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तमिलनाडु में 12वीं के 5.44 लाख छात्रों के लिए उच्च शिक्षा अभियान, हर जिले में कंट्रोल रूम

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तमिलनाडु में 12वीं के 5.44 लाख छात्रों के लिए उच्च शिक्षा अभियान, हर जिले में कंट्रोल रूम

सारांश

तमिलनाडु ने 12वीं के बाद ‘कोई छात्र न छूटे’ मिशन को अगले स्तर पर पहुँचाया है। 5.44 लाख छात्रों को EMIS डेटा से ट्रैक करना, हर जिले में 15-सदस्यीय कंट्रोल रूम और साप्ताहिक रिपोर्टिंग — यह सिर्फ़ दाखिला अभियान नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा संक्रमण दर पर डेटा-संचालित प्रशासनिक प्रयोग है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु के स्कूल शिक्षा विभाग ने 5 जून तक हर जिले में कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश दिए।
अभियान जून से अक्टूबर तक चलेगा और 5.44 लाख कक्षा 12 छात्रों को कवर करेगा।
इनमें 3.55 लाख सरकारी और 1.89 लाख सहायता प्राप्त स्कूलों के छात्र शामिल।
चंद्र मोहन के निर्देश पर हर कंट्रोल रूम का नेतृत्व डिप्टी कलेक्टर करेंगे, टीम में 15 सदस्य ।
EMIS डेटा से छूटे छात्रों की पहचान; SC/ST, दिव्यांग, एकल-अभिभावक और शरणार्थी छात्रों पर विशेष फोकस।
जिलों को साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट और हर पखवाड़े शिकायत-निवारण बैठकें करनी होंगी।

तमिलनाडु के स्कूल शिक्षा विभाग ने कक्षा 12 उत्तीर्ण करने वाले हर योग्य छात्र को उच्च शिक्षा या तकनीकी संस्थान में दाखिला दिलाने के लिए राज्यव्यापी अभियान का ऐलान किया है, जिसके तहत सभी जिला कलेक्टरों को 5 जून तक जिला-स्तरीय कंट्रोल रूम स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में नामांकित 5.44 लाख छात्रों को इस पहल के दायरे में लाया जाएगा, जो जून से अक्टूबर तक चलेगी।

अभियान का दायरा और लक्ष्य

विभाग के आँकड़ों के अनुसार, कवर किए जाने वाले छात्रों में 3.55 लाख सरकारी स्कूलों से और 1.89 लाख सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों से हैं। पिछले वर्ष शुरू की गई इस पहल का दूसरा संस्करण इस बार और अधिक संरचित ढाँचे के साथ आ रहा है, जिसमें बहु-विभागीय समन्वय पर ज़ोर है।

कंट्रोल रूम कैसे काम करेंगे

स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव बी. चंद्र मोहन ने जिला प्रशासन को भेजे पत्र में निर्देश दिया है कि कंट्रोल रूम का नेतृत्व डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी करेंगे और ये उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी करने वाले छात्रों की निगरानी के लिए नोडल केंद्र के रूप में कार्य करेंगे। हर कंट्रोल रूम में लगभग 15 सदस्य होंगे, जो शिक्षा, राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभागों से लिए जाएँगे।

अधिकारियों के अनुसार, टीमें एजुकेशनल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (EMIS) के डेटा का इस्तेमाल करके उन छात्रों की पहचान करेंगी जिन्होंने उच्च शिक्षा के लिए आवेदन नहीं किया, बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की, परीक्षा छोड़ी, या पूरक परीक्षाओं के लिए पंजीकरण नहीं कराया।

वंचित वर्गों पर विशेष ध्यान

अभियान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के छात्र, माता-पिता का सहारा न पाने वाले बच्चे, दिव्यांग छात्र, शरणार्थी, खेल कोटे के उम्मीदवार, एकल-अभिभावक परिवारों के छात्र और व्यावसायिक विषयों के विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। टीमें काउंसलिंग, दाखिले पर मार्गदर्शन, आवश्यक प्रमाण पत्र, छात्रवृत्ति और वित्तीय सहायता योजनाओं तक पहुँच में मदद करेंगी।

