7 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पंजाब में 65% युवा ड्रग्स की चपेट में — विधानसभा समिति रिपोर्ट पर BJP का AAP सरकार पर हमला

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पंजाब में 65% युवा ड्रग्स की चपेट में — विधानसभा समिति रिपोर्ट पर BJP का AAP सरकार पर हमला

सारांश

पंजाब विधानसभा समिति की रिपोर्ट ने राज्य में नशे की भयावह तस्वीर पेश की है — 65% से अधिक युवा प्रभावित, नशा-मुक्ति दवाओं की खपत चार साल में 57% बढ़ी। BJP ने इसे AAP के 'तीन महीने में ड्रग्स खत्म' वाले वादे की खुली पोल बताया।

मुख्य बातें

पंजाब विधानसभा समिति की रिपोर्ट के अनुसार 65% से अधिक युवा ड्रग्स की चपेट में हैं।
18 से 35 वर्ष की आयु वर्ग नशे की लत से सबसे अधिक प्रभावित।
पिछले चार वर्षों में ब्यूप्रेनॉर्फिन जैसी नशा-मुक्ति दवाओं की खपत 57% बढ़ी — लगभग 70 करोड़ से 1.1 अरब गोलियों तक।
BJP पंजाब अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने AAP सरकार के 'ड्रग-फ्री पंजाब' अभियान को पूरी तरह विफल बताया।
AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सत्ता में आने पर तीन महीने में ड्रग्स खत्म करने का वादा किया था, जो साढ़े चार साल बाद भी अधूरा है।

पंजाब विधानसभा की एक समिति की रिपोर्ट ने राज्य में नशे की स्थिति को लेकर गंभीर तथ्य सामने रखे हैं, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर तीखा हमला बोला है। पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने 7 अगस्त, शुक्रवार को इस रिपोर्ट को AAP सरकार की सबसे बड़ी विफलता का दस्तावेज़ करार दिया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार 65 प्रतिशत से अधिक युवा ड्रग्स की चपेट में हैं, जो राज्य के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

रिपोर्ट के प्रमुख तथ्य

विधानसभा समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 18 से 35 वर्ष की आयु के युवा नशे की लत से सबसे अधिक प्रभावित हैं। ढिल्लों ने बताया कि पिछले चार वर्षों में ब्यूप्रेनॉर्फिन जैसी नशा-मुक्ति दवाओं की खपत 57 प्रतिशत बढ़ गई है — जो कथित तौर पर लगभग 70 करोड़ से बढ़कर 1.1 अरब गोलियों तक पहुँच गई है। इसके साथ ही, सरकारी अस्पतालों में उपचार के लिए बेड की भारी कमी बनी हुई है।

AAP के वादे और ज़मीनी हकीकत

ढिल्लों ने याद दिलाया कि AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सत्ता में आने से पहले वादा किया था कि पंजाब में उनकी सरकार बनने के तीन महीने के भीतर ड्रग्स की समस्या को जड़ से खत्म कर दिया जाएगा। आलोचकों का कहना है कि साढ़े चार साल बीत जाने के बाद भी स्थिति पहले से कहीं अधिक चिंताजनक हो गई है।

BJP नेता ने कहा कि सरकार का 'ड्रग-फ्री पंजाब' और 'ड्रग्स के खिलाफ जंग' अभियान ज़मीनी स्तर पर पूरी तरह विफल रहा है और केवल विज्ञापनों तथा खोखले दावों तक सिमट कर रह गया है।

BJP की माँगें और सुझाव

ढिल्लों ने सरकार से तीन ठोस कदम उठाने की माँग की। पहला — ड्रग सप्लाई चेन को पूरी तरह ध्वस्त किया जाए। दूसरा — बड़े ड्रग तस्करों के खिलाफ बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के कठोर कार्रवाई हो। तीसरा — नशे से प्रभावित युवाओं के उपचार, काउंसलिंग और पुनर्वास के लिए एक समयबद्ध और प्रभावी नीति लागू की जाए।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ अभी से शुरू हो गई हैं और नशे का मुद्दा राज्य की राजनीति में केंद्रीय स्थान रखता है। गौरतलब है कि पंजाब में ड्रग्स की समस्या दशकों पुरानी है और इस पर हर सरकार के कार्यकाल में सवाल उठते रहे हैं। ढिल्लों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पंजाब का भविष्य तभी सुरक्षित हो सकता है, जब राज्य के युवाओं को नशे की दलदल से बाहर निकाला जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह महज़ विपक्षी आरोप नहीं रहता — यह संस्थागत स्वीकृति है। नशा-मुक्ति दवाओं की खपत में 57% की वृद्धि एक विरोधाभास है जिसे सरकार नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती: यदि नशे की लत घट रही होती, तो इन दवाओं की माँग बढ़ती नहीं। पंजाब में ड्रग्स की समस्या किसी एक सरकार की देन नहीं है, लेकिन AAP ने जिस तरह के पूर्ण उन्मूलन के वादे किए थे, उनकी कसौटी पर उसे कसा जाना स्वाभाविक है। असली सवाल यह है कि क्या यह रिपोर्ट नीतिगत सुधार की शुरुआत बनेगी या चुनावी हथियार बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब विधानसभा समिति की ड्रग्स रिपोर्ट में क्या सामने आया है?
रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में 65% से अधिक युवा ड्रग्स की चपेट में हैं और 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग सबसे अधिक प्रभावित है। पिछले चार वर्षों में नशा-मुक्ति दवाओं की खपत 57% बढ़ी है, जबकि सरकारी अस्पतालों में उपचार के लिए बेड की भारी कमी है।
BJP ने इस रिपोर्ट पर क्या कहा?
पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने इस रिपोर्ट को AAP सरकार की सबसे बड़ी विफलता का दस्तावेज़ बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का 'ड्रग्स के खिलाफ जंग' अभियान केवल विज्ञापनों और खोखले दावों तक सीमित रहा है।
अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में ड्रग्स को लेकर क्या वादा किया था?
AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने चुनाव से पहले वादा किया था कि पंजाब में उनकी सरकार बनने के तीन महीने के भीतर ड्रग्स की समस्या समाप्त कर दी जाएगी। साढ़े चार साल बाद भी विधानसभा समिति की रिपोर्ट स्थिति को पहले से अधिक गंभीर बता रही है।
ब्यूप्रेनॉर्फिन की खपत में इतनी बढ़ोतरी क्यों चिंताजनक है?
ब्यूप्रेनॉर्फिन एक नशा-मुक्ति दवा है जो नशे के आदी लोगों को दी जाती है। इसकी खपत में 57% की वृद्धि यह संकेत देती है कि नशे की लत में वास्तव में कमी नहीं आई है, बल्कि उपचार की माँग बढ़ी है — जो सरकार के 'ड्रग-फ्री पंजाब' के दावों के विपरीत है।
BJP ने पंजाब में नशे की समस्या से निपटने के लिए क्या सुझाव दिए हैं?
BJP ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — ड्रग सप्लाई चेन को पूरी तरह तोड़ा जाए, बड़े तस्करों के खिलाफ बिना राजनीतिक हस्तक्षेप के कठोर कार्रवाई हो, और नशा-प्रभावित युवाओं के उपचार व पुनर्वास के लिए समयबद्ध नीति लागू की जाए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले