गंगा एक्सप्रेसवे उद्घाटन: PM मोदी ने किया 594 KM लंबे कॉरिडोर का लोकार्पण, पूर्वी UP को मिलेगी नई रफ्तार

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गंगा एक्सप्रेसवे उद्घाटन: PM मोदी ने किया 594 KM लंबे कॉरिडोर का लोकार्पण, पूर्वी UP को मिलेगी नई रफ्तार

सारांश

594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं — यह पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए दशकों की पिछड़ेपन की कहानी बदलने का दाँव है। अदाणी ग्रुप के नेतृत्व में 3.5 साल में तैयार इस कॉरिडोर से यात्रा समय आधा होगा, 3 लाख रोज़गार और ₹1 लाख करोड़ GDP योगदान का लक्ष्य है।

Key Takeaways

PM नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल 2026 को 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। कुल मार्ग का 80% यानी 464 किलोमीटर अदाणी रोड ट्रांसपोर्ट लिमिटेड (ARTL) ने विकसित किया; शेष IRB इंफ्रास्ट्रक्चर ने। मेरठ से प्रयागराज का यात्रा समय 11 घंटे से घटकर 6 घंटे होगा। UP सरकार के अनुमान के अनुसार हर साल ₹25,000–₹30,000 करोड़ की लॉजिस्टिक्स बचत और अगले 10 वर्षों में 3 लाख रोज़गार । शाहजहांपुर में 3.5 KM लंबी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) भारतीय वायुसेना के लिए तैयार। एक्सप्रेसवे से जुड़े 12 जिलों में 11 औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल 2026 को 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया — यह भारत की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक है, जिसे 3.5 साल से भी कम समय में पूरा किया गया। यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ को पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से जोड़ता है और 12 जिलों से होकर गुजरता है।

परियोजना की मुख्य विशेषताएँ

इस परियोजना के कुल मार्ग का 464 किलोमीटर — यानी करीब 80 प्रतिशत हिस्सा — अदाणी रोड ट्रांसपोर्ट लिमिटेड (ARTL) ने विकसित किया है, जो अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) की सड़क निर्माण इकाई है। शेष हिस्सा IRB इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा विकसित किया गया है। निर्माण के चरम समय में ARTL ने 12,000 से अधिक श्रमिकों को तैनात किया था।

यह छह लेन का एक्सप्रेसवे है, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। सड़क सुरक्षा के लिए AI आधारित कैमरा सिस्टम लगाए गए हैं, जो एडवांस अलर्ट सिस्टम के ज़रिए दुर्घटनाओं को रोकने और यातायात को सुरक्षित बनाने में मदद करेंगे।

सामरिक और रक्षा महत्व

शाहजहांपुर जिले में एक्सप्रेसवे पर 3.5 किलोमीटर लंबी एक समर्पित इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) भी विकसित की गई है। यह भारतीय वायुसेना के विमानों की आपातकालीन लैंडिंग के लिए तैयार की गई है, जिससे इस कॉरिडोर की सामरिक क्षमता भी मज़बूत होगी। गौरतलब है कि यह देश के उन चुनिंदा एक्सप्रेसवे में शामिल है जिन पर ऐसी सुविधा उपलब्ध है।

आर्थिक प्रभाव और रोज़गार

उत्तर प्रदेश सरकार के अनुमान के मुताबिक, यह एक्सप्रेसवे हर साल ₹25,000 से ₹30,000 करोड़ की लॉजिस्टिक्स बचत करेगा। अगले 10 वर्षों में करीब 3 लाख रोज़गार के अवसर पैदा होंगे और राज्य की GDP में ₹1 लाख करोड़ से अधिक का योगदान देगा। अनुमान है कि इस परियोजना से 8 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ होगा।

यह ऐसे समय में आया है जब दशकों से पूर्वी उत्तर प्रदेश अपनी जनसंख्या और आर्थिक क्षमता के बावजूद अपेक्षाकृत पिछड़ा रहा है। मेरठ से प्रयागराज तक का यात्रा समय लगभग 11 घंटे से घटकर सिर्फ 6 घंटे रह जाएगा, जिससे व्यापार, उद्योग और रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे।

