शिवसेना (यूबीटी) का 'सामना' में हमला: आईटीबीपी प्रमुख के बयान के बाद सीमा सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) ने 26 अक्टूबर 2026 को अपने मुखपत्र 'सामना' में एक कड़े संपादकीय के ज़रिये अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर चीनी घुसपैठ को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। पार्टी का कहना है कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर के हालिया खुलासों ने सरकार के उस नैरेटिव को ध्वस्त कर दिया है जिसमें सीमा पर शांति का दावा किया जाता रहा है।
मुख्य आरोप और संपादकीय का सार
'सामना' के संपादकीय में आरोप लगाया गया है कि मोदी सरकार ने जानबूझकर अरुणाचल प्रदेश सीमा पर घटी गंभीर घटनाओं को जनता से छिपाने का प्रयास किया। पार्टी का दावा है कि आईटीबीपी प्रमुख के बयानों ने सीमा सुरक्षा से जुड़ी उन सच्चाइयों को उजागर किया है जिन्हें कथित तौर पर दबाया जाता रहा। संपादकीय में इसे 'राष्ट्रीय नेतृत्व की विफलता' करार दिया गया है।
नरवणे की आत्मकथा और सरकारी सेंसरशिप का आरोप
संपादकीय में यह भी कहा गया है कि पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की आत्मकथा 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' को सरकारी सेंसरशिप का सामना करना पड़ा। कारण यह बताया गया है कि इस पुस्तक में 2020 की लद्दाख-गलवान झड़पों और अग्निपथ योजना का उल्लेख है। शिवसेना (यूबीटी) ने आईटीबीपी प्रमुख के बयानों और नरवणे की किताब पर कथित पाबंदी को एक साथ रखते हुए इन्हें सीमा पर तैनात जवानों के बलिदान का अपमान बताया।
सरकार की जवाबदेही पर सवाल
पार्टी के संपादकीय में सत्ताधारी नेतृत्व पर संकट के दौरान सैनिकों का राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग करने और बाद में उन्हें अकेला छोड़ देने का गंभीर आरोप लगाया गया है। संपादकीय के अनुसार, सरकार ने पुलवामा हमले, पहलगाम नरसंहार और अरुणाचल प्रदेश में जारी चीनी घुसपैठ जैसी बड़ी सुरक्षा घटनाओं के लिए जवाबदेही से किनारा किया है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष पहले से ही सीमा प्रबंधन को लेकर सरकार को घेर रहा है।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की दिशा
गौरतलब है कि शिवसेना (यूबीटी) महाराष्ट्र में प्रमुख विपक्षी दल है और यह संपादकीय राष्ट्रीय सुरक्षा को राज्य की राजनीति से जोड़ने की रणनीति का हिस्सा दिखता है। संपादकीय में यह भी कहा गया है कि लोकतंत्र में जो नेतृत्व देश की सीमाओं की रक्षा करने में विफल रहे, उसे जनता के समक्ष जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।