कर्नाटक सूखा: भाजपा नेता आर. अशोक ने राहुल गांधी से प्रभावित इलाकों का दौरा करने का किया आग्रह, ₹2,500 राहत पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को एक खुला पत्र लिखकर कर्नाटक के सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा करने, फसल नुकसान की गंभीरता का स्वयं आकलन करने और राज्य सरकार पर किसानों को पर्याप्त राहत दिलाने के लिए दबाव बनाने का आग्रह किया। यह पत्र ऐसे समय आया है जब कर्नाटक में 1971 के बाद सबसे भीषण सूखे की स्थिति बताई जा रही है और केंद्र से ₹10,000 करोड़ से ₹12,000 करोड़ की राहत की माँग लंबित है।
सूखे का दायरा और नुकसान का पैमाना
अशोक ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि राज्य सरकार ने 217 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। 47.09 लाख हेक्टेयर में फसल का अनुमानित नुकसान ₹46,324.50 करोड़ आँका गया है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश में 35 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जिसे अशोक ने पत्र में 1971 के बाद राज्य की सबसे बदतर स्थिति बताया।
लाखों किसान परिवारों की आजीविका और आर्थिक सुरक्षा इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हुई है। अशोक के अनुसार, फसल बर्बादी, बढ़ते कृषि कर्ज और खेती की बढ़ती लागत ने किसानों के सामने तत्काल हस्तक्षेप की ज़रूरत खड़ी कर दी है।
₹2,500 की राहत पर विवाद
राज्य की कांग्रेस सरकार ने लगभग 50 लाख सूखा प्रभावित किसानों को पहली किस्त के रूप में प्रति किसान ₹2,500 की इनपुट सब्सिडी जारी की है, जिस पर कुल ₹1,250 करोड़ खर्च हो चुके हैं। अशोक ने तर्क दिया कि यह राशि खेती के लिए जमीन तैयार करने की बुनियादी लागत को पूरा करने के लिए भी नाकाफी है।
गौरतलब है कि केंद्र के राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) के नियमों के अनुसार किसान ₹8,500 की कुल राहत के हकदार हैं, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों का हिस्सा शामिल है। हालाँकि, केंद्र सरकार ने अभी तक अपना हिस्सा जारी नहीं किया है, इसलिए राज्य ने अपने कोष से पहली किस्त देने का निर्णय लिया।
पिछली BJP सरकार के आँकड़ों से तुलना
अशोक ने अपने दावों के समर्थन में 2019-20 से 2022-23 के बीच पिछली BJP सरकार के कार्यकाल में दी गई राहत का विवरण पेश किया। उनके अनुसार उस दौरान 57.43 लाख हेक्टेयर में फसल नुकसान के लिए 51.90 लाख किसानों को कुल ₹6,651.15 करोड़ की इनपुट सब्सिडी दी गई थी।
वर्षवार आँकड़ों के अनुसार: 2019 में 6,71,314 किसानों को ₹1,232.20 करोड़; 2020 में 12,00,346 किसानों को ₹941.70 करोड़; 2021 में 18,56,083 किसानों को ₹2,446.10 करोड़; और 2022 में 14,62,841 किसानों को ₹2,031.15 करोड़ की सहायता दी गई थी।
अशोक ने पिछली सरकार की राहत दरों का भी उल्लेख किया — बारिश पर निर्भर फसलों के लिए ₹13,600 प्रति हेक्टेयर (SDRF/NDRF से ₹8,500 + राज्य हिस्से से ₹5,100), सिंचित फसलों के लिए ₹25,000 प्रति हेक्टेयर (SDRF/NDRF से ₹17,000 + राज्य से ₹8,000), और बारहमासी फसलों के लिए ₹28,000 प्रति हेक्टेयर (SDRF/NDRF से ₹22,500 + राज्य से ₹4,500)।
BJP की माँग और राजनीतिक संदर्भ
अशोक ने पत्र में कहा, 'सिर्फ नाम के लिए नहीं, बल्कि असल और असरदार मदद की जरूरत है।' उन्होंने राहुल गांधी से माँग की कि वे राज्य सरकार से जवाब माँगें और उसे निर्देश दें कि राहत कार्य पिछली BJP सरकार के समतुल्य स्तर पर हो। उन्होंने सूखा प्रभावित इलाकों की पहचान और घोषणा में हुई देरी की भी आलोचना करते हुए कहा कि किसान प्रशासनिक प्रक्रियाओं का इंतज़ार नहीं कर सकते।
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक सरकार पर पहले से ही गारंटी योजनाओं के वित्तीय बोझ और राजकोषीय दबाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। केंद्र से अपेक्षित NDRF हिस्से के जारी न होने से राज्य की वित्तीय स्थिति और जटिल हो गई है। आने वाले हफ्तों में केंद्र-राज्य राहत बँटवारे पर राजनीतिक तनाव और गहरा होने की संभावना है।