क्विक कॉमर्स से 2030 तक अर्बन लॉजिस्टिक्स स्पेस की माँग 75 मिलियन वर्ग फुट तक पहुँचने का अनुमान: CBRE रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारत के तेज़ी से विस्तार कर रहे क्विक कॉमर्स सेक्टर के चलते देश में अर्बन लॉजिस्टिक्स स्पेस की माँग 2030 तक 7.5 करोड़ वर्ग फुट (75 मिलियन स्क्वायर फीट) तक पहुँच सकती है। यह अनुमान CBRE साउथ एशिया की एक ताज़ा रिपोर्ट में लगाया गया है, जिसे 26 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया। इस माँग को मुख्य रूप से डार्क स्टोर और वेयरहाउस इन्फ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती ज़रूरत से बल मिलेगा।
माँग का विभाजन: डार्क स्टोर और मदर हब
CBRE की रिपोर्ट के अनुसार, इस दशक के अंत तक क्विक कॉमर्स सेक्टर को दो तरह की रियल एस्टेट की ज़रूरत होगी। पहला, शहरों के भीतर स्थित 'डार्क स्टोर', जिनकी माँग लगभग 4.2 करोड़ वर्ग फुट (42 मिलियन स्क्वायर फीट) आँकी गई है। दूसरा, 'मदर हब', यानी बड़े गोदाम, जिनके लिए लगभग 3.3 करोड़ वर्ग फुट (33 मिलियन स्क्वायर फीट) की आवश्यकता होगी।
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि 'मदर हब' आमतौर पर शहर के बाहरी इलाकों में स्थित बड़े भंडारण केंद्र होते हैं। इनसे 'हब-एंड-स्पोक' वितरण मॉडल के ज़रिए कई डार्क स्टोर तक सामान पहुँचाया जाता है, जिससे डिलीवरी की गति और दक्षता दोनों बढ़ती हैं।
मौजूदा इन्फ्रास्ट्रक्चर की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का क्विक कॉमर्स इकोसिस्टम 2026 तक लगभग 7,800 डार्क स्टोर्स तक फैल चुका है और वर्तमान में 100 से अधिक शहरों में करीब 2.7 करोड़ वर्ग फुट (27 मिलियन स्क्वायर फीट) लॉजिस्टिक्स स्पेस को कवर करता है। 2030 तक डार्क स्टोर्स की संख्या 12,000 से अधिक हो जाने का अनुमान है।
गौरतलब है कि मौजूदा डार्क-स्टोर नेटवर्क का लगभग 65-70 प्रतिशत हिस्सा देश के शीर्ष आठ महानगरों में केंद्रित है। हालाँकि, ऑपरेटर अब टियर-II और टियर-III शहरों में भी तेज़ी से अपना विस्तार कर रहे हैं।
ऐतिहासिक वृद्धि और शहरवार बाज़ार
रिपोर्ट के आँकड़ों के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच क्विक कॉमर्स से जुड़ी वेयरहाउसिंग माँग में 81 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्ज की गई। इस अवधि में भारत की कुल लॉजिस्टिक्स लीजिंग गतिविधियों में इस सेक्टर की हिस्सेदारी 4-5 प्रतिशत रही। इसके अलावा, क्विक कॉमर्स से जुड़ी सालाना जगह की खपत 2024 में 3.1 मिलियन वर्ग फुट से बढ़कर 2025 में 4.3 मिलियन वर्ग फुट हो गई।
शहरवार बाज़ार हिस्सेदारी के लिहाज़ से 2021 से 2026 की पहली छमाही के बीच दिल्ली-एनसीआर सबसे बड़े बाज़ार के रूप में उभरा, जिसकी हिस्सेदारी 21 प्रतिशत रही। इसके बाद मुंबई (20 प्रतिशत) और बेंगलुरु (17 प्रतिशत) का स्थान रहा। हैदराबाद (16 प्रतिशत) और चेन्नई (11 प्रतिशत) भी शीर्ष बाज़ारों में शामिल रहे।
विशेषज्ञ की राय
CBRE के चेयरमैन और सीईओ (भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका) अंशुमन मैगजीन ने कहा, 'क्विक कॉमर्स भारत में उपभोग और शहरी लॉजिस्टिक्स के तालमेल को बदल रहा है, और इस बदलाव के केंद्र में रियल एस्टेट है।'
उन्होंने आगे कहा, 'जैसे-जैसे ये प्लेटफॉर्म भारी पूंजी वाले विस्तार से हटकर एक अधिक व्यवस्थित विकास चक्र की ओर बढ़ रहे हैं, उनका ध्यान केवल स्टोर बढ़ाने से हटकर ऐसे फुलफिलमेंट नेटवर्क बनाने पर आ गया है जो सघन, कुशल और सही जगहों पर स्थित हों।'
आगे की राह
CBRE के अनुसार, इस सेक्टर की भविष्य की वृद्धि इस बात पर निर्भर करेगी कि ऐसे फुलफिलमेंट एसेट कितने तैयार किए जाते हैं जो नियामक अनुपालन में हों, रणनीतिक रूप से सही स्थानों पर हों और भविष्य की परिचालन ज़रूरतों को पूरा कर सकें। यह चुनौती महानगरों और उभरते शहरी बाज़ारों — दोनों में एक साथ खड़ी है।