप इस विरोध की तात्कालिक वजह बने।
परविंदर सिंह कौन थे और उनकी हत्या से यह मामला क्यों जुड़ा?
परविंदर सिंह एक नशा विरोधी कार्यकर्ता थे जिनकी दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। एबीवीपी नेता गौरव वीर सिंह सोहल ने आरोप लगाया कि इस हत्या पर डीजीपी गौरव यादव ने कोई बयान नहीं दिया और एसएसपी ने मौत को 'आपसी रंजिश' बताया, जिसे संगठन ने अस्वीकार्य बताया।
एबीवीपी ने सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
एबीवीपी ने केंद्र सरकार से सीबीआई और एनआईए को पंजाब में तैनात करने की माँग की है। संगठन चाहता है कि पंजाब पुलिस के भीतर ही जाँच हो और यह पता लगाया जाए कि कौन-कौन किस स्तर पर नशे की तस्करी में संलिप्त है।
'युद्ध नशा विरुद्ध' अभियान पर एबीवीपी का क्या आरोप है?
एबीवीपी का आरोप है कि पंजाब सरकार का 'युद्ध नशा विरुद्ध' अभियान केवल बैनरों और सोशल मीडिया कैंपेन तक सीमित रह गया है और जमीनी स्तर पर इसका कोई ठोस असर नहीं दिखा। संगठन का कहना है कि घोषणाओं और हकीकत के बीच बड़ा अंतर है।
क्या पंजाब पुलिस के किसी अधिकारी पर नशा तस्करी का आरोप है?
एबीवीपी नेता गौरव वीर सिंह सोहल ने आरोप लगाया कि एंटी-ड्रग स्क्वाड का एक पुलिसकर्मी कथित तौर पर 15 किलो हेरोइन की तस्करी करते हुए पकड़ा गया है। इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले