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पंजाब ड्रग सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक करे AAP सरकार: BJP नेता सुनील जाखड़ की चुनौती

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पंजाब ड्रग सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक करे AAP सरकार: BJP नेता सुनील जाखड़ की चुनौती

सारांश

BJP नेता सुनील जाखड़ ने ₹250 करोड़ के पंजाब ड्रग सर्वे की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की माँग की है। उन्होंने AAP पर आरोप लगाया कि सर्वे का असल मकसद नशे की आपूर्ति श्रृंखला को समझकर उस पर नियंत्रण करना था — न कि समस्या का समाधान। 65 लाख परिवारों पर इसका असर पड़ा, फिर भी रिपोर्ट गायब है।

मुख्य बातें

BJP नेता सुनील जाखड़ ने 26 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ में पंजाब की AAP सरकार से ड्रग सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक करने की माँग की।
सर्वेक्षण पर कथित तौर पर ₹250 करोड़ खर्च और 28,000 कर्मचारी तैनात, लेकिन रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं।
जाखड़ के अनुसार 65 लाख परिवारों को सर्वे प्रक्रिया में 'अपमान' का सामना करना पड़ा।
नशे के 80% मामले अब फार्मास्युटिकल दवाओं के दुरुपयोग से जुड़े हैं — डीजीपी के बयान का हवाला दिया।
जाखड़ ने हेरोइन तस्कर 'हैरी' की 2024 में पैरोल और दुबई फरारी, तथा कांस्टेबल करम सिंह से 25 किलो हेरोइन बरामदगी के मामले उठाए।
AAP सरकार या मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पंजाब इकाई के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने 26 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) की अगुवाई वाली पंजाब सरकार को सीधी चुनौती दी — राज्यव्यापी ड्रग सर्वेक्षण की रिपोर्ट तत्काल सार्वजनिक की जाए। जाखड़ ने आरोप लगाया कि इस सर्वेक्षण पर ₹250 करोड़ खर्च किए गए, 28,000 कर्मचारी तैनात किए गए और 65 लाख परिवारों को इस प्रक्रिया में 'अपमान' झेलना पड़ा — फिर भी रिपोर्ट का कहीं अता-पता नहीं है।

जाखड़ के आरोप: क्या है दावा

जाखड़ ने कथित तौर पर आरोप लगाया कि AAP का वास्तविक उद्देश्य पंजाब में नशे की समस्या का समाधान करना नहीं, बल्कि ड्रग व्यापार की पूरी आपूर्ति श्रृंखला — 'खरीद से वितरण तक' — को व्यवस्थित रूप से समझना और उस पर नियंत्रण स्थापित करना था। उन्होंने कहा, 'रिपोर्ट कहाँ है?' — और दावा किया कि इस सर्वेक्षण का असली मकसद राज्य की छवि धूमिल करना तथा अवैध धंधे पर एकाधिकार जमाना था।

जाखड़ ने यह भी कहा कि इस 'घिनौनी योजना' के सूत्रधार मुख्यमंत्री भगवंत मान नहीं, बल्कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया हैं। हालाँकि, ये आरोप जाखड़ के अपने दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन और डीजीपी के बयान का हवाला

जाखड़ ने पंजाब के डीजीपी के उस बयान का उल्लेख किया जिसमें कहा गया था कि राज्य में नशे के 80 प्रतिशत मामले अब फार्मास्युटिकल दवाओं के दुरुपयोग से जुड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इसी के अनुरूप पूरी दवा आपूर्ति श्रृंखला पर नियंत्रण की रणनीति बनाई है।

इस संदर्भ में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के आरोप में पकड़े गए एक ड्रग इंस्पेक्टर को बहाल कर ड्रग कंट्रोलर नियुक्त किया गया, जिससे यह तंत्र सरकार के प्रत्यक्ष नियंत्रण में आ गया।

हेरोइन तस्करी के तीन मामलों का उल्लेख

जाखड़ ने तीन अलग-अलग मामलों को एक सिलसिले में जोड़ते हुए पेश किया। पहला — नथाना पुलिस स्टेशन द्वारा 2023 में 4 किलो हेरोइन की जब्ती, जिसमें फिरोजपुर जेल में बंद 'हैरी' मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया। जाखड़ के अनुसार, हैरी को अबोहर हत्याकांड में 20 वर्ष की सजा थी और उस पर सात अन्य मामले भी दर्ज थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि फाजिल्का के उपायुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के माध्यम से 2024 में हैरी की पैरोल में मदद की गई, जिसके बाद वह फरार होकर दुबई पहुँच गया। जाखड़ के मुताबिक, हैरी अब अबोहर से लुधियाना तक के इलाकों में तस्करी और जबरन वसूली संचालित कर रहा है, जबकि पुलिस ने उसकी फाइल बंद कर दी है।

