झोटा हत्याकांड: चारों आरोपी 5 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में, परिवार का पोस्टमॉर्टम से इनकार
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के मानसा में परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड में 22 अक्टूबर को चारों आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) राजिंदर नागपाल की अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने अश्वनी कुमार, नीलम रानी, विपन और लड्डी को 5 नवंबर 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इस बीच, मृतक के परिवार और एक्शन कमेटी ने पंजाब सरकार द्वारा मांगें पूरी किए जाने तक शव का पोस्टमॉर्टम न कराने का कड़ा रुख अपनाया है।
अदालती कार्यवाही का घटनाक्रम
चारों आरोपियों को CJM राजिंदर नागपाल की अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए प्रस्तुत किया गया। अदालत ने सभी पक्षों की सुनवाई के पश्चात सभी चार आरोपियों को 5 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश सुनाया। यह मामला नशीले पदार्थों की कथित अवैध बिक्री के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को एक मेडिकल स्टोर के भीतर गोली मारकर हत्या से जुड़ा है।
परिवार का रुख: मांगें पूरी होने तक पोस्टमॉर्टम नहीं
मृतक की पत्नी मनप्रीत कौर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक पंजाब सरकार धरना शुरू होने से पहले रखी गई परिवार की सभी मांगें स्वीकार नहीं करती, तब तक शव का पोस्टमॉर्टम नहीं कराया जाएगा। एक्शन कमेटी ने भी परिवार के इस रुख को पूरा समर्थन दिया है।
परिवार का यह कदम मामले में एक नया राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव उत्पन्न कर रहा है। अब तक पंजाब सरकार की ओर से परिवार की मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सीबीआई जांच और गृह मंत्री की मुलाकात
गौरतलब है कि इस मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हाथों में है। इससे पूर्व, गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब के गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में उन तीन पीड़ितों के परिवारों से मुलाकात की थी, जिन्हें नशीले पदार्थों की गैरकानूनी गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाने के बाद कथित तौर पर मौत के घाट उतारा गया।
शाह ने तीनों परिवारों को न्याय दिलाने का भरोसा दिया और तीनों मामलों में CBI जांच का वादा किया। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में नशा-विरोधी आंदोलनकारियों की सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है।
मामले की पृष्ठभूमि
13 अक्टूबर 2026 को मानसा के एक मेडिकल स्टोर में परविंदर सिंह झोटा पर गोलियाँ चलाई गईं, जिससे उनकी मौत हो गई। झोटा नशीले पदार्थों की कथित अवैध बिक्री के विरुद्ध सक्रिय रूप से आवाज उठाने के लिए जाने जाते थे। यह घटना पंजाब में नशे के खिलाफ बोलने वाले कार्यकर्ताओं पर कथित हमलों की श्रृंखला में एक और कड़ी मानी जा रही है।
आगे क्या होगा
अब सभी नज़रें पंजाब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। परिवार द्वारा पोस्टमॉर्टम से इनकार और CBI जांच की प्रगति — दोनों मिलकर इस मामले को राज्य की कानून-व्यवस्था एवं नशा-तस्करी के खिलाफ लड़ाई की कसौटी बना रहे हैं। आने वाले दिनों में 5 नवंबर को अदालती पेशी से पहले सरकार और परिवार के बीच किसी सुलह की संभावना पर नज़र रहेगी।