पंजाब: नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या में CBI जांच की मांग, हाई कोर्ट में PIL दायर
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में 15 अक्टूबर 2026 को एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर मानसा के नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह उर्फ झोटा की हत्या की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने यह भी माँग की है कि इस जांच की निगरानी स्वयं उच्च न्यायालय करे। इस बीच, मृतक के परिवार और स्थानीय लोगों के रोष को देखते हुए महिला इंस्पेक्टर बेअंत कौर, थाना सिटी-1, मानसा को निलंबित कर दिया गया है।
कौन थे परविंदर सिंह झोटा
45 वर्षीय परविंदर सिंह झोटा मानसा के निवासी और पूर्व फ्रीस्टाइल कबड्डी खिलाड़ी थे। उन्होंने 'एंटी-ड्रग टास्क फोर्स' का गठन किया था और मेडिकल स्टोरों पर नशे की अवैध बिक्री के लाइव वीडियो बनाकर अपने फेसबुक पेज पर अपलोड करते थे, जिसके करीब 63 हज़ार फॉलोअर्स थे। उनकी यह सक्रियता स्थानीय नशा तस्करों के लिए असुविधाजनक बनती जा रही थी।
मुख्य घटनाक्रम — 13 अक्टूबर की वारदात
13 अक्टूबर 2026 को झोटा ने बठिंडा रोड, मानसा स्थित आरोपी अश्वनी कुमार के मेडिकल स्टोर से एक व्यक्ति को नशीले कैप्सूल खरीदकर निकलते हुए देखा। उन्होंने वीडियो बनाना शुरू किया, आरोपी से सवाल किए और पुलिस को फोन किया — लेकिन पुलिस मौके पर नहीं पहुँची। इसी दौरान आरोपी ने उन पर गोली चला दी।
इस हमले में झोटा के चार साथी — कुलविंदर सिंह, गोबिंद सिंह, बलतेज सिंह और हैप्पी — भी घायल हो गए। मृतक के पिता की शिकायत के अनुसार, आरोपी और उसके साथियों ने दिनदहाड़े उनके बेटे का पीछा कर गोली मारी। फायरिंग के बाद भी पुलिस करीब 20-25 मिनट तक मौके पर नहीं पहुँची और गंभीर रूप से घायल परविंदर को तत्काल अस्पताल नहीं ले जाया गया। बाद में उन्हें सिविल अस्पताल मानसा ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
PIL में उठाए गए गंभीर सवाल
याचिका में कई संवेदनशील मुद्दे उठाए गए हैं। जुलाई 2023 में झोटा ने आरोपी अश्वनी कुमार के मेडिकल स्टोर पर प्रतिबंधित नशीले कैप्सूल बेचने का आरोप लगाया था, जिस पर केस दर्ज हुआ था; हालाँकि आरोपी के खिलाफ क्रॉस-केस दर्ज कर झोटा को भी हिरासत में लिया गया था और सितंबर 2023 में रिहा किया गया था।
याचिका के अनुसार, ड्रग इंस्पेक्टर मानसा के बयान के हवाले से प्रेस रिपोर्टों में बताया गया है कि पिछले चार वर्षों में आरोपी की दुकान पर करीब दस बार छापे पड़े, तीन बार लाइसेंस निलंबित किया गया, तीन बार नशीले पदार्थ बरामद किए गए और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के तहत कार्रवाई भी हुई — फिर भी लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द नहीं किया गया। याचिकाकर्ता ने यह भी सवाल उठाया है कि आपराधिक पृष्ठभूमि के बावजूद आरोपी को आर्म्स लाइसेंस क्यों दिया गया।
मानसा में आक्रोश और पंजाब बंद
इस घटना के बाद मानसा में भारी आक्रोश फैल गया। 13 अक्टूबर को पूर्ण बंद रहा और प्रदर्शनकारियों ने बरनाला-सिरसा रोड पर टिंकोनी चौक को जाम किया। 14 अक्टूबर को भीड़ ने आरोपी के मेडिकल स्टोर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी और एक फायर टेंडर को भी नुकसान पहुँचाया। 15 अक्टूबर को पंजाब बंद का आह्वान किया गया।
क्या होगा आगे
याचिका में मृतक के परिवार और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा राज्य में कानून-व्यवस्था बहाल करने की भी माँग की गई है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पंजाब में नशे की समस्या और उससे जुड़ी पुलिस की भूमिका पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। उच्च न्यायालय की इस PIL पर सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन इस मामले ने राज्य की कानून-व्यवस्था और नशा माफिया के संरक्षण के सवाल को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।