बीपीएससी टीआरई-3 पेपर लीक: बिहार ईओयू ने एमबीबीएस डॉक्टर को गिरफ्तार किया, कुल गिरफ्तारियाँ 296 पहुँचीं
सारांश
मुख्य बातें
बिहार आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-3 के कथित पेपर लीक मामले में डॉ. मनीष कुमार को सोमवार, 28 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया। इस गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या 296 हो गई है। डॉ. मनीष नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, पटना से एमबीबीएस उत्तीर्ण हैं और गिरफ्तारी के समय कथित तौर पर पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे थे।
मुख्य घटनाक्रम
ईओयू के मंगलवार को जारी बयान के अनुसार, पटना के आर्थिक अपराध शाखा पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले की जाँच के दौरान एकत्र साक्ष्यों के आधार पर यह गिरफ्तारी की गई। जाँचकर्ताओं का आरोप है कि डॉ. मनीष कुमार, कथित पेपर लीक सिंडिकेट के कथित सरगना संजीव मुखिया के नेटवर्क के सदस्यों के सम्पर्क में थे।
आरोप है कि डॉ. मनीष ने परीक्षा से पूर्व 30 अभ्यर्थियों को एक आरक्षित वाहन से झारखंड के हजारीबाग पहुँचाया, जहाँ उन्हें कथित तौर पर लीक हुए प्रश्न-पत्र की तैयारी कराई गई। यह मामला मूलतः 16 मार्च 2024 को दर्ज किया गया था।
आरोपी की पृष्ठभूमि
ईओयू के अनुसार, डॉ. मनीष कुमार ने 2021 में नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, पटना से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की थी। इसके बाद उन्होंने कैमूर जिले में सरकारी चिकित्सक के रूप में कार्य किया और बाद में पोस्ट-ग्रेजुएशन की तैयारी के लिए नौकरी से इस्तीफा दे दिया। गिरफ्तारी के समय वे कथित तौर पर पीजी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी में जुटे थे।
कानूनी कार्यवाही
इस मामले की जाँच भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और बिहार परीक्षा संचालन अधिनियम, 1981 की संबंधित धाराओं के अंतर्गत की जा रही है। आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने स्पष्ट किया है कि प्रश्न-पत्र लीक करने वाले सिंडिकेट और इससे कथित तौर पर लाभ उठाने वाले सभी व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई जारी रहेगी।
जाँच की स्थिति और आगे की राह
अधिकारियों ने बताया कि जाँच अभी भी जारी है और साक्ष्यों के आधार पर अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में परीक्षा पारदर्शिता को लेकर पहले से ही सार्वजनिक दबाव बना हुआ है। गौरतलब है कि टीआरई-3 पेपर लीक मामला राज्य की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। ईओडब्ल्यू ने कहा है कि कथित साजिश में संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून के दायरे से बाहर नहीं रहने दिया जाएगा।