26 अगस्त 2026
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एमपीएससी ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक: मुंबई क्राइम ब्रांच ने 6 आरोपी दबोचे, 2 सितंबर तक पुलिस कस्टडी

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एमपीएससी ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक: मुंबई क्राइम ब्रांच ने 6 आरोपी दबोचे, 2 सितंबर तक पुलिस कस्टडी

सारांश

एमपीएससी ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा का पेपर परीक्षा से दो दिन पहले लीक हुआ — और इसकी जड़ में एक प्रेम संबंध, एक ब्रेकअप और ₹12 लाख की कथित डील है। मुंबई क्राइम ब्रांच ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 3 एमपीएससी अधिकारी शामिल हैं। नंदुरबार कनेक्शन और अधूरे वित्तीय सूत्र बताते हैं कि यह नेटवर्क और बड़ा हो सकता है।

मुख्य बातें

मुंबई क्राइम ब्रांच ने 26 अगस्त 2026 को एमपीएससी ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक मामले में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
सभी आरोपियों को 2 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया।
कथित तौर पर पूरी डील ₹12 लाख में हुई; प्रवीण पाटील और एमपीएससी अधिकारियों के बीच ₹5 लाख का ट्रांजैक्शन सामने आया।
एमपीएससी के तीन अधिकारी — विश्वेश्वर नकटे , गोपाल मराठे और अभिजीत लेंडवे — जाँच के घेरे में।
परीक्षा से दो दिन पहले पेपर लीक हुआ; रितुजा पाटील अभी तक गिरफ्तार नहीं।
सभी प्रमुख आरोपियों का नंदुरबार से संबंध; क्राइम ब्रांच को और आरोपियों के सामने आने की आशंका।

मुंबई क्राइम ब्रांच ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की औषधि निरीक्षक (ड्रग इंस्पेक्टर) भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में 26 अगस्त 2026 को 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। सभी गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 2 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। जाँच एजेंसी का मानना है कि इस पेपर लीक नेटवर्क में और भी आरोपी शामिल हो सकते हैं।

मामले की पृष्ठभूमि और मुख्य घटनाक्रम

जाँच में सामने आया है कि उम्मीदवार रितुजा पाटील (जो फिलहाल गिरफ्तार नहीं हैं) और गौरव पाटील के बीच प्रेम संबंध था। रितुजा ने कथित तौर पर अपने पिता अमृत पाटील से परीक्षा का पेपर हासिल करने की बात कही। इसके बाद अमृत पाटील कथित बिचौलिए प्रवीण पाटील के संपर्क में आया, जो नंदुरबार में कोचिंग क्लास संचालित करता है।

पुलिस के अनुसार, परीक्षा से दो दिन पहले पेपर लीक हुआ और यह जानकारी कई लोगों तक पहुँची। शिकायतकर्ता ऋषिकेश गांगुर्दे — जो सोशल मीडिया पर एफडीए से संबंधित सामग्री बनाता है — के संपर्क में गौरव पाटील आया और उसे लीक हुए पेपर की जानकारी दी। गौरव पाटील ने यह भी बताया कि उसके पास लीक पेपर की प्रति मौजूद है।

वित्तीय लेन-देन और ₹12 लाख की कथित डील

पुलिस को मिली जानकारी के अनुसार, प्रवीण पाटील और एमपीएससी के गिरफ्तार अधिकारियों के बीच कथित तौर पर ₹5 लाख का वित्तीय लेन-देन हुआ। हालाँकि जाँच के दौरान यह रकम बढ़ सकती है। पुलिस को यह भी पता चला है कि पूरी डील कथित तौर पर ₹12 लाख में तय हुई थी। क्राइम ब्रांच अब इस पूरे वित्तीय नेटवर्क की गहन जाँच कर रही है।

