12 अक्टूबर 2026
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शिवसेना (यूबीटी) का 'सामना' में केंद्र पर हमला: दिल्ली नाकाबंदी, विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा

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शिवसेना (यूबीटी) का 'सामना' में केंद्र पर हमला: दिल्ली नाकाबंदी, विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र 'सामना' ने केंद्र सरकार पर 1 लाख हथियारबंद जवानों की तैनाती, दिल्ली की अभूतपूर्व नाकाबंदी और ममता बनर्जी-केजरीवाल समेत दर्जनों विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी का आरोप लगाया। संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मीडिया की चिंता ने इस विवाद को अंतरराष्ट्रीय रूप दे दिया है।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने 12 अक्टूबर 2026 को 'सामना' के ज़रिए केंद्र सरकार पर 'कायरतापूर्ण तानाशाही' का आरोप लगाया।
मुखपत्र के अनुसार, कथित तौर पर 1 लाख हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों ने दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह के आवास के आसपास घेरा बनाया और शहर की प्रमुख सेवाएँ बाधित हुईं।
'सामना' के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल तथा नेता दीपांकर भट्टाचार्य व मनोज झा को कथित तौर पर हिरासत में लिया गया।
मुंबई में तुषार गांधी को अगस्त क्रांति मैदान की ओर सत्याग्रह के दौरान हिरासत में लिया गया।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने मनमानी हिरासत और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार पर चिंता जताई।
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने डीएन नगर पुलिस स्टेशन तक मार्च कर तत्काल रिहाई की माँग की।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने 12 अक्टूबर 2026 को पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के ज़रिए केंद्र सरकार पर देशभर में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने के लिए 'कायरतापूर्ण तानाशाही तरीके' अपनाने का आरोप लगाया। संपादकीय में दिल्ली में की गई बड़े पैमाने की नाकाबंदी, विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी और संयुक्त राष्ट्र की चिंता का विशेष उल्लेख किया गया।

दिल्ली में अभूतपूर्व नाकाबंदी का दावा

'सामना' में कहा गया कि केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़, झारखंड, जम्मू-कश्मीर और मणिपुर में आतंकवाद-रोधी तथा नक्सल-रोधी अभियानों से बुलाए गए हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों को राष्ट्रीय राजधानी में तैनात किया। मुखपत्र के अनुसार, कथित तौर पर लगभग 1 लाख हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों ने कृष्ण मेनन रोड पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास के इर्द-गिर्द घेरा बनाया।

'सामना' में यह भी दावा किया गया कि राजधानी में प्रवेश और निकास के मार्ग सील कर दिए गए, जिससे इंटरनेट सेवाएँ, मेट्रो, स्थानीय बस नेटवर्क, लंबी दूरी की ट्रेनें और व्यावसायिक उड़ानें बाधित हुईं। यह ऐसे समय में आया जब देशभर में विरोध प्रदर्शनों की लहर चल रही थी।

विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी का आरोप

शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र के अनुसार, इस कार्रवाई में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल सहित कई पूर्व मुख्यमंत्रियों को गिरफ्तार किया गया। 'सामना' ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने एक विमान में सवार होकर दीपांकर भट्टाचार्य और मनोज झा जैसे वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं को हिरासत में लिया।

मुंबई में, पुलिस ने महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी को उस समय हिरासत में लिया जब वे अगस्त क्रांति मैदान की ओर शांतिपूर्ण सत्याग्रह करने की कोशिश कर रहे थे। गौरतलब है कि इन सभी दावों का स्रोत शिवसेना (यूबीटी) का मुखपत्र है और इनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

शिवसेना (यूबीटी) की तत्काल प्रतिक्रिया

पार्टी नेता आदित्य ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तार नेताओं की तत्काल रिहाई की माँग को लेकर डीएन नगर पुलिस स्टेशन तक मार्च किया। 'सामना' के संपादकीय में कहा गया कि लॉजिस्टिक शटडाउन के बावजूद दिल्ली में विरोध-स्थलों पर छात्रों और नागरिक समाज के सदस्यों की भारी भीड़ जुटी।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और संयुक्त राष्ट्र की चिंता

