मानसा हत्याकांड: इंसाफ कमेटी ने पंजाब सीएम और डीजीपी का इस्तीफा माँगा, 14 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के मानसा में परविंदर सिंह झोटा की हत्या को लेकर राजनीतिक और सामाजिक माहौल तेज़ी से गर्माता जा रहा है। इंसाफ कमेटी ने 19 अक्टूबर 2026 को पंजाब सरकार को 14 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा और स्पष्ट कहा कि जब तक इन सभी माँगों पर सहमति नहीं बनती, आगे की किसी भी बातचीत का कोई सवाल नहीं। यह हत्याकांड कथित तौर पर एक नशा तस्कर-पुलिस-राजनीतिक गठजोड़ से जुड़ा बताया जा रहा है।
मुख्य माँगें: सीएम और डीजीपी का इस्तीफा
इंसाफ कमेटी की सबसे बड़ी माँग यह है कि पंजाब के मुख्यमंत्री नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए अपना इस्तीफा दें और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) भी तत्काल पद छोड़ें। कमेटी का आरोप है कि राज्य में नशा तस्करों, पुलिस अधिकारियों और राजनेताओं के बीच एक सक्रिय गठजोड़ है, जिसकी परिणति इस हत्या के रूप में सामने आई।
कमेटी ने माँग की है कि मानसा के एसएचओ, डीएसपी और ड्रग इंस्पेक्टर को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाए। साथ ही आरोपियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से कड़ी और नज़ीर कायम करने वाली सज़ा दिलाई जाए।
जाँच और न्याय की माँग
इंसाफ कमेटी ने माँग की है कि परविंदर सिंह झोटा का पोस्टमार्टम परिवार की सहमति के बाद पीजीआई चंडीगढ़ के वरिष्ठ चिकित्सकों के पैनल से करवाया जाए। हत्या की घटना तथा इसके पीछे कथित नशा तस्कर-पुलिस-राजनीतिक गठजोड़ की जाँच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से करवाने की भी माँग रखी गई है।
कमेटी ने आगे कहा कि हत्यारे दुकानदार से जुड़े पूरे नशा रैकेट, फैक्ट्रियों, वितरण नेटवर्क और इसमें संलिप्त व्यक्तियों व अधिकारियों की गहन जाँच हो तथा उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए। संबंधित फैक्ट्रियों के लाइसेंस रद्द कर उन्हें बंद करवाने की माँग भी शामिल है।
पीड़ितों के लिए मुआवजा और स्मारक
घायलों के संदर्भ में कमेटी ने माँग की है कि हमले में ज़ख्मी हुए सभी लोगों का इलाज उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्थान में सरकारी खर्च पर करवाया जाए और प्रत्येक घायल को तत्काल ₹20 लाख का मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा लुधियाना के युवक जशनदीप की मौत के मामले में उसके परिवार को भी ₹20 लाख मुआवजे की माँग उठाई गई है।
कमेटी ने यह भी कहा कि जिस दुकान में परविंदर सिंह झोटा को गोली मारी गई, वहाँ उनका स्मारक बनाया जाए और उनके नाम पर ख्याला कलां में एक ट्रॉमा सेंटर की स्थापना की जाए।
नशा-विरोधी कानून में सख्ती की माँग
कमेटी ने नशे के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने की माँग करते हुए कहा कि 75 मिलीग्राम से अधिक प्रेगाबालिन युक्त कैप्सूलों को एनडीपीएस एक्ट के दायरे में लाया जाए। नशे के लिए दुरुपयोग होने वाली अन्य दवाओं को भी इस कानून के अंतर्गत शामिल करने की माँग रखी गई है।
गौरतलब है कि यह मांग ऐसे समय में आई है जब पंजाब में नशे की समस्या राजनीतिक विमर्श का केंद्र बिंदु बनी हुई है और एनडीपीएस एक्ट की सीमाओं पर लंबे समय से बहस जारी है।
मामले दर्ज करने पर भी उठे सवाल
इंसाफ कमेटी ने माँग की है कि पूरे पंजाब में इस संघर्ष से संबंधित फ्लेक्स फाड़ने को लेकर दर्ज किए गए सभी मामले तत्काल रद्द किए जाएँ। इसके साथ ही परविंदर सिंह झोटा के पिता और एंटी-ड्रग फोर्स के कार्यकर्ताओं पर दर्ज कथित झूठे मामले भी वापस लेने की माँग की गई है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पंजाब सरकार इन माँगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या इंसाफ कमेटी के साथ बातचीत का कोई रास्ता खुलता है।