कर्नाटक: BJP नेता आर. अशोक का आरोप — कांग्रेस सरकार ने एक महीने में भी ₹2,500 सूखा राहत नहीं दी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को राज्य की कांग्रेस सरकार पर किसान-विरोधी होने का तीखा आरोप लगाया। उनका कहना है कि विधानसभा के विशेष सत्र को एक महीना बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार किसानों को प्रति एकड़ ₹2,500 की 'इनपुट सब्सिडी' (सूखा राहत राशि) उनके बैंक खातों में हस्तांतरित करने में विफल रही है।
मुख्य आरोप क्या हैं
अशोक ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने विशेष सत्र के दौरान बड़ी राहत की घोषणा की, लेकिन वह वादा किसानों तक नहीं पहुँचाया। उन्होंने ₹2,500 की राशि को पहले से सूखे की मार झेल रहे किसान समुदाय का 'अपमान' बताया।
अशोक ने यह भी दावा किया कि स्वयं राज्य सरकार के वरिष्ठ नेता डॉ. जी. परमेश्वर ने कथित तौर पर फंड जारी होने में देरी को लेकर वित्त विभाग के कामकाज पर असंतोष जताया है। उन्होंने सवाल किया, 'क्या ऐसी सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार है, जो लोकतंत्र के मंदिर में 224 चुने हुए प्रतिनिधियों के सामने की गई घोषणा के अनुसार पैसे भी जारी नहीं कर सकती?'
फसल बीमा योजना पर दोहरा आरोप
अशोक ने कांग्रेस सरकार पर किसानों को दो मोर्चों पर विफल करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, सरकार ने न केवल सूखा राहत राशि जारी नहीं की, बल्कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत राज्य सरकार का प्रीमियम हिस्सा भी नहीं चुकाया। इस कारण किसान बीमा मुआवजे से वंचित हो रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, 'एक तरफ, वे किसानों से किए गए मामूली राहत के वादे को भी पूरा न करके उन्हें गुमराह कर रहे हैं। दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत राज्य सरकार का प्रीमियम हिस्सा न जमा करके किसानों को धोखा दे रहे हैं, जिससे उन्हें बीमा मुआवजा नहीं मिल पा रहा है।'
सरकार के भीतर असंतोष का हवाला
अशोक ने तर्क दिया कि जब सरकार के अपने उपमुख्यमंत्री और मंत्री ही उसके कामकाज से असंतुष्ट बताए जा रहे हों, तो आम जनता उस सरकार पर कैसे भरोसा करे। उन्होंने कहा, 'बड़ी-बड़ी घोषणाएँ करना और उनका श्रेय लेना, लेकिन जब लागू करने की बारी आए तो यह कह देना कि सरकारी खजाना खाली है — क्या यही आपकी तथाकथित किसान-हितैषी सरकार का मतलब है?'
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कई जिले लगातार सूखे की चपेट में हैं और किसान राहत राशि की प्रतीक्षा में हैं।
BJP की माँग और चेतावनी
अशोक ने राज्य सरकार से तत्काल दो माँगें रखीं — पहली, किसानों को सूखा राहत राशि ₹2,500 प्रति एकड़ की दर से तुरंत जारी की जाए; दूसरी, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में राज्य का बकाया प्रीमियम हिस्सा चुकाया जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि सूखे की मार झेल रहे गरीब किसानों का गुस्सा अंततः कांग्रेस सरकार के लिए राजनीतिक रूप से महँगा साबित होगा। यह कर्नाटक में कांग्रेस और BJP के बीच कृषि नीति को लेकर जारी टकराव की एक और कड़ी है, जो आगामी राजनीतिक घटनाक्रम को प्रभावित कर सकती है।