'ऑपरेशन टाइगर' पर सियासी संग्राम: शिवसेना (यूबीटी) ने जारी किया व्हिप, कांग्रेस ने उठाए दल-बदल पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र की राजनीति में कथित 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर विपक्षी दलों और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच तीखी नोकझोंक तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) की नेता सुषमा अंधारे ने 17 जून को दावा किया कि पार्टी इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नज़र बनाए हुए है और सभी उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें विपक्ष की राजनीतिक हताशा बताया, जबकि कांग्रेस ने दल-बदल की राजनीति पर भाजपा को घेरा।
व्हिप जारी, गुरुवार को अहम बैठक
सुषमा अंधारे ने बताया कि पार्टी ने अपने सभी सांसदों के लिए व्हिप जारी कर दिया है और गुरुवार सुबह 11 बजे नई दिल्ली में सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। उन्होंने कहा कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता इस समय दिल्ली में कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श कर रहे हैं और इस बैठक के बाद स्थिति और स्पष्ट होकर सामने आएगी।
अंधारे ने दावा किया कि जिन नेताओं के नाम पार्टी छोड़ने की अटकलों में उभर रहे हैं, उनमें से कुछ हाल तक पार्टी नेतृत्व के सीधे संपर्क में थे। उनके अनुसार, नागेश पाटिल आष्टीकर मंगलवार की शाम तक पार्टी नेताओं से बातचीत में थे और संजय देशमुख भी संपर्क में थे, हालांकि अब उनके बारे में अलग-अलग राजनीतिक चर्चाएं सामने आ रही हैं।
'टाइगर नहीं, लोमड़ी जैसी चाल'
अंधारे ने 'ऑपरेशन टाइगर' के नामकरण पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा, 'टाइगर दिनदहाड़े शिकार करता है, लेकिन यह तरीका तो लोमड़ी जैसा है — पर्दे के पीछे की जाने वाली राजनीतिक गतिविधि को ऑपरेशन टाइगर कैसे कहा जा सकता है?' उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों और बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के मद्देनज़र भाजपा राज्यसभा में अपना संख्याबल बढ़ाने की कोशिश में है। उनके अनुसार, आम आदमी पार्टी (AAP), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (यूबीटी) के सांसद इस रणनीति के निशाने पर हैं।
भाजपा का पलटवार
पटना में भाजपा सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के उस दावे को पूरी तरह नकार दिया, जिसमें कहा गया था कि महाराष्ट्र के सांसदों को पाला बदलने के लिए ₹15 करोड़ तक की पेशकश की जा रही है। सिग्रीवाल ने कहा कि यह पागलपन और दिमागी दिवालियापन के अलावा कुछ नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि जब विपक्षी दलों के नेता स्वयं अपने नेतृत्व से असंतुष्ट होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों से प्रभावित होते हैं, तब इस तरह के निराधार आरोप गढ़े जाते हैं।
कांग्रेस ने उठाया दल-बदल का मुद्दा
भोपाल में मध्य प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन मुकेश नायक ने कहा कि 'आया राम-गया राम' की राजनीति भाजपा शासनकाल में अपने चरम पर पहुंच गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि देश में कई मामलों की सीबीआई जांच होती है, लेकिन दल-बदल की घटनाओं की कभी निष्पक्ष जांच नहीं होती। नायक ने कहा कि भारतीय राजनीति में इस समय अस्थिरता का माहौल है और यह अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है कि कौन नेता कब और किस दल का रुख कर लेगा।
आगे क्या होगा
गुरुवार की बैठक के बाद शिवसेना (यूबीटी) की अगली रणनीति स्पष्ट होने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन और विपक्षी महा विकास अघाड़ी के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही उच्च स्तर पर है। राज्यसभा की सीटों को लेकर होने वाला यह संभावित खींचतान आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।