विपक्षी दलों को तोड़ना लोकतंत्र के लिए खतरा: मजीद मेमन का BJP पर सीधा हमला
सारांश
मुख्य बातें
वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व सांसद मजीद मेमन ने 18 जून 2026 को मुंबई में विपक्षी दलों को तोड़ने की कथित राजनीतिक रणनीति को भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया। शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसदों के शिंदे गुट के संपर्क में होने की खबरों के बीच उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
मुख्य आरोप: 'ऑपरेशन लोटस' से 'ऑपरेशन टाइगर' तक
मेमन ने कहा, "हमारे लोकतांत्रिक सिस्टम में जो घटनाएं हो रही हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। पहले 'ऑपरेशन लोटस' के ज़रिए दलों को तोड़ा गया और अब 'ऑपरेशन टाइगर' जैसे नए नाम सामने आ रहे हैं।" उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आम आदमी पार्टी (AAP), तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बाद शिंदे गुट के माध्यम से शिवसेना को विभाजित किया। अब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (SP) को तोड़ने की कोशिशें होने का दावा करते हुए उन्होंने चेताया, "अगर यही सिलसिला जारी रहा तो हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो जाएगी।"
शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं की वफादारी पर मेमन की राय
शिवसेना (यूबीटी) की आंतरिक स्थिति पर मेमन ने कहा कि संजय राउत, उद्धव ठाकरे के प्रति पूरी तरह वफादार हैं और उन्हें कभी नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने अरविंद सावंत और अनिल देसाई को भी उद्धव के भरोसेमंद सहयोगी बताया। हालांकि, संदेह के घेरे में आए छह सांसदों के बारे में उन्होंने कहा, "उन पर या तो पैसे का लालच काम कर रहा है या फिर उनके खिलाफ फाइलें खोलने की धमकी। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।"
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी पर संभावित खतरा
यूपी की राजनीति पर मेमन ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कभी स्वीकार नहीं करेंगे कि उन्होंने किसी दल को तोड़ा। उनके अनुसार, "हकीकत यह है कि दबाव, डर और धमकियों के ज़रिए लोगों को तोड़ा जा रहा है।" उन्होंने कहा कि समय बताएगा कि अखिलेश यादव अपने सांसदों और विधायकों को एकजुट रख पाते हैं या नहीं।
मोदी-ट्रंप मुलाकात और भारत की विदेश नीति पर टिप्पणी
प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया मुलाकात पर मेमन ने कहा कि किसी बड़े देश द्वारा पीएम की प्रशंसा और भारत के साथ खड़े रहने का आश्वासन स्वागतयोग्य है। साथ ही उन्होंने मांग की कि ट्रंप प्रशासन द्वारा रूस से तेल खरीद पर लगाई गई पाबंदियाँ हटाई जाएं, क्योंकि यह भारत के हित में होगा।
घरेलू मुद्दों पर पीएम की चुप्पी पर सवाल
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की से पीएम मोदी की मुलाकात की सराहना करते हुए भी मेमन ने पूछा कि पेपर लीक और बेरोज़गारी जैसी घरेलू समस्याओं पर प्रधानमंत्री चुप्पी क्यों साधे हुए हैं। उनके अनुसार, विदेश नीति के साथ-साथ देश के भीतर की चुनौतियों पर भी समान ध्यान देना ज़रूरी है। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में उथल-पुथल चरम पर है।