भारत के शीर्ष शहरों में वेयरहाउसिंग मांग Q1 2026 में 8%25 बढ़ी, मुंबई-पुणे का 81%25 हिस्सा
सारांश
Key Takeaways
- भारत के प्रमुख शहरों में वेयरहाउसिंग मांग Q1 2026 में तिमाही आधार पर 8%25 बढ़ी — लगातार चौथी तिमाही वृद्धि।
- मुंबई (4.76 मिलियन वर्ग फुट) और पुणे (4.46 मिलियन वर्ग फुट) ने मिलकर कुल लीजिंग का 81%25 हिस्सा लिया।
- पुणे में तिमाही आधार पर 162%25 और वार्षिक आधार पर 42%25 की वृद्धि दर्ज।
- वार्षिक आधार पर समग्र मांग में 14%25 की गिरावट, जिसे वेस्टियन रणनीतिक पुनर्संतुलन बता रही है।
- हैदराबाद में सालाना 50%25 वृद्धि; NCR में 57%25 की नरमी।
- 3PL, मैन्युफैक्चरिंग और कंज्यूमर गुड्स क्षेत्र लीजिंग के प्रमुख चालक।
वर्कप्लेस सॉल्यूशंस फर्म वेस्टियन की बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत के प्रमुख शहरों में वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स की मांग जनवरी-मार्च 2026 (Q1 2026) में तिमाही आधार पर 8 प्रतिशत बढ़ी है। यह लगातार चौथी तिमाही है जब इस क्षेत्र में मांग में वृद्धि दर्ज की गई है, जो भारतीय लॉजिस्टिक्स बाज़ार की बढ़ती मज़बूती का संकेत है।
मुख्य घटनाक्रम
मुंबई ने Q1 2026 में सर्वाधिक 4.76 मिलियन वर्ग फुट वेयरहाउसिंग मांग दर्ज की, जो कुल लीजिंग गतिविधि का 42 प्रतिशत है। पुणे में यह आँकड़ा 4.46 मिलियन वर्ग फुट रहा, जो तिमाही आधार पर 162 प्रतिशत और वार्षिक आधार पर 42 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। दोनों शहरों ने मिलकर कुल लीजिंग गतिविधि में 81 प्रतिशत का योगदान दिया, जो पश्चिमी औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के निरंतर वर्चस्व को रेखांकित करता है।
अन्य प्रमुख शहरों की बात करें तो नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में वेयरहाउसिंग मांग 0.73 मिलियन वर्ग फुट रही, हालाँकि यहाँ वार्षिक आधार पर 57 प्रतिशत की नरमी दर्ज की गई। हैदराबाद में मांग 0.69 मिलियन वर्ग फुट रही और वार्षिक आधार पर 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई। चेन्नई, बेंगलुरु और कोलकाता में मांग क्रमशः 0.59 मिलियन, 0.17 मिलियन और 0.10 मिलियन वर्ग फुट दर्ज की गई।
सालाना गिरावट की तस्वीर
गौरतलब है कि तिमाही वृद्धि के बावजूद, समग्र वेयरहाउसिंग मांग में वार्षिक आधार पर 14 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। हालाँकि वेस्टियन की रिपोर्ट इसे संरचनात्मक गिरावट नहीं, बल्कि 2025 में हुए रणनीतिक पुनर्संतुलन का परिणाम बताती है। लगातार चार तिमाहियों की रिकवरी इस व्याख्या को बल देती है।
क्षेत्रवार चालक शक्तियाँ
रिपोर्ट के अनुसार, लीजिंग गतिविधियों को मुख्य रूप से थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स (3PL), इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग तथा कंज्यूमर गुड्स कंपनियों का समर्थन मिल रहा है। बेहतर उपभोक्ता धारणा, मज़बूत घरेलू माँग और सरकारी इन्फ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड इस क्षेत्र की रीढ़ बने हुए हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
वेस्टियन के सीईओ श्रीनिवास राव (FRICS) ने कहा,