23 सितंबर 2026
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कर्नाटक सूखा संकट: BJP के आर. अशोक का आरोप — वित्त विभाग के पत्र ने खुद उजागर किया वित्तीय संकट

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कर्नाटक सूखा संकट: BJP के आर. अशोक का आरोप — वित्त विभाग के पत्र ने खुद उजागर किया वित्तीय संकट

सारांश

कर्नाटक विधानसभा में BJP नेता आर. अशोक ने 17 सितंबर के वित्त विभाग के पत्र का हवाला देते हुए दावा किया कि राज्य का राजस्व घाटा ₹22,952 करोड़ और लंबित बिल ₹2 लाख करोड़ तक पहुँच गए हैं। सवाल यह है — क्या आर्थिक संकट सूखे से जूझ रहे कर्नाटक की राहत क्षमता को कमज़ोर कर देगा?

मुख्य बातें

BJP नेता और विपक्ष के नेता आर.
अशोक ने 22 सितंबर 2026 को कर्नाटक विधानसभा में सूखा चर्चा के दौरान राज्य सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाया।
17 सितंबर के वित्त विभाग के पत्र के अनुसार नई योजनाओं और अतिरिक्त उधार की बेहद सीमित गुंजाइश है।
राजकोषीय घाटा FRBM की 3% सीमा के मुकाबले 2.95% पर; राजस्व घाटा ₹22,952 करोड़ ।
राज्य की बकाया देनदारियाँ GSDP के 24.94% तक; लंबित बिल लगभग ₹2 लाख करोड़ ।
67.32 लाख हेक्टेयर में बुआई — 84.10 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य से काफी कम।
अशोक ने ₹50,000 प्रति एकड़ मुआवजा और ₹5,000 करोड़ के आपदा कोष को तुरंत लागू करने की माँग की।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने 22 सितंबर 2026 को सूखे की स्थिति पर विशेष चर्चा के दौरान राज्य की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने 17 सितंबर के वित्त विभाग के एक आंतरिक पत्र का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सरकार के अपने विभाग ने स्वीकार किया है कि नई योजनाओं और अतिरिक्त उधार की बेहद सीमित गुंजाइश बची है — और यही वित्तीय संकट सूखा राहत के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा बन सकता है।

वित्त विभाग के पत्र में क्या है

अशोक के अनुसार, 17 सितंबर के वित्त विभाग के कम्युनिकेशन में यह स्वीकार किया गया है कि लगभग ₹1,000 करोड़ के प्रोजेक्ट बजट से बाहर हैं और जब तक अतिरिक्त संसाधनों की पहचान नहीं होती, नई योजनाओं को वित्त देना कठिन होगा। उन्होंने दावा किया कि राजकोषीय घाटा FRBM फ्रेमवर्क की 3% की सीमा के मुकाबले 2.95% तक पहुँच गया है, जबकि राजस्व घाटा ₹22,952 करोड़ दर्ज किया गया है।

अशोक ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य की बकाया देनदारियाँ GSDP के 24.94% तक पहुँच चुकी हैं, जो 25% की तय सीमा के करीब है — और इससे नए कर्ज लेने की गुंजाइश लगभग समाप्त हो गई है। उनके अनुसार, विभिन्न विभागों के लंबित बिल लगभग ₹2 लाख करोड़ तक पहुँच चुके हैं, जिनमें सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) और जल संसाधन सहित चार विभागों का हिस्सा अकेले ₹36,136 करोड़ है।

सूखे में देरी पर सवाल

अशोक ने तर्क दिया कि अप्रैल 2026 में ही भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कम बारिश की चेतावनी दी थी, और केंद्र से एल नीनो के संभावित असर के संकेत भी मिले थे। बावजूद इसके, राज्य सरकार ने चार महीने बाद सूखे की आधिकारिक घोषणा की। उन्होंने सवाल किया कि अप्रैल में ही कैबिनेट नोट तैयार होने के बाद इतनी देरी क्यों हुई।

अशोक ने क्लाउड सीडिंग परियोजना की भी आलोचना की और दावा किया कि मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद इस पर ₹28 करोड़ खर्च किए गए, किंतु किसानों को कोई लाभ नहीं मिला। उन्होंने बताया कि 4 सितंबर तक 84.10 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले केवल 67.32 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो सकी।

