कर्नाटक वित्तीय संकट: विपक्ष नेता आर. अशोक ने सीएम शिवकुमार से तत्काल इस्तीफे की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने 23 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार राज्य के वित्त प्रबंधन में पूरी तरह विफल रही है और खाली खजाने के बावजूद हज़ारों करोड़ रुपये की घोषणाएँ कर जनता को गुमराह कर रही है।
विरोध प्रदर्शन और आरोप
अशोक बेंगलुरु स्थित अशोका विधान सौधा परिसर में केंगल हनुमंथैया प्रतिमा के निकट आयोजित BJP के विरोध प्रदर्शन में बोल रहे थे। इस अवसर पर BJP के राज्य अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र, विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाडी नारायणस्वामी, तथा अनेक विधायक और विधान परिषद सदस्य भी उपस्थित रहे।
अशोक ने सीधे शब्दों में कहा, 'आप (डीके शिवकुमार) वित्त विभाग का प्रबंधन करने में असमर्थ हैं। इसलिए, आप मुख्यमंत्री बने रहने के योग्य नहीं हैं। तुरंत इस्तीफा दें।' उन्होंने राज्य सरकार को 'दिवालिया सरकार' और 'सिर्फ घोषणाओं की, दिखावटी सरकार' करार दिया।
खाली खजाने पर सरकार की 'खोखली घोषणाएँ'
अशोक ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के विभिन्न मंत्री दौरों के दौरान अकूत घोषणाएँ करते रहे हैं, जबकि राज्य के पास पर्याप्त धन ही नहीं है। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री शिवकुमार ने मंगलुरु में ₹32,000 करोड़ की घोषणा की; मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कलबुर्गी में ₹40,000 करोड़ और चामराजनगर में ₹20,000 करोड़ की घोषणा की; जबकि विभिन्न कैबिनेट बैठकों में ₹25,000 करोड़ से ₹50,000 करोड़ तक की घोषणाएँ की गईं।
अशोक ने यह भी दावा किया कि राज्य के वित्त विभाग ने स्वयं एक विज्ञप्ति जारी कर राज्य की दयनीय वित्तीय स्थिति और पर्याप्त धन के बिना की जा रही वित्तीय प्रतिबद्धताओं पर चिंता जताई है।
सूखा राहत, पेंशन और वेतन पर संकट
विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार आम जनता की बुनियादी ज़रूरतें पूरी करने में भी विफल रही है। उनके अनुसार, लोग चार महीने से सूखा राहत का इंतज़ार कर रहे हैं; पाँच महीने से पेंशन का भुगतान नहीं हुआ है; शिक्षकों के वेतन अटके हैं; किसानों को बिजली नहीं मिल रही; और दूध उत्पादकों को 12 महीने से सब्सिडी नहीं मिली है।
अशोक ने परिवहन विभाग पर ₹5,000 करोड़ का बकाया होने और बिजली क्षेत्र की सब्सिडी लंबित रहने का भी दावा किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली सिद्धारमैया सरकार ₹22,000 करोड़ का घाटा छोड़ गई थी और ₹2 लाख करोड़ के बिल अभी भी लंबित हैं।
कर्ज़ जुटाने में भी कठिनाई का दावा
अशोक ने दावा किया कि राज्य सरकार ऋण जुटाने के लिए भी संघर्ष कर रही है और वित्त विभाग ने संकेत दिया है कि कर्नाटक आगे ऋण प्राप्त करने में सक्षम नहीं होगा। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य की गारंटी योजनाओं — जैसे 'शक्ति' और 'गृह ज्योति' — के खर्च को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
गौरतलब है कि ये सभी आरोप BJP की ओर से लगाए गए हैं और कर्नाटक सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में राज्य विधानसभा और सार्वजनिक मंचों पर इस वित्तीय विवाद के और तेज़ होने की संभावना है।