एमपीएससी परीक्षा लीक जांच: न्यायमूर्ति दिलीप भोसले आयोग ने 16 नवंबर तक बयान माँगे
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) द्वारा आयोजित नौ प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और अनियमितताओं की जाँच के लिए एक न्यायिक जाँच आयोग गठित किया है। 29 अक्टूबर 2026 को जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, सभी संबंधित पक्षों — उम्मीदवारों, छात्रों और पंजीकृत संगठनों सहित — को 16 नवंबर 2026 तक अपने बयान प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है। यह कदम राज्य की भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर उठ रहे गंभीर सवालों के बीच आया है।
आयोग की संरचना और जनादेश
इस जाँच आयोग की अध्यक्षता इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दिलीप भोसले कर रहे हैं। आयोग को दस्तावेज लीक, महत्वपूर्ण खुलासों और अन्य अनियमितताओं से संबंधित आरोपों की व्यापक जाँच का दायित्व सौंपा गया है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के आयुक्त तुकाराम मुंधे आयोग के सदस्य-सचिव के रूप में कार्यरत हैं।
गौरतलब है कि एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग का गठन सामान्य प्रशासनिक जाँच से कहीं अधिक गंभीर स्तर का संकेत देता है। यह ऐसे समय में आया है जब भर्ती घोटालों को लेकर देशभर में छात्र आंदोलन तेज़ हुए हैं।
जाँच के दायरे में आई नौ परीक्षाएँ
यह जाँच 2023 से 2026 के बीच आयोजित नौ प्रमुख परीक्षाओं को कवर करती है। इनमें शामिल हैं:
ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा ग्रुप-बी (2025), महाराष्ट्र ग्रुप-बी (गैर-राजपत्रित) सेवा संयुक्त प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा (2025), महाराष्ट्र ग्रुप-सी सेवा संयुक्त प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा (2025), महाराष्ट्र कृषि सेवा मुख्य परीक्षा (2024), खाद्य एवं औषधि प्रशासनिक सेवा मुख्य परीक्षा (2023), महाराष्ट्र सिविल इंजीनियरिंग सेवा मुख्य परीक्षा (2025) और महाराष्ट्र विद्युत इंजीनियरिंग सेवा मुख्य परीक्षा (2025) शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में परीक्षाओं का एक साथ दायरे में आना इस मामले की गंभीरता को रेखांकित करता है।
बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया
प्रासंगिक साक्ष्य या विवरण रखने वाले उम्मीदवार, छात्र और पंजीकृत संगठन 16 नवंबर 2026 या उससे पहले मराठी अथवा अंग्रेज़ी में हलफनामे के माध्यम से अपना औपचारिक बयान प्रस्तुत कर सकते हैं। बयान कमरा नंबर 201, दूसरी मंजिल, खाद्य एवं औषधि प्रशासन भवन, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स, बांद्रा (पूर्व), मुंबई में व्यक्तिगत रूप से जमा किए जा सकते हैं या आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर ईमेल किए जा सकते हैं।
बयान के साथ वैध पहचान प्रमाण और स्व-सत्यापित सहायक दस्तावेज संलग्न करना अनिवार्य है। आयोग ने आश्वासन दिया है कि प्राप्त सभी बयान पूरी तरह गोपनीय रखे जाएँगे।
आगे की कार्यवाही
प्राप्त हलफनामों की समीक्षा के पश्चात आयोग यह निर्धारित करेगा कि किन्हें गवाह के रूप में व्यक्तिगत गवाही के लिए बुलाया जाए। यह जाँच प्रक्रिया महाराष्ट्र के उन हज़ारों अभ्यर्थियों के लिए निर्णायक साबित हो सकती है जिन्होंने वर्षों की तैयारी के बाद इन परीक्षाओं में भाग लिया था। आयोग की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर आगामी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की दिशा तय होगी।