15 अक्टूबर 2026
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पंजाब: नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या में CBI जांच की मांग, हाई कोर्ट में PIL दायर

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पंजाब: नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या में CBI जांच की मांग, हाई कोर्ट में PIL दायर

सारांश

नशे के खिलाफ लाइव वीडियो बनाने वाले मानसा के कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या, पुलिस की 20 मिनट की देरी और बार-बार छापों के बावजूद लाइसेंस न रद्द होने ने पंजाब की नशा-माफिया सांठगांठ के सवाल को फिर उठा दिया है।

मुख्य बातें

परविंदर सिंह झोटा (45 वर्ष), मानसा के नशा विरोधी कार्यकर्ता, को 13 अक्टूबर 2026 को आरोपी अश्वनी कुमार ने गोली मारकर हत्या कर दी।
घटना के बाद पुलिस 20-25 मिनट तक नहीं पहुँची; झोटा को तत्काल अस्पताल नहीं ले जाया गया।
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में PIL दायर कर CBI जांच और उच्च न्यायालय की निगरानी की माँग की गई।
थाना सिटी-1 मानसा की महिला इंस्पेक्टर बेअंत कौर को निलंबित किया गया।
आरोपी की दुकान पर 4 वर्षों में 10 बार छापे और 3 बार लाइसेंस निलंबन के बावजूद लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द नहीं हुआ।
15 अक्टूबर को पंजाब बंद का आह्वान; मानसा में भारी आक्रोश, आरोपी के स्टोर में तोड़फोड़ और आगज़नी।

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में 15 अक्टूबर 2026 को एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर मानसा के नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह उर्फ झोटा की हत्या की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने यह भी माँग की है कि इस जांच की निगरानी स्वयं उच्च न्यायालय करे। इस बीच, मृतक के परिवार और स्थानीय लोगों के रोष को देखते हुए महिला इंस्पेक्टर बेअंत कौर, थाना सिटी-1, मानसा को निलंबित कर दिया गया है।

कौन थे परविंदर सिंह झोटा

45 वर्षीय परविंदर सिंह झोटा मानसा के निवासी और पूर्व फ्रीस्टाइल कबड्डी खिलाड़ी थे। उन्होंने 'एंटी-ड्रग टास्क फोर्स' का गठन किया था और मेडिकल स्टोरों पर नशे की अवैध बिक्री के लाइव वीडियो बनाकर अपने फेसबुक पेज पर अपलोड करते थे, जिसके करीब 63 हज़ार फॉलोअर्स थे। उनकी यह सक्रियता स्थानीय नशा तस्करों के लिए असुविधाजनक बनती जा रही थी।

मुख्य घटनाक्रम — 13 अक्टूबर की वारदात

13 अक्टूबर 2026 को झोटा ने बठिंडा रोड, मानसा स्थित आरोपी अश्वनी कुमार के मेडिकल स्टोर से एक व्यक्ति को नशीले कैप्सूल खरीदकर निकलते हुए देखा। उन्होंने वीडियो बनाना शुरू किया, आरोपी से सवाल किए और पुलिस को फोन किया — लेकिन पुलिस मौके पर नहीं पहुँची। इसी दौरान आरोपी ने उन पर गोली चला दी।

इस हमले में झोटा के चार साथी — कुलविंदर सिंह, गोबिंद सिंह, बलतेज सिंह और हैप्पी — भी घायल हो गए। मृतक के पिता की शिकायत के अनुसार, आरोपी और उसके साथियों ने दिनदहाड़े उनके बेटे का पीछा कर गोली मारी। फायरिंग के बाद भी पुलिस करीब 20-25 मिनट तक मौके पर नहीं पहुँची और गंभीर रूप से घायल परविंदर को तत्काल अस्पताल नहीं ले जाया गया। बाद में उन्हें सिविल अस्पताल मानसा ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

PIL में उठाए गए गंभीर सवाल

याचिका में कई संवेदनशील मुद्दे उठाए गए हैं। जुलाई 2023 में झोटा ने आरोपी अश्वनी कुमार के मेडिकल स्टोर पर प्रतिबंधित नशीले कैप्सूल बेचने का आरोप लगाया था, जिस पर केस दर्ज हुआ था; हालाँकि आरोपी के खिलाफ क्रॉस-केस दर्ज कर झोटा को भी हिरासत में लिया गया था और सितंबर 2023 में रिहा किया गया था।

याचिका के अनुसार, ड्रग इंस्पेक्टर मानसा के बयान के हवाले से प्रेस रिपोर्टों में बताया गया है कि पिछले चार वर्षों में आरोपी की दुकान पर करीब दस बार छापे पड़े, तीन बार लाइसेंस निलंबित किया गया, तीन बार नशीले पदार्थ बरामद किए गए और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के तहत कार्रवाई भी हुई — फिर भी लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द नहीं किया गया। याचिकाकर्ता ने यह भी सवाल उठाया है कि आपराधिक पृष्ठभूमि के बावजूद आरोपी को आर्म्स लाइसेंस क्यों दिया गया।

