ऑपरेशन टाइगर पर राजू वाघमारे का पलटवार: 'बहुमत हमारे पास, यूबीटी सांसदों की बगावत बेबुनियाद'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता राजू वाघमारे ने 13 जून 2026 को शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों के शिंदे गुट से कथित संपर्क की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सरकार के पास पूर्ण बहुमत है और किसी 'ऑपरेशन टाइगर' की कोई आवश्यकता नहीं है। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है, जिसमें सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष दोनों ओर से तीखे बयान सामने आए हैं।
ऑपरेशन टाइगर पर वाघमारे का स्पष्टीकरण
वाघमारे ने कहा कि वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि 'ऑपरेशन टाइगर' जैसी किसी भी राजनीतिक कवायद की ज़रूरत नहीं है। उनके अनुसार, महाराष्ट्र सरकार वर्तमान में पूर्ण बहुमत में है और निकट भविष्य में कोई विधानसभा चुनाव भी नहीं है। इसलिए यूबीटी सांसदों की बगावत के दावे निराधार हैं और पार्टी पूरी तरह स्थिर स्थिति में है।
कॉमेडी शो विवाद पर प्रतिक्रिया
इसी दौरान एक कॉमेडी शो में कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों पर भी वाघमारे ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी स्टैंड-अप कॉमेडी या टॉक शो में किसी मृत व्यक्ति के शरीर अथवा उनसे जुड़े विषयों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना सर्वथा अनुचित है। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति के विरुद्ध बताया और कहा कि एक डॉक्टर जैसे जिम्मेदार पेशे से जुड़े व्यक्ति द्वारा इस तरह का मज़ाक उड़ाना निंदनीय है।
टीएमसी में असंतोष पर तीखे बयान
तृणमूल कांग्रेस (TMC) में कथित असंतोष के सवाल पर वाघमारे ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली से कई सांसद नाराज बताए जा रहे हैं। उनके अनुसार, नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं के बीच असहमति खुलकर सामने आने लगती है, जो पार्टी की आंतरिक कमज़ोरी को दर्शाती है।
बिहार सरकार के मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने भी इस विषय पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में TMC सरकार के दौरान अभिषेक बनर्जी का प्रभाव काफी अधिक रहा है और कई अहम फैसलों में उनकी भूमिका प्रमुख रही है।
भाजपा का TMC पर हमला
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने TMC पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी में भारी असंतोष है और जनता के बीच भी सरकार के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि TMC का गठन मूलतः कांग्रेस से अलग होकर हुआ था और उसके शुरुआती दौर से ही राजनीतिक टकराव की स्थितियाँ बनती रही हैं।
आगे क्या
महाराष्ट्र की राजनीति में यह बयानबाज़ी ऐसे समय में आई है जब राज्य सरकार के स्थायित्व को लेकर कयास लगाए जा रहे थे। गौरतलब है कि शिंदे गुट और उनके सहयोगियों का यह स्पष्टीकरण विपक्षी दावों को कमज़ोर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यूबीटी खेमा इन दावों पर क्या प्रतिक्रिया देता है।