एमपीएससी पेपर लीक: एसआईटी ने दो और आरोपी दबोचे, गिरफ्तारियों का आंकड़ा 13 पहुंचा
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) की औषध निरीक्षक (ड्रग इंस्पेक्टर) भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 23 अक्टूबर 2026 को दो नए आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले में निर्णायक कार्रवाई की। इस गिरफ्तारी के साथ अब तक पकड़े गए आरोपियों की कुल संख्या 13 हो गई है। जांच अधिकारियों के अनुसार, पेपर लीक नेटवर्क में सरकारी अधिकारियों, बिचौलियों और उम्मीदवारों की मिलीभगत सामने आई है।
मामले की पृष्ठभूमि
एमपीएससी ने 22 मार्च 2026 को विज्ञापन क्रमांक 116/2025 के तहत अन्न एवं औषध प्रशासन संवर्ग में 154 पदों के लिए राज्य के छह परीक्षा केंद्रों पर यह परीक्षा आयोजित की थी। बाद में पेपर लीक की शिकायत सामने आने पर एमपीएससी के विधिक प्रतिनिधि मंगेश देसाई की शिकायत के आधार पर 25 अगस्त 2026 को कफ परेड पुलिस स्टेशन में अपराध क्रमांक 0195/2026 दर्ज किया गया।
आरोप है कि कुछ आरोपियों ने आर्थिक लाभ के लिए गोपनीय कक्ष से प्रश्नपत्रों की प्रतियाँ बाहर निकालकर उन्हें अवैध रूप से बेचा, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता और एमपीएससी की गोपनीयता दोनों गंभीर रूप से भंग हुईं।
नई गिरफ्तारियाँ और आरोपियों की भूमिका
एसआईटी जांच में सामने आया कि एमपीएससी के सहायक कक्ष अधिकारी रोहित कोलटकर ने आरोपी अभिजीत लांडवे से प्रश्नपत्र हासिल किया था। एसआईटी ने कोलटकर को 23 अक्टूबर 2026 को नवी मुंबई से गिरफ्तार किया। इससे पहले बिचौलिये मयूर ठाकरे को 12 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया जा चुका था, जिन पर उम्मीदवारों तक पेपर पहुंचाने का आरोप है।
गौरतलब है कि एसआईटी ने इससे पहले 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें अवर सचिव अभिजीत लांडवे, सहायक कक्ष अधिकारी विश्वेश्वर नकाते और गोपाल मराठे, कौटिल्य अकादमी के संचालक प्रवीण पाटिल, बिचौलिये अमृत पाटिल, लोकेश उर्फ गौरव पाटिल, संदीप खलाटे और भैरवनाथ कदम, तथा उम्मीदवार ऋतुजा पाटिल, साजिद संदे और विजय किंगर शामिल हैं।
कानूनी कार्रवाई
सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के अलावा महाराष्ट्र स्पर्धा परीक्षा (अनुचित साधनों पर प्रतिबंध) अधिनियम-2024 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत मामला दर्ज है। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर पहले से ही सार्वजनिक बहस तेज है।
जांच की मौजूदा स्थिति
एसआईटी का कहना है कि पेपर लीक नेटवर्क की पूरी साजिश, आर्थिक लेनदेन और इसमें शामिल अन्य संभावित व्यक्तियों की भूमिका की जांच अभी जारी है। अधिकारियों के अनुसार, आगे और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह मामला राज्य की प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली के भीतर गहरी जड़ें जमाए भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है, जो सैकड़ों ईमानदार उम्मीदवारों के भविष्य को प्रभावित करता है।