चेन्नई में तमिलनाडु का TN-S4C साइबर कमांड सेंटर लॉन्च, 172 पुलिस पद और ₹8.88 करोड़ का बजट
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार ने बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए चेन्नई के अशोक नगर स्थित पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज कॉम्प्लेक्स में 'तमिलनाडु राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र' (TN-S4C) की स्थापना की है। गृह विभाग ने 28 जुलाई को सरकारी आदेश जारी किया और 12 अगस्त को राजपत्र में इसकी अधिसूचना प्रकाशित की गई। यह केंद्र राज्य की साइबर क्राइम विंग के मुख्यालय को एक पूर्णकालिक, चौबीसों घंटे सक्रिय राज्य-स्तरीय कमांड सेंटर में रूपांतरित करता है।
TN-S4C क्या है और कैसे काम करेगा
TN-S4C को भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के लिए तमिलनाडु की नोडल एजेंसी के रूप में नामित किया गया है। यह केंद्र राज्य के डीजीपी की देखरेख में और साइबर अपराध शाखा के प्रमुख या अतिरिक्त डीजीपी के सीधे प्रशासनिक नियंत्रण में काम करेगा। इसका संचालन छह विभागों में बँटा होगा — राज्य साइबर कमांड सेंटर, राज्य साइबर अपराध जाँच केंद्र, साइबर अरंगम, उन्नत साइबर फोरेंसिक इकाई, प्रशासन प्रभाग और साइबर सुरक्षा प्रभाग।
मुख्य कार्य और अधिकार क्षेत्र
यह कमांड सेंटर 1930 साइबर अपराध हेल्पलाइन का संचालन करेगा, ई-ज़ीरो एफआईआर की निगरानी करेगा और सिम कार्ड, मोबाइल डिवाइस तथा गैरकानूनी ऑनलाइन सामग्री को ब्लॉक करने में समन्वय करेगा। ₹1 लाख से अधिक के वित्तीय नुकसान वाले मामलों में यह ई-पुलिस स्टेशन के रूप में भी काम करेगा। केंद्र सोशल मीडिया इंटेलिजेंस और डार्क वेब निगरानी भी संचालित करेगा।
यह केंद्र बैंकों, दूरसंचार ऑपरेटरों, इंटरनेट सेवा प्रदाताओं, CERT-In तथा केंद्रीय व राज्य एजेंसियों के साथ समन्वय में काम करेगा। अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर के मामले — जिनमें संगठित साइबर अपराध, रैंसमवेयर हमले, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े अपराध और बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी शामिल हैं — भी इसके दायरे में आएंगे।
मानव संसाधन और बजट
सरकार ने मुख्य कमांड और जाँच इकाइयों के लिए 172 पुलिस पदों को मंजूरी दी है। साइबर अरंगम में 28 अतिरिक्त कर्मी तैनात होंगे, जबकि 25 मंत्रालयी कर्मचारी प्रशासनिक कार्यों में सहयोग देंगे। डार्क वेब जाँच, मैलवेयर विश्लेषण, खतरे की खुफिया जानकारी और डिजिटल फोरेंसिक जैसे विशेष क्षेत्रों में 6 बाहरी विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है। 1930 हेल्पलाइन के विस्तार के लिए ₹8.88 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिसमें तीन वर्षों के लिए 15 आउटसोर्स सीटें शामिल होंगी।
जन जागरूकता और फोरेंसिक क्षमता
साइबर अरंगम जन जागरूकता कार्यक्रम, पुलिस प्रशिक्षण, छात्र इंटर्नशिप, हैकथॉन और डिजिटल साक्षरता पहल का संचालन करेगा। उन्नत साइबर फोरेंसिक इकाई राज्य की साइबर प्रयोगशाला का प्रबंधन करेगी और नवीनतम जाँच प्रौद्योगिकियाँ लागू करेगी।
निगरानी और समीक्षा तंत्र
राज्य-स्तरीय डैशबोर्ड शिकायतों, गिरफ्तारियों, बरामदगी, जब्ती और दोषसिद्धि पर नज़र रखेगा। केंद्र के प्रदर्शन की मासिक और त्रैमासिक समीक्षा की जाएगी। यह ढाँचा तमिलनाडु को साइबर अपराध प्रतिक्रिया में संस्थागत जवाबदेही स्थापित करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल करता है।