25 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कर्नाटक सरकार दिवालिया नहीं: उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने वित्त विभाग की सलाह पर विपक्ष का आरोप खारिज किया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कर्नाटक सरकार दिवालिया नहीं: उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने वित्त विभाग की सलाह पर विपक्ष का आरोप खारिज किया

सारांश

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने विधानसभा में विपक्ष को करारा जवाब दिया — वित्त विभाग की सलाह दिवालियेपन का नहीं, वित्तीय अनुशासन का संकेत है। BJP और येदियुरप्पा बोम्मई सरकारों के कार्यकाल के उदाहरण देकर उन्होंने यह साबित किया कि यह परंपरा हर सरकार में रही है।

मुख्य बातें

परमेश्वर ने 24 सितंबर 2026 को विधानसभा में स्पष्ट किया कि वित्त विभाग की सलाह सरकार के दिवालिया होने का प्रमाण नहीं है।
वित्त वर्ष 2026 27 में राजकोषीय घाटा 2.95 प्रतिशत — एफआरबीएम सीमा 3 प्रतिशत के भीतर; राज्य की देनदारियाँ जीएसडीपी की 24.94 प्रतिशत ।
राजस्व घाटा ₹22,957 करोड़ ; ₹1,000 करोड़ की प्रस्तावित योजना पर वित्त विभाग ने पहले धनराशि सुनिश्चित करने की सलाह दी।
राज्य में बारिश में 36 प्रतिशत की कमी; 177 तालुक सूखा प्रभावित घोषित।
पेयजल के लिए ₹117 करोड़ जारी; विधायक निधि से ₹189 करोड़ अतिरिक्त; एसडीआरएफ में लगभग ₹420 करोड़ उपलब्ध।
बोम्मई (2022) और येदियुरप्पा (2020) सरकारों के उदाहरण देकर परमेश्वर ने साबित किया कि ऐसी सलाह पूर्व BJP सरकारों को भी मिली थी।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को विधानसभा में स्पष्ट किया कि वित्त विभाग की ओर से वित्तीय अनुशासन के लिए दी गई सलाह को राज्य सरकार के दिवालिया होने का संकेत मानना सर्वथा गलत है। सूखे की स्थिति पर हुई विधानसभा चर्चा के दौरान उन्होंने विपक्ष के आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि ऐसी सलाह देना वित्त विभाग के सामान्य कामकाज का अभिन्न हिस्सा है।

वित्त विभाग की सलाह और उसका वास्तविक अर्थ

परमेश्वर ने विस्तार से समझाया कि वित्त विभाग की जिम्मेदारी है कि वह सरकार को तय बजट सीमा से अधिक खर्च करने के प्रति सावधान करे। उन्होंने कहा, "अगर बजट में तय राशि से ज्यादा खर्च करने का प्रस्ताव आता है तो वित्त विभाग स्वाभाविक रूप से पूछता है कि अतिरिक्त पैसा कहाँ से आएगा। अगर अतिरिक्त खर्च जरूरी है तो सप्लीमेंट्री बजट पेश करना होगा और इसके लिए विधानसभा की मंजूरी लेनी होगी।" उन्होंने यह भी जोड़ा, "यह वित्तीय सलाह है। इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार के पास पैसा नहीं है।"

पिछली सरकारों में भी दी गई ऐसी सलाह

परमेश्वर ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि यह प्रथा किसी एक सरकार तक सीमित नहीं है। फरवरी 2022 में बसवराज बोम्मई सरकार के कार्यकाल में वित्त विभाग ने चेतावनी दी थी कि तय खर्च बढ़ने और राजस्व बढ़ाने के सीमित विकल्पों के कारण राजस्व अधिशेष बजट पेश करना मुश्किल हो सकता है। फरवरी 2023 में जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार सातवें वेतन आयोग को लागू करने पर विचार कर रही थी, तब वित्त विभाग ने आगाह किया था कि इसे तत्काल लागू करने से एफआरबीएम की सीमा प्रभावित हो सकती है और अतिरिक्त कर्ज लेना पड़ सकता है।

इसके अलावा जनवरी 2020 में बीएस येदियुरप्पा सरकार के समय भी ऐसी ही सलाह दी गई थी, जब राजस्व संग्रह लक्ष्य का लगभग 70 प्रतिशत ही रह गया था। परमेश्वर ने तंज करते हुए पूछा, "तो क्या हम यह कह सकते हैं कि उस समय सरकार दिवालिया हो गई थी?"

