14 अक्टूबर 2026
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कुंजम दर्रा सुरंग निर्माण का आश्वासन, CM सुक्खू ने स्पीति के लिए ₹500 करोड़ खर्च का ऐलान किया

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कुंजम दर्रा सुरंग निर्माण का आश्वासन, CM सुक्खू ने स्पीति के लिए ₹500 करोड़ खर्च का ऐलान किया

सारांश

हिमाचल प्रदेश के CM सुक्खू ने काजा जनसभा में कुंजम दर्रा सुरंग के लिए DPR, स्पीति पर ₹500 करोड़ खर्च और सुमदो-काजा ट्रांसमिशन लाइन का ऐलान किया — लेकिन केंद्र द्वारा ₹1,600 करोड़ रोकने का आरोप लगाते हुए OPS विवाद को भी उठाया।

मुख्य बातें

CM सुखविंदर सुक्खू ने 14 अक्टूबर 2026 को काजा जनसभा में कुंजम दर्रा सुरंग के लिए सर्वेक्षण और DPR तैयार करने का आश्वासन दिया।
स्पीति के विकास पर आने वाले वर्षों में ₹500 करोड़ खर्च करने की घोषणा की गई।
सुमदो-काजा ट्रांसमिशन लाइन लगभग ₹350 करोड़ की लागत से तीन साल में पूरी करने का लक्ष्य।
काजा में हेलीपोर्ट सर्वेक्षण, कॉलेज खोलने की संभावना और चिकित्सा विशेषज्ञों की नियुक्ति का भी आश्वासन।
स्पीति घाटी को प्राकृतिक कृषि क्षेत्र घोषित करने की योजना; OPS बहाली जारी।
CM ने आरोप लगाया कि केंद्र ने OPS लागू करने के कारण हिमाचल के ₹1,600 करोड़ वार्षिक रोक रखे हैं।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने 14 अक्टूबर 2026 को काजा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए घोषणा की कि लाहौल-स्पीति जिले में कुंजम दर्रे के नीचे सुरंग बनाने के लिए सर्वेक्षण और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। इस सुरंग के बनने से स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को पूरे वर्ष बेहतर सड़क संपर्क मिलने की उम्मीद है।

मुख्य घोषणाएँ

अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार आने वाले वर्षों में स्पीति के विकास पर ₹500 करोड़ खर्च करेगी। इसके अलावा, सुमदो-काजा ट्रांसमिशन लाइन को लगभग ₹350 करोड़ की अनुमानित लागत से तीन साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि स्पीति घाटी को प्राकृतिक कृषि क्षेत्र घोषित किया जाएगा और काजा कस्बे में एक कॉलेज खोलने की संभावना तलाशी जाएगी। काजा में स्त्री रोग विशेषज्ञों सहित चिकित्सा विशेषज्ञों की नियुक्ति का भी आश्वासन दिया गया।

इसके अतिरिक्त, काजा में एक हेलीपोर्ट के निर्माण के लिए सर्वेक्षण कराने की बात कही गई, जिससे पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों को भी लाभ होगा।

विकास पर सरकार का फ़ोकस

सुक्खू ने बताया कि जब उन्होंने 15 अप्रैल 2023 को हिमाचल दिवस के अवसर पर पहली बार इस क्षेत्र का दौरा किया था, तब स्थानीय निवासियों ने बिजली की कमी का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान के प्रयास अब जमीनी स्तर पर परिणाम देने लगे हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हिमाचल प्रदेश का लगभग 42 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र शीत रेगिस्तानी क्षेत्रों में आता है। राज्य सरकार इन क्षेत्रों में रहने वाली आबादी के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है और उनके कल्याण के लिए अतिरिक्त धनराशि आवंटित की जा रही है। सरकार का लक्ष्य स्पीति के लोगों की आय दोगुनी करना भी है।

कर्मचारी कल्याण और पुरानी पेंशन योजना

मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों के कल्याण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार दिवाली पर महंगाई भत्ते की एक किस्त जारी करने पर विचार करेगी। साथ ही, कर्मचारियों को सम्मान और सामाजिक सुरक्षा देने के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल किया जा चुका है और आने वाले वर्षों में और अधिक कर्मचारियों को इसके दायरे में लाने पर विचार किया जाएगा।

केंद्र-राज्य विवाद

सुक्खू ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश को हर साल मिलने वाले ₹1,600 करोड़ रोक रखे हैं, क्योंकि राज्य ने OPS लागू कर रखी है। यह तनाव राज्य की विकास योजनाओं पर वित्तीय दबाव का संकेत देता है।

क्या होगा आगे

कुंजम दर्रा सुरंग परियोजना के लिए डीपीआर तैयार होने के बाद ही निर्माण की समयसीमा स्पष्ट होगी। गौरतलब है कि स्पीति घाटी जैसे दुर्गम क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ अक्सर कठिन भूगोल, अत्यधिक ठंड और सीमित संसाधनों के कारण देरी का सामना करती हैं। ₹500 करोड़ के खर्च का वितरण और समयसीमा इस योजना की वास्तविक प्रभावशीलता तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कुंजम दर्रा सुरंग केवल DPR के स्तर पर है — निर्माण तो दूर, टाइमलाइन भी स्पष्ट नहीं। ₹500 करोड़ का आँकड़ा प्रभावशाली लगता है, मगर बिना वार्षिक किस्त और क्रियान्वयन ढाँचे के यह एक और बड़े वादे की श्रेणी में जा सकता है। दूसरी ओर, केंद्र पर ₹1,600 करोड़ रोकने का आरोप OPS को लेकर केंद्र-राज्य तनाव की याद दिलाता है जो हिमाचल की वित्तीय सेहत को सीधे प्रभावित करता है — और यही असली चुनौती है जिस पर ध्यान कम जाता है।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुंजम दर्रा सुरंग क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?
कुंजम दर्रा लाहौल-स्पीति जिले में एक ऊँचाई वाला पर्वतीय दर्रा है जो सर्दियों में बंद हो जाता है, जिससे स्पीति घाटी कट जाती है। इसके नीचे सुरंग बनने से पूरे वर्ष सड़क संपर्क सुनिश्चित होगा, जिससे स्थानीय निवासियों और पर्यटकों दोनों को लाभ मिलेगा।
स्पीति के विकास के लिए सरकार कितना खर्च करेगी?
CM सुक्खू के अनुसार राज्य सरकार आने वाले वर्षों में स्पीति पर ₹500 करोड़ खर्च करेगी। इसके अतिरिक्त, सुमदो-काजा ट्रांसमिशन लाइन पर लगभग ₹350 करोड़ की लागत आने का अनुमान है।
काजा में क्या नई सुविधाएँ मिलेंगी?
काजा में हेलीपोर्ट निर्माण के लिए सर्वेक्षण, एक नया कॉलेज खोलने की संभावना तलाशी जाएगी और स्त्री रोग विशेषज्ञों सहित चिकित्सा विशेषज्ञों की नियुक्ति का आश्वासन दिया गया है।
हिमाचल में OPS विवाद क्या है और केंद्र ने पैसे क्यों रोके?
हिमाचल प्रदेश ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल की है, जिसके कारण CM सुक्खू के अनुसार केंद्र सरकार ने राज्य को मिलने वाले ₹1,600 करोड़ वार्षिक रोक रखे हैं। यह केंद्र-राज्य वित्तीय तनाव का एक सक्रिय मुद्दा है।
स्पीति घाटी को प्राकृतिक कृषि क्षेत्र घोषित करने से क्या होगा?
स्पीति घाटी को प्राकृतिक कृषि क्षेत्र घोषित करने से वहाँ के किसानों को जैविक और पारंपरिक खेती के लिए विशेष सरकारी सहायता और प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। सरकार का लक्ष्य स्पीति के लोगों की आय दोगुनी करना भी है।
राष्ट्र प्रेस
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