तमिलनाडु: चुनाव आयोग से लंबित पदोन्नतियों के लिए विशेष अनुमति की मांग
सारांश
Key Takeaways
- कर्मचारी संगठन ने निर्वाचन आयोग से अनुमति मांगी है।
- पदोन्नतियों की प्रक्रिया चुनावों के कारण रुकी हुई है।
- सैकड़ों कर्मचारी वर्षों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं।
- संगठन ने 1996 के पुराने नियमों के तहत पदोन्नति लागू करने का सुझाव दिया है।
चेन्नई, 25 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु की नगर निगमों में मंत्रीस्तरीय कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक प्रमुख संगठन ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) से लंबित पदोन्नतियों को लागू करने हेतु विशेष अनुमति मांगी है। चुनावों के मद्देनजर लागू आदर्श आचार संहिता के कारण यह प्रक्रिया वर्तमान में ठप है।
संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अर्चना पटनायक और मुख्य सचिव एन. मुरुगानंदम को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। इसमें लंबे समय से लंबित सरकारी आदेश को लागू करने की अनुमति की मांग की गई है।
संगठन के अनुसार, सैकड़ों कर्मचारी वर्षों से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन नीतिगत और प्रक्रियात्मक बाधाओं के कारण उनका करियर प्रभावित हो रहा है। यह समस्या 2023 में लागू तमिलनाडु अर्बन लोकल बॉडीज नियमों के बाद और जटिल हो गई, जिसमें नई योग्यता, सेवा शर्तें और विभागीय परीक्षाएं अनिवार्य कर दी गईं।
संगठन के संस्थापक-अध्यक्ष आर. सुब्रमणियन ने बताया कि मार्च 2025 में कुछ संशोधन किए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर कई समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। खासकर, विभागीय परीक्षाओं का सिलेबस अप्रैल 2025 में तय होने से कर्मचारियों को तैयारी के लिए बहुत कम समय मिला।
ज्ञापन में कहा गया है कि मौजूदा शर्तों को इतने कम समय में पूरा करना अधिकांश कर्मचारियों के लिए व्यावहारिक नहीं है। इसलिए नियमों में दी गई छूट के प्रावधान का हवाला देते हुए एकमुश्त राहत देने की मांग की गई है।
संगठन ने सुझाव दिया है कि पदोन्नति को 1996 के पुराने नियमों के तहत लागू किया जाए, जो मार्च 2023 तक प्रभावी थे, ताकि कर्मचारियों के साथ न्याय हो सके। हालांकि, 15 मार्च से लागू आचार संहिता और 23 अप्रैल को प्रस्तावित विधानसभा चुनावों के कारण इस तरह के प्रशासनिक फैसलों पर रोक लगी हुई है।
संगठन ने जल्द हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि लगातार देरी से कर्मचारियों का मनोबल गिर रहा है और प्रशासनिक कार्यक्षमता भी प्रभावित हो रही है। साथ ही यह भी प्रस्ताव दिया गया है कि पदोन्नति के बाद होने वाले तबादलों को चुनाव खत्म होने तक टाला जा सकता है।
अब इस मामले में अंतिम फैसला निर्वाचन आयोग को लेना है कि वह इस लंबित और महत्वपूर्ण प्रशासनिक मुद्दे पर छूट देता है या नहीं।