राज्य की मौजूदा वित्तीय स्थिति

वर्तमान आर्थिक स्थिति की जानकारी देते हुए परमेश्वर ने बताया कि वित्त वर्ष 2026 27 में राजकोषीय घाटा 2.95 प्रतिशत है, जबकि एफआरबीएम व्यवस्था के तहत तय सीमा 3 प्रतिशत है। राजस्व घाटा ₹22,957 करोड़ है और राज्य की कुल देनदारियाँ जीएसडीपी की 24.94 प्रतिशत हैं, जो निर्धारित 25 प्रतिशत की सीमा से थोड़ा नीचे हैं। उन्होंने बताया कि वित्त विभाग ने 2026 27 और 2027 28 में कुल ₹1,000 करोड़ की जरूरत वाली एक प्रस्तावित योजना पर सावधानी बरतने की सलाह दी थी, और सुझाया था कि पहले धनराशि सुनिश्चित की जाए या अन्य मदों से पुनर्आवंटन किया जाए।

सूखे से निपटने के सरकारी प्रयास

सूखे की स्थिति पर परमेश्वर ने बताया कि 13 अप्रैल को भारत मौसम विज्ञान विभाग की चेतावनी मिलने के तीन दिन के भीतर सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी थी। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने 16 अप्रैल को उपायुक्तों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार समेत कई मंत्री शामिल हुए। राज्य में कुल मिलाकर बारिश में 36 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई और 177 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया।

पेयजल आपूर्ति को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने ₹117 करोड़ जारी किए और विधायक निधि के माध्यम से अतिरिक्त ₹189 करोड़ उपलब्ध कराए गए — प्रत्येक विधायक को पेयजल जरूरतों के लिए ₹1 करोड़ आवंटित किए गए। 111 तालुकों के 531 गाँवों और 15 शहरी स्थानीय निकायों के 81 वार्डों में पानी की समस्या सामने आई है, जिन्हें टैंकर, निजी बोरवेल और नए खोदे गए बोरवेल से जल आपूर्ति की जा रही है।

आगे क्या

परमेश्वर ने कहा कि एसडीआरएफ के तहत पीड़ी खातों में पेयजल और पशु चारे की जरूरतों के लिए लगभग ₹420 करोड़ उपलब्ध हैं। उन्होंने आश्वासन दिया, "पानी की कोई कमी नहीं है। अगर नियमित या प्रशासनिक समस्याएँ सामने आती हैं तो उनका अलग से समाधान किया जाना चाहिए।" सरकार जिला अधिकारियों के साथ समन्वय बनाए रखते हुए स्थिति की सतत निगरानी कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह असली सवाल को दरकिनार कर देता है — कर्नाटक की देनदारियाँ जीएसडीपी की 24.94 प्रतिशत पर पहुँच गई हैं, जो 25 प्रतिशत की वैधानिक सीमा से महज एक बाल की दूरी पर है। गारंटी योजनाओं पर भारी खर्च और सूखे राहत की दोहरी मार के बीच यह स्थिति चिंताजनक है। राजनीतिक व्हाट अबाउटरी से परे, असली प्रश्न यह है कि क्या राज्य के पास अगले दो वर्षों में बिना अतिरिक्त कर्ज लिए अपनी प्रमुख जन कल्याण योजनाएँ चलाने की राजकोषीय गुंजाइश बची है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक सरकार दिवालिया है — क्या यह सच है?
नहीं। उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने 24 सितंबर 2026 को विधानसभा में स्पष्ट किया कि वित्त विभाग की सलाह वित्तीय अनुशासन की सामान्य प्रक्रिया है। राज्य का राजकोषीय घाटा 2.95 प्रतिशत है, जो एफआरबीएम की 3 प्रतिशत की सीमा के भीतर है।
कर्नाटक का राजकोषीय घाटा 2026 27 में कितना है?
वित्त वर्ष 2026 27 में कर्नाटक का राजकोषीय घाटा 2.95 प्रतिशत है, जो एफआरबीएम व्यवस्था की 3 प्रतिशत की अधिकतम सीमा से कम है। राजस्व घाटा ₹22,957 करोड़ है और राज्य की कुल देनदारियाँ जीएसडीपी की 24.94 प्रतिशत हैं।
क्या पहले BJP सरकारों को भी ऐसी वित्तीय चेतावनी मिली थी?
हाँ। परमेश्वर ने बताया कि फरवरी 2022 में बसवराज बोम्मई सरकार को राजस्व अधिशेष बजट की कठिनाई पर, फरवरी 2023 में सातवें वेतन आयोग लागू करने पर और जनवरी 2020 में येदियुरप्पा सरकार को राजस्व संग्रह 70 प्रतिशत पर रहने पर भी वित्त विभाग ने इसी तरह की सावधानी बरतने की सलाह दी थी।
कर्नाटक में सूखे की स्थिति कितनी गंभीर है और सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
राज्य में बारिश में 36 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई और 177 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया। सरकार ने पेयजल के लिए ₹117 करोड़ जारी किए, विधायक निधि से ₹189 करोड़ उपलब्ध कराए और एसडीआरएफ में लगभग ₹420 करोड़ सुरक्षित रखे गए हैं।
कर्नाटक सरकार की ₹1,000 करोड़ की प्रस्तावित योजना क्यों रोकी गई?
रोकी नहीं गई — वित्त विभाग ने केवल सलाह दी कि 2026 27 और 2027 28 में कुल ₹1,000 करोड़ की इस योजना को लागू करने से पहले धनराशि सुनिश्चित की जाए या अन्य मदों से पुनर्आवंटन किया जाए। परमेश्वर ने इसे सामान्य वित्तीय प्रक्रिया बताया, न कि धन की कमी का संकेत।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले