तमिलनाडु: परीक्षा केंद्रों पर CCTV और रैंडम नियुक्ति की माँग, शिक्षकों ने 2026-27 बोर्ड परीक्षा सुधार के सुझाव दिए
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु में सरकारी स्कूल के शिक्षकों ने 2026-27 की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग के समक्ष कई महत्वपूर्ण सुधार प्रस्ताव रखे हैं। इनमें सभी सार्वजनिक परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना, परीक्षा निरीक्षकों की कंप्यूटर-आधारित रैंडम नियुक्ति और परीक्षाओं के बीच के अंतराल को कम करना शामिल है।
माँगों की पृष्ठभूमि
ये माँगें ऐसे समय में सामने आई हैं जब कुछ निजी स्कूलों में असामान्य रूप से बड़ी संख्या में छात्रों द्वारा 'परफेक्ट स्कोर' हासिल करने पर गंभीर सवाल उठे थे। उदाहरण के तौर पर, एक निजी स्कूल में 2025 में कक्षा 12 के 148 छात्रों में से 100 से अधिक छात्रों ने केमिस्ट्री में 100 में से 100 अंक प्राप्त किए, जबकि 2026 में उसी स्कूल के किसी भी छात्र को इतने अंक नहीं मिले। इस बड़े अंतर को देखते हुए विभाग ने 2026 में ऐसे चुनिंदा निजी स्कूलों में विशेष ड्यूटी अधिकारियों (Officers on Special Duty) को तैनात किया था।
सीसीटीवी निगरानी की दलील
तमिलनाडु हायर सेकेंडरी हेडमास्टर्स एसोसिएशन के राज्य महासचिव आर. श्रीनिवासन ने कहा कि सीसीटीवी कैमरे छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे और परीक्षा प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ाएँगे। उन्होंने उन मामलों का उल्लेख किया जिनमें परीक्षा निरीक्षक के रूप में तैनात सरकारी शिक्षकों के विरुद्ध पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) के तहत मुकदमे दर्ज हुए थे। कथित तौर पर छात्रों ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था, जबकि शिक्षकों का कहना था कि वे केवल नकल की जाँच कर रहे थे। श्रीनिवासन ने CBSE और कर्नाटक स्कूल शिक्षा विभाग के उन परिपत्रों का हवाला दिया जिनमें परीक्षा हॉल में सीसीटीवी कवरेज अनिवार्य की गई है।
लागत की चुनौती और व्यावहारिक विकल्प
सरकारी परीक्षा निदेशालय (Directorate of Government Examinations) के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में 7,000 से अधिक परीक्षा केंद्र हैं और प्रत्येक केंद्र में कई हॉल हैं। अनुमानतः राज्य में 8.5 लाख परीक्षार्थी हैं और प्रत्येक हॉल में 20 छात्रों की क्षमता को देखते हुए लगभग 42,000 हॉल में कैमरे लगाने की आवश्यकता होगी, जो एक बड़ा व्यय होगा। इस चुनौती के समाधान के रूप में श्रीनिवासन ने 'प्लग-एंड-प्ले' कैमरों का सुझाव दिया, जिन्हें परीक्षा अवधि के दौरान चुनिंदा केंद्रों पर तैनात किया जा सके।
अन्य प्रमुख सुझाव
शिक्षकों ने परीक्षाओं के बीच लंबे अंतराल को भी छात्रों की एकाग्रता के लिए हानिकारक बताया और इसे कम करने की माँग की। एक और अहम मुद्दा मुख्य परीक्षा निरीक्षकों (Chief Invigilators) को परीक्षा शुरू होने के बाद पहले एक घंटे तक मोबाइल फोन के उपयोग की अनुमति देने वाले प्रावधान से जुड़ा है। हालाँकि यह सुविधा उपस्थिति दर्ज करने और आधिकारिक सूचनाएँ देने के लिए दी गई है, शिक्षकों ने इसके दुरुपयोग की आशंका व्यक्त करते हुए इसे वापस लेने की माँग की है।
रैंडम नियुक्ति की माँग और आगे की राह
शिक्षकों ने आरोप लगाया कि कभी-कभी स्थानीय प्रभाव के कारण ऐसे निरीक्षकों को परीक्षा केंद्रों पर तैनात किया जाता है जो पर्याप्त सख्ती नहीं बरतते। उनका तर्क है कि कंप्यूटर-आधारित रैंडम आवंटन प्रणाली लागू करने से नियुक्ति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और पूरे राज्य में एकसमान निगरानी सुनिश्चित होगी। गौरतलब है कि निजी स्कूलों में परीक्षा ड्यूटी के लिए सरकारी शिक्षकों को भेजने से निचली कक्षाओं की नियमित पढ़ाई भी प्रभावित होती है, जो एक अलग चिंता का विषय है। स्कूल शिक्षा विभाग इन प्रस्तावों पर विचार कर रहा है और अगली बोर्ड परीक्षाओं से पहले कोई निर्णय अपेक्षित है।