'सामना' ने दावा किया कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (UN Human Rights Office) ने मनमाने ढंग से की गई हिरासत, पुलिस के कठोर व्यवहार और महिला प्रदर्शनकारियों को जेल वैन में घसीटकर अज्ञात स्थानों पर ले जाने की खबरों पर गहरी चिंता जताई। संयुक्त राष्ट्र ने कथित तौर पर भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण सभा के मौलिक अधिकार को बनाए रखने और हिरासत में लिए गए सभी नागरिकों को रिहा करने का आग्रह किया।

मुखपत्र ने यह भी कहा कि द न्यूयॉर्क टाइम्स और लंदन के प्रमुख समाचारपत्रों सहित वैश्विक मीडिया संस्थानों ने इस कार्रवाई की तस्वीरें प्रकाशित कीं और भारतीय लोकतंत्र पर सवाल उठाए।

संपादकीय का केंद्रीय संदेश

'सामना' के संपादकीय में लिखा गया: 'जब कोई तानाशाह डरता है, तो उसके अंदर का शैतान खुद को बचाने के लिए हथियारों से लैस स्टील की दीवारें बनाता है, लेकिन लोगों की बगावत से ये दीवारें ज़रूर टूट जाती हैं।' शिवसेना (यूबीटी) का आरोप है कि सरकार का पुलिसिया बल पर निर्भर रहना उसकी 'अंदरूनी कमज़ोरी' को उजागर करता है। यह देखना बाकी है कि केंद्र सरकार इन आरोपों पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि विपक्ष की व्यापक रणनीति का हिस्सा है — जिसमें 'सामना' को वैचारिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। हालाँकि इन सभी आरोपों — 1 लाख जवानों की तैनाती, विमान से नेताओं की गिरफ्तारी, इंटरनेट और मेट्रो बंद — की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है, इनकी गंभीरता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। संयुक्त राष्ट्र की कथित चिंता और वैश्विक मीडिया की कवरेज इस घटना को एक घरेलू राजनीतिक विवाद से कहीं आगे ले जाती है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं पूछती कि सरकार इन आरोपों पर चुप क्यों है — और वह चुप्पी खुद एक खबर है।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवसेना (यूबीटी) ने 'सामना' में केंद्र सरकार पर क्या आरोप लगाए?
शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र 'सामना' ने 12 अक्टूबर 2026 को दावा किया कि केंद्र सरकार ने सरकार-विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने के लिए दिल्ली में अभूतपूर्व नाकाबंदी की, लगभग 1 लाख हथियारबंद सुरक्षाकर्मी तैनात किए और मेट्रो, इंटरनेट व उड़ानें बंद कर दीं। उद्धव ठाकरे ने इसे 'कायरतापूर्ण तानाशाही' करार दिया।
कौन-कौन से विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेने का दावा किया गया?
'सामना' के अनुसार, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल, दीपांकर भट्टाचार्य और मनोज झा को कथित तौर पर हिरासत में लिया गया। मुंबई में तुषार गांधी को अगस्त क्रांति मैदान की ओर जाते समय रोका गया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
संयुक्त राष्ट्र ने इस मामले में क्या कहा?
'सामना' के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने मनमाने ढंग से की गई हिरासत और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार पर गहरी चिंता जताई। संयुक्त राष्ट्र ने भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण सभा के अधिकार को बनाए रखने और हिरासत में लिए गए नागरिकों को रिहा करने का आग्रह किया।
शिवसेना (यूबीटी) ने इस कार्रवाई के विरोध में क्या किया?
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे और पार्टी कार्यकर्ता तत्काल रिहाई की माँग को लेकर मुंबई के डीएन नगर पुलिस स्टेशन तक मार्च करते हुए पहुँचे। 'सामना' के संपादकीय में इस कदम को लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में उठाया गया कदम बताया गया।
'सामना' में किए गए दावों की विश्वसनीयता कितनी है?
'सामना' शिवसेना (यूबीटी) का आधिकारिक मुखपत्र है और इसके संपादकीय पार्टी का राजनीतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं। इन दावों की — जिनमें नाकाबंदी, गिरफ्तारी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया शामिल है — अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इन्हें पार्टी के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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