औद्योगिक कॉरिडोर और पर्यटन

उत्तर प्रदेश सरकार एक्सप्रेसवे से जुड़े 12 जिलोंमेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज — में 11 औद्योगिक कॉरिडोर विकसित कर रही है। इसके साथ ही बेहतर कनेक्टिविटी से गढ़मुक्तेश्वर, कल्किधाम, बेल्हादेवी, चंद्रिका शक्तिपीठ और त्रिवेणी संगम समेत सात प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुँच आसान होगी।

किसानों और छोटे कारोबारियों को बेहतर बाज़ार पहुँच मिलेगी, जिससे उन्हें अपनी उपज का बेहतर दाम मिलने की संभावना है। माल ढुलाई की गति बढ़ेगी और विभिन्न क्षेत्रों में इन्वेंट्री लागत कम होगी। यह परियोजना पूर्वी उत्तर प्रदेश के दीर्घकालिक आर्थिक रूपांतरण की आधारशिला बन सकती है — बशर्ते औद्योगिक कॉरिडोर समयबद्ध तरीके से विकसित हों।

Point of View

लेकिन असली परीक्षा इसके किनारे खड़े होने वाले 11 औद्योगिक कॉरिडोर की है — जिनकी घोषणा अभी कागज़ पर है। उत्तर प्रदेश में पिछले एक दशक में कई एक्सप्रेसवे बने, पर रोज़गार के आँकड़े अनुमानों से लगातार पीछे रहे हैं। ₹1 लाख करोड़ GDP योगदान और 3 लाख नौकरियों के दावे सरकारी अनुमान हैं, न कि स्वतंत्र सत्यापित आँकड़े — और इन्हें उसी नज़र से परखा जाना चाहिए। जब तक भूमि अधिग्रहण, निवेशक प्रतिबद्धता और क्रियान्वयन की समयसीमा सार्वजनिक नहीं होती, यह एक्सप्रेसवे पूर्वी UP के लिए अवसर की खिड़की तो खोलता है, पर गारंटी नहीं देता।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

गंगा एक्सप्रेसवे कहाँ से कहाँ तक जाता है?
गंगा एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ को पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से जोड़ता है और 12 जिलों से होकर गुजरता है। इसकी कुल लंबाई 594 किलोमीटर है।
गंगा एक्सप्रेसवे में अदाणी ग्रुप की क्या भूमिका है?
अदाणी रोड ट्रांसपोर्ट लिमिटेड (ARTL), जो अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की सड़क निर्माण इकाई है, ने कुल मार्ग का 464 किलोमीटर यानी करीब 80 प्रतिशत हिस्सा विकसित किया है। शेष हिस्सा IRB इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा बनाया गया है।
गंगा एक्सप्रेसवे से यात्रा समय कितना कम होगा?
मेरठ से प्रयागराज का यात्रा समय लगभग 11 घंटे से घटकर सिर्फ 6 घंटे रह जाएगा। इससे व्यापार, माल ढुलाई और आम यात्रियों को बड़ा लाभ होगा।
शाहजहांपुर में इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी क्या है?
शाहजहांपुर जिले में एक्सप्रेसवे पर 3.5 किलोमीटर लंबी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) विकसित की गई है, जो भारतीय वायुसेना के विमानों की आपातकालीन लैंडिंग के लिए तैयार है। इससे इस कॉरिडोर की सामरिक क्षमता भी मज़बूत होती है।
गंगा एक्सप्रेसवे से कितने लोगों को फायदा होगा और कितने रोज़गार मिलेंगे?
उत्तर प्रदेश सरकार के अनुमान के अनुसार इस परियोजना से 8 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ होगा और अगले 10 वर्षों में करीब 3 लाख रोज़गार के अवसर पैदा होंगे। राज्य की GDP में ₹1 लाख करोड़ से अधिक का योगदान भी अपेक्षित है।
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