राहत उपायों की माँग

विपक्ष के नेता ने सरकार से कई तत्काल माँगें रखीं — खेती का कर्ज माफ करना, ₹50,000 प्रति एकड़ मुआवजा देना, निजी साहूकारों को विनियमित करना, ग्रामीण योजनाओं के तहत रोजगार देना, चारे का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित करना, पशु आश्रय बनाना, झीलों से गाद निकालना और बोरवेल पर लगी रोक में जरूरत के अनुसार ढील देना।

अशोक ने यह भी माँग की कि पलायन कर चुके परिवारों को सहायता और उनके बच्चों को शिक्षा सुविधा मिले, साथ ही प्रस्तावित ₹5,000 करोड़ के प्राकृतिक आपदा कोष को तुरंत लागू किया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि कर्नाटक में करीब 37 लाख बोरवेल हैं, और सरकार से पूछा कि इनमें से कितने वास्तव में काम कर रहे हैं।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक के कई ज़िलों में सूखे की स्थिति गंभीर है और ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी, चारे और रोजगार की किल्लत बढ़ रही है। अशोक का कहना है, "प्राकृतिक सूखे से तभी निपटा जा सकता है जब सरकार में कोई वित्तीय सूखा न हो" — यह बयान सीधे तौर पर यह इशारा करता है कि राज्य की खस्ता आर्थिक हालत राहत कार्यों की रफ्तार पर असर डाल सकती है।

गौरतलब है कि चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में ₹5,000 करोड़ से अधिक के कार्यों को मंजूरी दी गई है, जो बजटीय दबाव को और बढ़ाता है। राज्य सरकार ने अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इसे अधिक विश्वसनीय बनाता है। असल सवाल यह है कि जब FRBM सीमा के करीब पहुँचने के बावजूद चालू वित्त वर्ष में ₹5,000 करोड़ के कार्यों को मंजूरी दी जा रही है, तो सूखा राहत के लिए बजटीय जगह कहाँ से आएगी? अप्रैल में IMD की चेतावनी के बाद चार महीने की देरी — चाहे प्रशासनिक हो या राजनीतिक — की कीमत अब किसान और मवेशी पालक चुका रहे हैं। राज्य सरकार को इन आँकड़ों का जवाब देना होगा, न कि केवल केंद्र पर दोष डालकर बचाव करना।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक वित्त विभाग के 17 सितंबर के पत्र में क्या कहा गया है?
BJP नेता आर. अशोक के अनुसार, इस पत्र में स्वीकार किया गया है कि नई योजनाओं और अतिरिक्त उधार की बेहद सीमित गुंजाइश बची है। करीब ₹1,000 करोड़ के प्रोजेक्ट बजट से बाहर हैं और अतिरिक्त संसाधनों की पहचान होने तक नई योजनाओं को वित्त देना कठिन होगा।
कर्नाटक का राजकोषीय और राजस्व घाटा अभी कितना है?
अशोक के दावे के अनुसार, राजकोषीय घाटा FRBM की 3% सीमा के मुकाबले 2.95% पर पहुँच गया है, जबकि राजस्व घाटा ₹22,952 करोड़ है। राज्य की बकाया देनदारियाँ GSDP के 24.94% तक पहुँच चुकी हैं, जो 25% की सीमा के करीब है।
कर्नाटक में सूखे की घोषणा में देरी क्यों हुई?
BJP नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया कि अप्रैल 2026 में ही IMD की कम बारिश चेतावनी और एल नीनो के संकेत मिल चुके थे, फिर भी सरकार ने चार महीने बाद सूखे की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अप्रैल में कैबिनेट नोट तैयार था, बावजूद इसके कार्रवाई में अनुचित विलंब हुआ।
BJP ने कर्नाटक सरकार से सूखा राहत के लिए क्या माँगें रखी हैं?
आर. अशोक ने खेती का कर्ज माफी, ₹50,000 प्रति एकड़ मुआवजा, निजी साहूकारों का विनियमन, ग्रामीण रोजगार, चारे का भंडारण, पशु आश्रय, झील से गाद निकालना और ₹5,000 करोड़ के प्राकृतिक आपदा कोष को तुरंत लागू करने की माँग की है।
कर्नाटक में सूखे का खेती पर क्या असर पड़ा है?
अशोक के अनुसार, 4 सितंबर तक 84.10 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले केवल 67.32 लाख हेक्टेयर में बुआई हो सकी है। इसके अलावा पीने के पानी, चारे और बोरवेल की मरम्मत की स्थिति भी नाकाफी बताई गई है।
राष्ट्र प्रेस
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