बिहार हवलदार अनुदेशक पेपर लीक: ईओयू ने बायोमीट्रिक सुपरवाइजर समेत तीन को किया गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
पटना में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने 1 अगस्त 2026 को बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग द्वारा आयोजित गृह रक्षा वाहिनी सेवा संवर्ग हवलदार अनुदेशक भर्ती परीक्षा के कथित प्रश्नपत्र लीक मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में राज समदर्शी उर्फ राजा, अभिषेक कुमार और परीक्षा केंद्र पर तैनात बायोमीट्रिक सुपरवाइजर नितेश कुमार शामिल हैं। तीनों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
मामले का पृष्ठभूमि और एफआईआर
ईओयू की ओर से शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आर्थिक अपराध थाने में 30 जुलाई 2026 को एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यह मामला बिहार लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 की धाराओं 10 और 11(1) के अंतर्गत दर्ज है। प्राथमिकी हवलदार अनुदेशक भर्ती परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल से संबंधित है। गौरतलब है कि बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, और यह गिरफ्तारी उसी श्रृंखला की एक और कड़ी है।
आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी का विवरण
ईओयू के अनुसार, राज समदर्शी उर्फ राजा पटना जिले के विक्रम थाना क्षेत्र के करसा गाँव के निवासी हैं। अभिषेक कुमार वैशाली जिले के सदर थाना क्षेत्र के सेदपुर रजौली के रहने वाले हैं। नितेश कुमार वैशाली जिले के नगर थाना क्षेत्र के कटरा के निवासी हैं और परीक्षा में बायोमीट्रिक सुपरवाइजर के रूप में कार्यरत थे।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हाजीपुर के नगर थाने में दर्ज एक अन्य मामले की जाँच के दौरान सूचना मिली कि राज समदर्शी हाजीपुर परीक्षा केंद्र पर आयोजित हवलदार अनुदेशक परीक्षा में शामिल होने वाला है। इसके बाद उसे परीक्षा केंद्र के पास से हिरासत में लिया गया।
पूछताछ में खुलासे और डिजिटल साक्ष्य
पूछताछ के दौरान राज समदर्शी ने परीक्षा में अनुचित साधनों के उपयोग की बात स्वीकार की और अपने सहयोगी के रूप में अभिषेक कुमार का नाम उजागर किया। उसने यह भी स्वीकार किया कि अप्रैल 2026 में आयोजित एईडीओ परीक्षा में भी उसने अनुचित साधनों का इस्तेमाल किया था। जाँच में सामने आया कि बायोमीट्रिक सुपरवाइजर नितेश कुमार के माध्यम से परीक्षा के प्रश्नों के उत्तर राज समदर्शी तक पहुँचाए जा रहे थे।
दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन की जाँच में परीक्षा से संबंधित एडमिट कार्ड, उत्तर पत्रक और अन्य दस्तावेज मिले। मोबाइल गैलरी और डिजिटल साक्ष्यों से यह भी पुष्टि हुई कि उत्तर पत्रक परीक्षा के दौरान दोपहर 12 बजकर 21 मिनट पर भेजा गया था — जो गिरोह के संगठित तरीके से काम करने का स्पष्ट संकेत है।
ईओयू की चेतावनी और आगे की जाँच
ईओयू ने स्पष्ट किया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक कराने वाले गिरोहों और इस अवैध गतिविधि से आर्थिक लाभ कमाने वाले व्यक्तियों व समूहों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। एजेंसी के अनुसार, मामले के अन्य पहलुओं की गहन जाँच की जा रही है और इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान तथा उनकी भूमिका के सत्यापन की प्रक्रिया भी जारी है। यह मामला बिहार में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करता है।