18 जुलाई 2026
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मजीठिया की गिरफ्तारी पर भड़के सुखबीर-हरसिमरत बादल, पंजाब सरकार पर बदले की राजनीति का आरोप

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मजीठिया की गिरफ्तारी पर भड़के सुखबीर-हरसिमरत बादल, पंजाब सरकार पर बदले की राजनीति का आरोप

सारांश

पंजाब पुलिस की मजीठिया के खिलाफ छापेमारी ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। सुखबीर बादल ने सीधे भगवंत मान और केजरीवाल को चुनौती दी, तो हरसिमरत कौर ने पुलिस पर कार्यकर्ता को बंदी बनाने का आरोप लगाया। भाजपा भी विरोध में उतरी।

मुख्य बातें

पंजाब पुलिस ने 1 जून को अमृतसर और चंडीगढ़ में छापेमारी कर बिक्रमजीत सिंह मजीठिया की गिरफ्तारी का प्रयास किया।
कार्रवाई मजीठा थाने पर कथित हमले और पुलिस हिरासत से जोबनप्रीत नामक आरोपी को छुड़ाने के प्रयास के आरोप के बाद हुई।
सुखबीर सिंह बादल ने इसे 'पूरी तरह बदले की राजनीति' बताया और भगवंत मान व अरविंद केजरीवाल को चुनौती दी।
हरसिमरत कौर बादल ने आरोप लगाया कि पुलिस ने अकाली दल के एक निर्दोष कार्यकर्ता को बंदी बनाकर रखा था।
पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने भी कार्रवाई को बदले की राजनीति करार देते हुए विरोध जताया।

पंजाब पुलिस ने शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता बिक्रमजीत सिंह मजीठिया की गिरफ्तारी के लिए 1 जून को अमृतसर और चंडीगढ़ में कई स्थानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के बाद अकाली दल के शीर्ष नेताओं ने पंजाब सरकार पर बदले की राजनीति का आरोप लगाते हुए तीखा पलटवार किया है।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस की यह कार्रवाई मजीठा थाने पर हुए कथित हमले के बाद शुरू हुई। आरोप है कि बिक्रमजीत सिंह मजीठिया और उनके समर्थकों ने पुलिस हिरासत से जोबनप्रीत नाम के एक आरोपी को छुड़ाने का प्रयास किया था। इसी आधार पर मजीठिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज की गई।

सुखबीर बादल की प्रतिक्रिया

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने इस कार्रवाई को सीधे तौर पर राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा, 'बिक्रम सिंह मजीठिया के ऊपर इन्होंने जो केस डाला है, यह पूरी तरह बदले की राजनीति है। यह सोचते हैं कि बिक्रम मजीठिया को केस डालकर डरा देंगे और अकाली दल के कार्यकर्ताओं को डरा देंगे। यह गलतफहमी में हैं। हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।'

सुखबीर बादल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को सीधे चुनौती देते हुए कहा, 'जितने केस डालने हैं, डाल दो। पंजाब की जनता इन्हें चार महीने में जवाब देगी।'

हरसिमरत कौर बादल का आरोप

अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने इस मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, 'राज्य के मुख्यमंत्री बौखला चुके हैं। बिक्रम सिंह मजीठिया जब आजाद घूमते हैं तो मुख्यमंत्री को एक्सपोज करते हैं। इनकी धांधलियों को एक्सपोज करते हैं। जनता को लॉ एंड ऑर्डर का हाल बताते हैं। यह मुख्यमंत्री से बर्दाश्त नहीं होता।'

हरसिमरत कौर बादल ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी अकाली दल के एक निर्दोष कार्यकर्ता को उठा ले गए थे और एसएचओ ने उसे अपने घर पर बंदी बनाकर रखा था — उसके मुंह पर पट्टी और हाथ रस्सी से बंधे थे। उन्होंने कहा कि मजीठिया ने उस कार्यकर्ता को छुड़ाने का प्रयास किया और मांग की कि यदि गिरफ्तारी करनी है तो एफआईआर दर्ज कर थाने ले जाया जाए — इसी के चलते उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

भाजपा की प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी पंजाब सरकार की इस कार्रवाई की निंदा की। पंजाब भाजपा के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा, 'बिक्रम सिंह मजीठिया पर छापे मारे जा रहे हैं। पहले दिन से ही मैं कहता आ रहा हूं कि यह बदले की राजनीति है और मैं इसके सख्त खिलाफ हूं। भारतीय जनता पार्टी भी इसका कड़ा विरोध करती है।' उन्होंने कहा कि पंजाब असली मुद्दों — विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, किसान और युवाओं की समस्याओं — को नजरअंदाज कर बदले की राजनीति में उलझ गया है।

आगे क्या होगा

मजीठिया अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं और उनकी गिरफ्तारी की कोशिशें जारी हैं। यह मामला आने वाले महीनों में पंजाब की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बनने की संभावना है, खासकर जब सुखबीर बादल ने 'चार महीने में जनता का जवाब' का संकेत दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पंजाब में बढ़ती राजनीतिक टकराहट का नया अध्याय है। गौरतलब है कि सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और विपक्षी अकाली दल के बीच टकराव लगातार तीखा होता जा रहा है, और इस तरह की छापेमारी विपक्ष को एकजुट करने का काम कर रही है। भाजपा का अकाली दल के साथ खड़ा होना यह भी दर्शाता है कि पंजाब में विपक्षी गठबंधन की संभावना बन रही है। असली सवाल यह है कि क्या पंजाब सरकार कानूनी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाएगी, या यह मामला राजनीतिक शहादत की कहानी बन जाएगा — जो अकाली दल के लिए चुनावी हथियार बन सकती है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिक्रमजीत सिंह मजीठिया के खिलाफ क्या मामला दर्ज है?
मजीठिया पर आरोप है कि उन्होंने और उनके समर्थकों ने मजीठा थाने पर हमला कर पुलिस हिरासत से जोबनप्रीत नामक आरोपी को छुड़ाने का प्रयास किया। इसी आधार पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।
सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब सरकार पर क्या आरोप लगाए?
सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि मजीठिया के खिलाफ दर्ज मामला पूरी तरह बदले की राजनीति है और इसका मकसद अकाली दल के नेताओं व कार्यकर्ताओं को डराना है। उन्होंने भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल को चुनौती दी कि जनता चार महीने में इसका जवाब देगी।
हरसिमरत कौर बादल ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए?
हरसिमरत कौर बादल ने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी अकाली दल के एक निर्दोष कार्यकर्ता को उठा ले गए और एसएचओ ने उसे अपने घर पर बंदी बनाकर रखा — मुंह पर पट्टी और हाथ रस्सी से बंधे। मजीठिया ने उसे छुड़ाने का प्रयास किया, जिसके चलते उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ।
भाजपा ने इस मामले में क्या रुख अपनाया?
पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने मजीठिया के खिलाफ छापेमारी को बदले की राजनीति बताते हुए कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि पंजाब असली विकास के मुद्दों को छोड़कर राजनीतिक प्रतिशोध में उलझ गया है।
मजीठिया की गिरफ्तारी का पंजाब की राजनीति पर क्या असर होगा?
यह मामला पंजाब में विपक्षी एकता को मजबूत करने का अवसर बन सकता है, क्योंकि अकाली दल और भाजपा दोनों एक साथ सरकार के खिलाफ खड़े हैं। सुखबीर बादल के 'चार महीने में जवाब' वाले बयान से संकेत मिलता है कि यह मुद्दा आगामी चुनावी राजनीति में केंद्रीय भूमिका निभा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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