नंदिनी दूध ₹8 प्रति लीटर महंगा, BJP नेता आर. अशोक ने कर्नाटक सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार ने गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को नंदिनी दूध की कीमतों में ₹8 प्रति लीटर की वृद्धि की घोषणा की, जो 1 नवंबर 2026 से लागू होगी। इस बढ़ोतरी के विरोध में कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार पर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने का आरोप लगाया और सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी।
मूल्य वृद्धि का विवरण
सरकार की घोषणा के अनुसार, ₹8 की इस बढ़ोतरी में से ₹7 दूध उत्पादक किसानों को और ₹1 दूध संघों को मिलेगा। इससे किसानों को मिलने वाला प्रति लीटर मूल्य ₹35 से बढ़कर ₹42 हो जाएगा। सरकारी सब्सिडी ₹5 प्रति लीटर पूर्ववत रहने पर किसानों को कुल ₹47 प्रति लीटर प्राप्त होंगे।
आर. अशोक के अनुसार, यदि यह वृद्धि लागू होती है तो नंदिनी टोंड दूध की खुदरा कीमत ₹46 से बढ़कर ₹54 प्रति लीटर हो जाएगी — जो उपभोक्ताओं पर सीधा असर डालेगी।
पिछली बढ़ोतरियों का इतिहास
अशोक ने आरोप लगाया कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने जुलाई 2023 में ₹3, जून 2024 में ₹2 और मार्च 2025 में ₹4 की बढ़ोतरी पहले ही कर चुकी है। उनके मुताबिक, प्रस्तावित ₹8 की वृद्धि को मिलाकर कुल बढ़ोतरी ₹17 प्रति लीटर तक पहुँच जाएगी। गौरतलब है कि यह लगातार चौथी मूल्य वृद्धि होगी और पिछले तीन वर्षों में सबसे बड़ी एकल बढ़ोतरी।
विपक्ष की आपत्तियाँ और मांगें
अशोक ने मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार को सीधे संबोधित करते हुए पूछा कि क्या आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ाना और अतिरिक्त कर लगाना कांग्रेस की वे 'गारंटियाँ' हैं जो उसने कर्नाटक की जनता से की थीं। उन्होंने सरकार से माँग की कि वह मूल्य वृद्धि के निर्णय को तुरंत वापस ले, अन्यथा भारतीय जनता पार्टी (BJP) सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करेगी।
अशोक ने सरकार से यह भी आग्रह किया कि किसानों के हित या परिवहन निगमों के घाटे का हवाला देने से पहले वह अपने वित्तीय प्रबंधन का स्पष्टीकरण दे।
बस किराए पर भी उठे सवाल
विपक्ष के नेता ने केवल दूध की कीमतों तक ही अपनी आपत्ति सीमित नहीं रखी। उन्होंने कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) और बेंगलुरु महानगर परिवहन निगम (BMTC) के बस किराए में वृद्धि की चल रही चर्चाओं पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि यदि दूध और बस किराए — दोनों में एक साथ बढ़ोतरी होती है, तो रोज़ाना के जीवन में इसका बोझ बच्चों से लेकर दैनिक यात्रियों तक, सभी पर पड़ेगा।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में खाद्य महँगाई पहले से ही मध्यमवर्गीय परिवारों के बजट को प्रभावित कर रही है। आलोचकों का कहना है कि दूध जैसी आवश्यक वस्तु में बड़ी वृद्धि उन परिवारों को सबसे अधिक प्रभावित करती है जिनकी आय सीमित है और जो दैनिक पोषण के लिए डेयरी उत्पादों पर निर्भर हैं। सरकार ने अभी तक इस विरोध पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। आने वाले दिनों में BJP के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन और सरकार के रुख पर सभी की नज़रें टिकी हैं।