शिवसेना (यूबीटी) का 'सामना' में केंद्र पर हमला: दिल्ली नाकाबंदी, विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने 12 अक्टूबर 2026 को पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के ज़रिए केंद्र सरकार पर देशभर में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने के लिए 'कायरतापूर्ण तानाशाही तरीके' अपनाने का आरोप लगाया। संपादकीय में दिल्ली में की गई बड़े पैमाने की नाकाबंदी, विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी और संयुक्त राष्ट्र की चिंता का विशेष उल्लेख किया गया।
दिल्ली में अभूतपूर्व नाकाबंदी का दावा
'सामना' में कहा गया कि केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़, झारखंड, जम्मू-कश्मीर और मणिपुर में आतंकवाद-रोधी तथा नक्सल-रोधी अभियानों से बुलाए गए हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों को राष्ट्रीय राजधानी में तैनात किया। मुखपत्र के अनुसार, कथित तौर पर लगभग 1 लाख हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों ने कृष्ण मेनन रोड पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास के इर्द-गिर्द घेरा बनाया।
'सामना' में यह भी दावा किया गया कि राजधानी में प्रवेश और निकास के मार्ग सील कर दिए गए, जिससे इंटरनेट सेवाएँ, मेट्रो, स्थानीय बस नेटवर्क, लंबी दूरी की ट्रेनें और व्यावसायिक उड़ानें बाधित हुईं। यह ऐसे समय में आया जब देशभर में विरोध प्रदर्शनों की लहर चल रही थी।
विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी का आरोप
शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र के अनुसार, इस कार्रवाई में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल सहित कई पूर्व मुख्यमंत्रियों को गिरफ्तार किया गया। 'सामना' ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने एक विमान में सवार होकर दीपांकर भट्टाचार्य और मनोज झा जैसे वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं को हिरासत में लिया।
मुंबई में, पुलिस ने महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी को उस समय हिरासत में लिया जब वे अगस्त क्रांति मैदान की ओर शांतिपूर्ण सत्याग्रह करने की कोशिश कर रहे थे। गौरतलब है कि इन सभी दावों का स्रोत शिवसेना (यूबीटी) का मुखपत्र है और इनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
शिवसेना (यूबीटी) की तत्काल प्रतिक्रिया
पार्टी नेता आदित्य ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तार नेताओं की तत्काल रिहाई की माँग को लेकर डीएन नगर पुलिस स्टेशन तक मार्च किया। 'सामना' के संपादकीय में कहा गया कि लॉजिस्टिक शटडाउन के बावजूद दिल्ली में विरोध-स्थलों पर छात्रों और नागरिक समाज के सदस्यों की भारी भीड़ जुटी।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और संयुक्त राष्ट्र की चिंता
'सामना' ने दावा किया कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (UN Human Rights Office) ने मनमाने ढंग से की गई हिरासत, पुलिस के कठोर व्यवहार और महिला प्रदर्शनकारियों को जेल वैन में घसीटकर अज्ञात स्थानों पर ले जाने की खबरों पर गहरी चिंता जताई। संयुक्त राष्ट्र ने कथित तौर पर भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण सभा के मौलिक अधिकार को बनाए रखने और हिरासत में लिए गए सभी नागरिकों को रिहा करने का आग्रह किया।
मुखपत्र ने यह भी कहा कि द न्यूयॉर्क टाइम्स और लंदन के प्रमुख समाचारपत्रों सहित वैश्विक मीडिया संस्थानों ने इस कार्रवाई की तस्वीरें प्रकाशित कीं और भारतीय लोकतंत्र पर सवाल उठाए।
संपादकीय का केंद्रीय संदेश
'सामना' के संपादकीय में लिखा गया: 'जब कोई तानाशाह डरता है, तो उसके अंदर का शैतान खुद को बचाने के लिए हथियारों से लैस स्टील की दीवारें बनाता है, लेकिन लोगों की बगावत से ये दीवारें ज़रूर टूट जाती हैं।' शिवसेना (यूबीटी) का आरोप है कि सरकार का पुलिसिया बल पर निर्भर रहना उसकी 'अंदरूनी कमज़ोरी' को उजागर करता है। यह देखना बाकी है कि केंद्र सरकार इन आरोपों पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है।