दूसरा मामला 'बाज' ड्रोन रोधी प्रणाली से जुड़े कांस्टेबल करम सिंह का है, जिससे कथित तौर पर 25 किलो हेरोइन बरामद हुई और उसने 24 अन्य खेपों की व्यवस्था करने की बात स्वीकार की। जाखड़ ने सवाल उठाया कि क्या यह कांस्टेबल अकेला काम कर रहा था या कोई वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल था।

तीसरे सूत्र के रूप में उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा सरपंचों और AAP से कथित तौर पर जुड़े नेताओं के पास से ड्रग्स जब्त किए जाने का हवाला दिया।

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति

इन तमाम आरोपों पर AAP सरकार या मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में नशे की समस्या एक लंबे समय से राजनीतिक बहस का केंद्र रही है और विपक्ष लगातार सरकार पर इस मोर्चे पर दबाव बनाता रहा है।

गौरतलब है कि AAP ने 2022 के विधानसभा चुनाव में नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई को अपना प्रमुख चुनावी वादा बनाया था। जाखड़ के आरोप उसी वादे की जवाबदेही की माँग के रूप में सामने आए हैं। आने वाले दिनों में सरकार के जवाब और ड्रग सर्वे रिपोर्ट के सार्वजनिक होने या न होने पर सभी की नज़र टिकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ये एकतरफा राजनीतिक बयानबाजी के दायरे में भी आते हैं — इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। असली सवाल यह है कि ₹250 करोड़ और 28,000 कर्मचारियों की तैनाती के बावजूद रिपोर्ट को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया — यह पारदर्शिता की माँग किसी भी दल की सरकार से उचित है। AAP ने 2022 में नशे के खिलाफ लड़ाई को अपना सबसे बड़ा जनादेश बताया था; चार साल बाद रिपोर्ट की अनुपस्थिति उसी जनादेश पर सवालिया निशान है। मीडिया और नागरिक समाज को चाहिए कि वे केवल विपक्षी आरोपों तक सीमित न रहें, बल्कि सरकार से सर्वे के कार्यप्रणाली, डेटा और निष्कर्षों का ब्यौरा माँगें।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब ड्रग सर्वे रिपोर्ट पर विवाद क्या है?
BJP नेता सुनील जाखड़ ने AAP सरकार पर आरोप लगाया है कि ₹250 करोड़ और 28,000 कर्मचारियों की तैनाती के बावजूद राज्यव्यापी ड्रग सर्वेक्षण की रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई। उनका कहना है कि 65 लाख परिवारों को इस प्रक्रिया में अपमान झेलना पड़ा, लेकिन रिपोर्ट का कहीं अता-पता नहीं।
सुनील जाखड़ ने AAP पर क्या आरोप लगाए हैं?
जाखड़ ने कथित तौर पर आरोप लगाया कि AAP का असल मकसद पंजाब में नशे की पूरी आपूर्ति श्रृंखला — खरीद से वितरण तक — को समझकर उस पर नियंत्रण करना था। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस 'योजना' के सूत्रधार अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया हैं। ये आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं।
हैरी और कांस्टेबल करम सिंह के मामले क्या हैं?
जाखड़ के अनुसार, फिरोजपुर जेल में बंद हैरी — जिसे अबोहर हत्याकांड में 20 साल की सजा थी — को 2024 में पैरोल दिलाई गई, जिसके बाद वह फरार होकर दुबई पहुँच गया। कांस्टेबल करम सिंह से 25 किलो हेरोइन बरामद हुई और उसने 24 और खेपों की व्यवस्था करने की बात स्वीकार की।
पंजाब सरकार ने इन आरोपों पर क्या कहा?
26 अक्टूबर 2026 तक AAP सरकार या मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार का जवाब आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।
पंजाब में नशे की समस्या कितनी गंभीर है?
पंजाब के डीजीपी के बयान के अनुसार, राज्य में नशे के 80 प्रतिशत मामले अब फार्मास्युटिकल दवाओं के दुरुपयोग से जुड़े हैं। राज्य लंबे समय से सीमा पार हेरोइन तस्करी और नशे की लत की गंभीर समस्या से जूझ रहा है, और यह मुद्दा 2022 के विधानसभा चुनाव में भी केंद्रीय था।
राष्ट्र प्रेस
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