राज्य-स्तरीय निगरानी और जवाबदेही

निगरानी मज़बूत करने के लिए विभाग एक राज्य-स्तरीय कंट्रोल रूम भी स्थापित करेगा, जो कॉलेजों और पॉलिटेक्निक संस्थानों में दाखिलों तथा सीट रिक्तियों पर नज़र रखेगा। जिला कलेक्टरों को हर पखवाड़े छात्रों की शिकायतों के निवारण के लिए विशेष बैठकें आयोजित करनी होंगी, जिनमें जहाँ संभव हो मौके पर ही दाखिला दिलाने पर बल होगा। जिलों को साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट राज्य कंट्रोल रूम को भेजनी होगी।

क्यों मायने रखती है यह पहल

यह कदम ऐसे समय में आया है जब देशभर में उच्च माध्यमिक से उच्च शिक्षा में संक्रमण दर एक नीतिगत चिंता बनी हुई है, और तमिलनाडु पहले ही उच्च सकल नामांकन अनुपात (GER) वाले राज्यों में गिना जाता है। डेटा-आधारित ट्रैकिंग और बहु-विभागीय हस्तक्षेप का यह मॉडल आने वाले महीनों में अन्य राज्यों के लिए भी एक संदर्भ बिंदु बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ राष्ट्रीय स्तर पर लाखों छात्र हर साल छूट जाते हैं। तमिलनाडु का मॉडल इसलिए ध्यान खींचता है क्योंकि यह केवल नारा नहीं, बल्कि EMIS-आधारित नाम-दर-नाम ट्रैकिंग और प्रशासनिक जवाबदेही पर टिका है। असली परीक्षा अक्टूबर में होगी — क्या साप्ताहिक रिपोर्टिंग वास्तविक दाखिलों में बदलती है, या यह भी पिछले वर्ष की पहल की तरह आँकड़ों में सिमट कर रह जाती है। यदि यह सफल हुआ, तो NEP 2020 के GER लक्ष्य के लिए यह राज्यों के लिए एक टेम्पलेट बन सकता है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु का यह उच्च शिक्षा दाखिला अभियान क्या है?
यह तमिलनाडु स्कूल शिक्षा विभाग की वह पहल है जो सुनिश्चित करती है कि कक्षा 12 का हर योग्य छात्र किसी उच्च शिक्षा या तकनीकी संस्थान में दाखिला पा सके। शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में यह 5.44 लाख छात्रों को कवर करेगी और जून से अक्टूबर तक चलेगी।
जिला-स्तरीय कंट्रोल रूम कैसे काम करेंगे?
हर जिला कलेक्टर 5 जून तक कंट्रोल रूम स्थापित करेंगे, जिसका नेतृत्व डिप्टी कलेक्टर स्तर का अधिकारी करेगा। इसमें शिक्षा, राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभागों के लगभग 15 सदस्य होंगे, जो EMIS डेटा से छूटे छात्रों की पहचान कर हस्तक्षेप करेंगे।
किन छात्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा?
अनुसूचित जाति और जनजाति समुदायों के छात्र, माता-पिता का सहारा न पाने वाले बच्चे, दिव्यांग छात्र, शरणार्थी, खेल कोटे के उम्मीदवार, एकल-अभिभावक परिवारों के छात्र और व्यावसायिक विषयों के विद्यार्थियों पर विशेष फोकस होगा। उन्हें काउंसलिंग, प्रमाण पत्र, छात्रवृत्ति और वित्तीय सहायता तक पहुँच में मदद मिलेगी।
अभियान की प्रगति की निगरानी कैसे होगी?
राज्य-स्तरीय कंट्रोल रूम कॉलेजों और पॉलिटेक्निक में दाखिलों तथा सीट रिक्तियों पर नज़र रखेगा। जिलों को साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट भेजनी होगी और कलेक्टरों को हर पखवाड़े छात्रों की शिकायतों के निवारण के लिए विशेष बैठकें करनी होंगी।
5.44 लाख छात्रों में कितने सरकारी और कितने सहायता प्राप्त स्कूलों से हैं?
कुल 5.44 लाख छात्रों में से 3.55 लाख सरकारी स्कूलों से हैं और 1.89 लाख सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों से हैं। ये सभी शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में कक्षा 12 में नामांकित थे।
राष्ट्र प्रेस
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