एमपीएससी अधिकारियों की भूमिका

इस मामले में एमपीएससी से जुड़े तीन अधिकारियों के नाम सामने आए हैं — विश्वेश्वर नकटे (सहायक कक्ष अधिकारी), गोपाल मराठे (अवर सचिव, एमपीएससी) और अभिजीत लेंडवे (अवर सचिव, एमपीएससी)। तीनों की भूमिका की जाँच जारी है। गौरतलब है कि प्रवीण पाटील, अमृत पाटील और एमपीएससी से जुड़े अधिकारी सभी नंदुरबार से संबंध रखते हैं — एक संयोग जिसे क्राइम ब्रांच अहम मान रही है।

ब्रेकअप से खुला राज़

जाँच के अनुसार, रितुजा और गौरव पाटील के बीच ब्रेकअप के बाद गौरव पाटील उर्फ लोकेश ने एमपीएससी को पेपर लीक की जानकारी देने का फैसला किया। यह मामला इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि प्रवीण पाटील की कोचिंग क्लास का एफडीए इंस्पेक्टर परीक्षा से सीधा संबंध नहीं है — जिससे क्राइम ब्रांच को संदेह है कि इस नेटवर्क में और भी लोग शामिल हो सकते हैं।

आगे की जाँच का दायरा

क्राइम ब्रांच अब यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा से दो दिन पहले पेपर एमपीएससी से बाहर कैसे आया, पेपर किन-किन लोगों तक पहुँचा, ₹12 लाख की कथित डील में किसकी क्या भूमिका थी और ₹5 लाख के ट्रांजैक्शन से कौन-कौन से आरोपी जुड़े हैं। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और नए नामों के सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सुनियोजित नेटवर्क हो सकता है। सवाल यह है कि एमपीएससी की आंतरिक निगरानी व्यवस्था इतनी बड़ी सेंध क्यों नहीं पकड़ पाई। जब तक परीक्षा-प्रक्रिया में पारदर्शी तकनीकी सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए जाते, ऐसे मामले बार-बार सामने आते रहेंगे।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमपीएससी ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक मामला क्या है?
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की औषधि निरीक्षक भर्ती परीक्षा का पेपर परीक्षा से दो दिन पहले कथित तौर पर लीक हो गया था। मुंबई क्राइम ब्रांच ने इस मामले में 26 अगस्त 2026 को 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें तीन एमपीएससी अधिकारी शामिल हैं।
इस मामले में कौन-कौन से आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
गिरफ्तार आरोपियों में गौरव पाटील, प्रवीण पाटील (कोचिंग संचालक), अमृत पाटील और एमपीएससी के तीन अधिकारी — विश्वेश्वर नकटे, गोपाल मराठे और अभिजीत लेंडवे — शामिल हैं। उम्मीदवार रितुजा पाटील को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।
पेपर लीक में कितने रुपये का लेन-देन हुआ?
पुलिस जाँच के अनुसार, पूरी डील कथित तौर पर ₹12 लाख में हुई थी। प्रवीण पाटील और एमपीएससी अधिकारियों के बीच ₹5 लाख का ट्रांजैक्शन सामने आया है, हालाँकि जाँच जारी रहने के साथ यह रकम बढ़ सकती है।
पेपर लीक का खुलासा कैसे हुआ?
गौरव पाटील और रितुजा पाटील के बीच ब्रेकअप के बाद गौरव ने पेपर लीक की जानकारी सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर ऋषिकेश गांगुर्दे को दी, जिसने इस मामले की शिकायत की। गौरव ने बताया कि उसके पास लीक पेपर की प्रति मौजूद है।
आगे की जाँच में क्राइम ब्रांच क्या पता लगा रही है?
क्राइम ब्रांच यह जानने की कोशिश कर रही है कि पेपर एमपीएससी से बाहर कैसे आया, किन-किन लोगों तक पहुँचा और ₹12 लाख की डील में किसकी क्या भूमिका थी। नंदुरबार से जुड़े सभी आरोपियों के संबंध और नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान भी जाँच के दायरे में है।
राष्ट्र प्रेस
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