मानसा में आक्रोश और पंजाब बंद

इस घटना के बाद मानसा में भारी आक्रोश फैल गया। 13 अक्टूबर को पूर्ण बंद रहा और प्रदर्शनकारियों ने बरनाला-सिरसा रोड पर टिंकोनी चौक को जाम किया। 14 अक्टूबर को भीड़ ने आरोपी के मेडिकल स्टोर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी और एक फायर टेंडर को भी नुकसान पहुँचाया। 15 अक्टूबर को पंजाब बंद का आह्वान किया गया।

क्या होगा आगे

याचिका में मृतक के परिवार और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा राज्य में कानून-व्यवस्था बहाल करने की भी माँग की गई है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पंजाब में नशे की समस्या और उससे जुड़ी पुलिस की भूमिका पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। उच्च न्यायालय की इस PIL पर सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन इस मामले ने राज्य की कानून-व्यवस्था और नशा माफिया के संरक्षण के सवाल को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस तंत्र की विफलता का प्रतीक है जो नशा माफिया को अप्रत्यक्ष संरक्षण देता है। चार साल में दस छापे, तीन बार लाइसेंस निलंबन और बरामदगी के बावजूद दुकान चलती रही — यह सवाल पूछता है कि जवाबदेही का तंत्र कहाँ टूटा। पुलिस की 20-25 मिनट की देरी और झोटा की मृत्यु पूर्व अस्पताल न पहुँचाया जाना इस विफलता को और गहरा करता है। CBI जांच की माँग उचित है, परंतु असली परीक्षा यह होगी कि क्या उच्च न्यायालय की निगरानी में लाइसेंसिंग और पुलिस की जवाबदेही की संरचनात्मक खामियाँ उजागर होंगी — या यह मामला भी एक और याचिका बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परविंदर सिंह झोटा कौन थे और उनकी हत्या कैसे हुई?
परविंदर सिंह झोटा मानसा, पंजाब के 45 वर्षीय नशा विरोधी कार्यकर्ता और पूर्व कबड्डी खिलाड़ी थे, जिनके फेसबुक पेज पर करीब 63 हज़ार फॉलोअर्स थे। 13 अक्टूबर 2026 को जब वे आरोपी अश्वनी कुमार के मेडिकल स्टोर पर नशीले कैप्सूल की बिक्री का वीडियो बना रहे थे, तब आरोपी ने उन पर गोली चला दी और बाद में अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई।
हाई कोर्ट में दायर PIL में क्या माँगें की गई हैं?
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में दायर PIL में मानसा के मामले की CBI जांच और उसकी उच्च न्यायालय निगरानी की माँग की गई है। इसके अलावा मृतक के परिवार एवं गवाहों की सुरक्षा, आरोपी के ड्रग और आर्म्स लाइसेंस देने की जांच, तथा राज्य में कानून-व्यवस्था बहाल करने की भी माँग शामिल है।
आरोपी के मेडिकल स्टोर का लाइसेंस बार-बार कार्रवाई के बावजूद रद्द क्यों नहीं हुआ?
रिपोर्टों के अनुसार, ड्रग इंस्पेक्टर मानसा के बयान के हवाले से बताया गया है कि पिछले चार वर्षों में आरोपी की दुकान पर करीब दस बार छापे पड़े, तीन बार लाइसेंस निलंबित हुआ और तीन बार नशीले पदार्थ बरामद भी हुए। बावजूद इसके लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द नहीं किया गया — याचिका इसी तंत्र की खामी को केंद्रीय मुद्दा बनाती है।
पुलिस की भूमिका पर क्या सवाल उठे हैं?
झोटा ने फायरिंग से पहले पुलिस को फोन किया था, लेकिन पुलिस नहीं आई। फायरिंग के बाद भी पुलिस करीब 20-25 मिनट तक मौके पर नहीं पहुँची और गंभीर रूप से घायल झोटा को तत्काल अस्पताल नहीं ले जाया गया। इस लापरवाही के चलते थाना सिटी-1 की महिला इंस्पेक्टर बेअंत कौर को निलंबित किया गया है।
मानसा और पंजाब में इस घटना के बाद क्या हुआ?
13 अक्टूबर को मानसा में पूर्ण बंद रहा और बरनाला-सिरसा रोड पर टिंकोनी चौक जाम हुआ। 14 अक्टूबर को भीड़ ने आरोपी के मेडिकल स्टोर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। 15 अक्टूबर को पंजाब बंद का आह्वान किया गया, जिससे पूरे राज्य में आक्रोश की लहर दिखी।
राष्ट्र प्रेस
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