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बिहार हवलदार अनुदेशक पेपर लीक: ईओयू ने बायोमीट्रिक सुपरवाइजर समेत तीन को किया गिरफ्तार

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बिहार हवलदार अनुदेशक पेपर लीक: ईओयू ने बायोमीट्रिक सुपरवाइजर समेत तीन को किया गिरफ्तार

सारांश

बिहार में परीक्षा माफिया का एक और नेटवर्क बेनकाब — इस बार परीक्षा केंद्र के भीतर से ही उत्तर पत्रक लीक हुए। ईओयू ने बायोमीट्रिक सुपरवाइजर समेत तीन को दबोचा; डिजिटल साक्ष्य बताते हैं कि परीक्षा के दौरान दोपहर 12:21 बजे उत्तर भेजे गए।

मुख्य बातें

आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने 1 अगस्त 2026 को हवलदार अनुदेशक पेपर लीक मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों में राज समदर्शी उर्फ राजा , अभिषेक कुमार और बायोमीट्रिक सुपरवाइजर नितेश कुमार शामिल हैं।
मामला 30 जुलाई 2026 को दर्ज एफआईआर के तहत बिहार लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 की धाराओं 10 और 11(1) में दर्ज है।
डिजिटल साक्ष्यों से पुष्टि हुई कि उत्तर पत्रक परीक्षा के दौरान दोपहर 12:21 बजे भेजा गया था।
आरोपी ने अप्रैल 2026 की एईडीओ परीक्षा में भी अनुचित साधन इस्तेमाल करने की बात स्वीकार की।
तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया; पूरे नेटवर्क की जाँच जारी है।

पटना में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने 1 अगस्त 2026 को बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग द्वारा आयोजित गृह रक्षा वाहिनी सेवा संवर्ग हवलदार अनुदेशक भर्ती परीक्षा के कथित प्रश्नपत्र लीक मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में राज समदर्शी उर्फ राजा, अभिषेक कुमार और परीक्षा केंद्र पर तैनात बायोमीट्रिक सुपरवाइजर नितेश कुमार शामिल हैं। तीनों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

मामले का पृष्ठभूमि और एफआईआर

ईओयू की ओर से शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आर्थिक अपराध थाने में 30 जुलाई 2026 को एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यह मामला बिहार लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 की धाराओं 10 और 11(1) के अंतर्गत दर्ज है। प्राथमिकी हवलदार अनुदेशक भर्ती परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल से संबंधित है। गौरतलब है कि बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, और यह गिरफ्तारी उसी श्रृंखला की एक और कड़ी है।

आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी का विवरण

ईओयू के अनुसार, राज समदर्शी उर्फ राजा पटना जिले के विक्रम थाना क्षेत्र के करसा गाँव के निवासी हैं। अभिषेक कुमार वैशाली जिले के सदर थाना क्षेत्र के सेदपुर रजौली के रहने वाले हैं। नितेश कुमार वैशाली जिले के नगर थाना क्षेत्र के कटरा के निवासी हैं और परीक्षा में बायोमीट्रिक सुपरवाइजर के रूप में कार्यरत थे।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हाजीपुर के नगर थाने में दर्ज एक अन्य मामले की जाँच के दौरान सूचना मिली कि राज समदर्शी हाजीपुर परीक्षा केंद्र पर आयोजित हवलदार अनुदेशक परीक्षा में शामिल होने वाला है। इसके बाद उसे परीक्षा केंद्र के पास से हिरासत में लिया गया

पूछताछ में खुलासे और डिजिटल साक्ष्य

पूछताछ के दौरान राज समदर्शी ने परीक्षा में अनुचित साधनों के उपयोग की बात स्वीकार की और अपने सहयोगी के रूप में अभिषेक कुमार का नाम उजागर किया। उसने यह भी स्वीकार किया कि अप्रैल 2026 में आयोजित एईडीओ परीक्षा में भी उसने अनुचित साधनों का इस्तेमाल किया था। जाँच में सामने आया कि बायोमीट्रिक सुपरवाइजर नितेश कुमार के माध्यम से परीक्षा के प्रश्नों के उत्तर राज समदर्शी तक पहुँचाए जा रहे थे।

दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन की जाँच में परीक्षा से संबंधित एडमिट कार्ड, उत्तर पत्रक और अन्य दस्तावेज मिले। मोबाइल गैलरी और डिजिटल साक्ष्यों से यह भी पुष्टि हुई कि उत्तर पत्रक परीक्षा के दौरान दोपहर 12 बजकर 21 मिनट पर भेजा गया था — जो गिरोह के संगठित तरीके से काम करने का स्पष्ट संकेत है।

ईओयू की चेतावनी और आगे की जाँच

ईओयू ने स्पष्ट किया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक कराने वाले गिरोहों और इस अवैध गतिविधि से आर्थिक लाभ कमाने वाले व्यक्तियों व समूहों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। एजेंसी के अनुसार, मामले के अन्य पहलुओं की गहन जाँच की जा रही है और इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान तथा उनकी भूमिका के सत्यापन की प्रक्रिया भी जारी है। यह मामला बिहार में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भीतर से लग रही है — बायोमीट्रिक सुपरवाइजर जैसे विश्वसनीय पद पर बैठे व्यक्ति का इस गिरोह में शामिल होना दर्शाता है कि निगरानी तंत्र की जड़ें ही खोखली हो रही हैं। यह पहली बार नहीं है; बिहार में BPSC, BSSC और अब गृह रक्षा वाहिनी परीक्षाएँ — लीक का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। असली सवाल यह है कि जब डिजिटल साक्ष्य इतने स्पष्ट हैं, तो परीक्षा केंद्रों पर रियल-टाइम निगरानी और मोबाइल जैमिंग जैसे बुनियादी उपाय अभी तक अनिवार्य क्यों नहीं किए गए।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार हवलदार अनुदेशक पेपर लीक मामला क्या है?
यह बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग द्वारा आयोजित गृह रक्षा वाहिनी सेवा संवर्ग की हवलदार अनुदेशक भर्ती परीक्षा में कथित प्रश्नपत्र लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़ा मामला है। ईओयू ने 30 जुलाई 2026 को एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू की और 1 अगस्त को तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार तीन आरोपी कौन हैं?
गिरफ्तार आरोपियों में पटना के करसा निवासी राज समदर्शी उर्फ राजा, वैशाली के सेदपुर रजौली निवासी अभिषेक कुमार और वैशाली के कटरा निवासी नितेश कुमार शामिल हैं। नितेश कुमार परीक्षा केंद्र पर बायोमीट्रिक सुपरवाइजर के पद पर तैनात था।
बायोमीट्रिक सुपरवाइजर की इस मामले में क्या भूमिका थी?
जाँच में सामने आया कि बायोमीट्रिक सुपरवाइजर नितेश कुमार के माध्यम से परीक्षा के प्रश्नों के उत्तर आरोपी राज समदर्शी तक पहुँचाए जा रहे थे। डिजिटल साक्ष्यों से पुष्टि हुई कि उत्तर पत्रक परीक्षा के दौरान दोपहर 12 बजकर 21 मिनट पर भेजा गया था।
इस मामले में कौन-सी कानूनी धाराएँ लागू हुई हैं?
यह मामला बिहार लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 की धाराओं 10 और 11(1) के तहत दर्ज किया गया है। एफआईआर 30 जुलाई 2026 को आर्थिक अपराध थाने में दर्ज की गई थी।
क्या इस मामले में और गिरफ्तारियाँ होंगी?
ईओयू ने स्पष्ट किया है कि पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान और उनकी भूमिका के सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि परीक्षा माफिया और आर्थिक लाभ कमाने वाले समूहों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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