बिहार परीक्षा घोटाला: बायोमेट्रिक एजेंसी 'साए एडुक' पर शक, BPSC परीक्षाएं रद्द, कई गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षाओं में कथित धांधली के मामले में 12 जून 2025 को बड़ा खुलासा हुआ, जब आर्थिक अपराध इकाई के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मानवजीत सिंह ढिल्लों ने पटना में प्रेस वार्ता कर बताया कि इस मामले में कई गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं और अनेक प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। जांच में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया है कि इस बार धांधली पारंपरिक पेपर लीक से आगे बढ़कर बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली तक पहुँच गई।
मुख्य घटनाक्रम
मार्च 2025 में BPSC द्वारा आयोजित दो प्रमुख परीक्षाओं — सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी और सहायक प्रशासनिक एवं अन्य पदों की परीक्षा — में अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद दोनों परीक्षाएं रद्द कर दी गईं। इसके बाद एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया और मामला आर्थिक अपराध इकाई को सौंपा गया।
गौरतलब है कि बिहार में पिछले कुछ वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के कई मामले सामने आ चुके हैं, और आर्थिक अपराध इकाई इन सभी की जांच कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
बायोमेट्रिक एजेंसी की संदिग्ध भूमिका
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मानवजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि पहले के मामलों में प्रिंटिंग प्रेस या परिवहन से जुड़े लोग संदिग्ध पाए जाते थे, लेकिन इस बार एक नई आपराधिक कार्यप्रणाली सामने आई है। बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए अनुबंधित निजी कंपनी साए एडुक प्राइवेट लिमिटेड, जिसका मुख्यालय जयपुर, राजस्थान में बताया जा रहा है, इस साजिश का अहम हिस्सा हो सकती है।
आरोप है कि इसी एजेंसी के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाई गई। जांच अधिकारियों के अनुसार, एक संगठित गिरोह तकनीकी प्रणाली का दुरुपयोग कर परीक्षाओं की पारदर्शिता को प्रभावित करता रहा है।
जांच की स्थिति
ढिल्लों ने बताया कि फिलहाल कई संदिग्धों से पूछताछ जारी है और डिजिटल साक्ष्यों की भी गहन जांच की जा रही है। पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल की जा रही है ताकि इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका सामने आ सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं।
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि बायोमेट्रिक प्रणाली को परीक्षाओं में नकल और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए ही लागू किया गया था — और अब वही प्रणाली कथित तौर पर धांधली का माध्यम बन गई।
आम अभ्यर्थियों पर असर
दोनों परीक्षाएं रद्द होने से हजारों अभ्यर्थियों की मेहनत पर पानी फिर गया है। सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी और सहायक प्रशासनिक पदों के लिए तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को अब पुनः परीक्षा का इंतजार करना होगा। परीक्षा की नई तारीखों की घोषणा अभी नहीं की गई है।
क्या होगा आगे
आर्थिक अपराध इकाई के अनुसार पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करना प्राथमिकता है। जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि इस संगठित गिरोह के तार कहाँ-कहाँ तक फैले हैं और क्या अन्य परीक्षाएं भी प्रभावित हुई हैं। डिजिटल फॉरेंसिक और वित्तीय लेनदेन की जांच समानांतर रूप से चल रही है।