30 जुलाई 2026
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बिहार परीक्षा घोटाला: बायोमेट्रिक एजेंसी 'साए एडुक' पर शक, BPSC परीक्षाएं रद्द, कई गिरफ्तार

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बिहार परीक्षा घोटाला: बायोमेट्रिक एजेंसी 'साए एडुक' पर शक, BPSC परीक्षाएं रद्द, कई गिरफ्तार

सारांश

बिहार में परीक्षा घोटाले ने नया मोड़ लिया — इस बार निशाने पर है बायोमेट्रिक एजेंसी। BPSC की दो परीक्षाएं रद्द, जयपुर की कंपनी 'साए एडुक' के कर्मचारियों पर मिलीभगत का आरोप, और आर्थिक अपराध इकाई की जांच में डिजिटल साक्ष्य खंगाले जा रहे हैं।

मुख्य बातें

BPSC की मार्च 2025 में आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी और सहायक प्रशासनिक पदों की परीक्षाएं अनियमितताओं के आरोप में रद्द की गईं।
बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए अनुबंधित कंपनी साए एडुक प्राइवेट लिमिटेड (मुख्यालय: जयपुर ) के कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
आर्थिक अपराध इकाई के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मानवजीत सिंह ढिल्लों ने 12 जून 2025 को पटना में प्रेस वार्ता कर कई गिरफ्तारियों और प्राथमिकी दर्ज होने की पुष्टि की।
जांच में डिजिटल साक्ष्य और वित्तीय लेनदेन की समानांतर पड़ताल जारी है; और गिरफ्तारियां संभव हैं।
इस बार धांधली पारंपरिक पेपर लीक से अलग — बायोमेट्रिक तकनीकी प्रणाली के दुरुपयोग का आरोप है।

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षाओं में कथित धांधली के मामले में 12 जून 2025 को बड़ा खुलासा हुआ, जब आर्थिक अपराध इकाई के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मानवजीत सिंह ढिल्लों ने पटना में प्रेस वार्ता कर बताया कि इस मामले में कई गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं और अनेक प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। जांच में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया है कि इस बार धांधली पारंपरिक पेपर लीक से आगे बढ़कर बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली तक पहुँच गई।

मुख्य घटनाक्रम

मार्च 2025 में BPSC द्वारा आयोजित दो प्रमुख परीक्षाओं — सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी और सहायक प्रशासनिक एवं अन्य पदों की परीक्षा — में अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद दोनों परीक्षाएं रद्द कर दी गईं। इसके बाद एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया और मामला आर्थिक अपराध इकाई को सौंपा गया।

गौरतलब है कि बिहार में पिछले कुछ वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के कई मामले सामने आ चुके हैं, और आर्थिक अपराध इकाई इन सभी की जांच कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

बायोमेट्रिक एजेंसी की संदिग्ध भूमिका

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मानवजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि पहले के मामलों में प्रिंटिंग प्रेस या परिवहन से जुड़े लोग संदिग्ध पाए जाते थे, लेकिन इस बार एक नई आपराधिक कार्यप्रणाली सामने आई है। बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए अनुबंधित निजी कंपनी साए एडुक प्राइवेट लिमिटेड, जिसका मुख्यालय जयपुर, राजस्थान में बताया जा रहा है, इस साजिश का अहम हिस्सा हो सकती है।

आरोप है कि इसी एजेंसी के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाई गई। जांच अधिकारियों के अनुसार, एक संगठित गिरोह तकनीकी प्रणाली का दुरुपयोग कर परीक्षाओं की पारदर्शिता को प्रभावित करता रहा है।

जांच की स्थिति

ढिल्लों ने बताया कि फिलहाल कई संदिग्धों से पूछताछ जारी है और डिजिटल साक्ष्यों की भी गहन जांच की जा रही है। पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल की जा रही है ताकि इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका सामने आ सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं।

यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि बायोमेट्रिक प्रणाली को परीक्षाओं में नकल और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए ही लागू किया गया था — और अब वही प्रणाली कथित तौर पर धांधली का माध्यम बन गई।

आम अभ्यर्थियों पर असर

दोनों परीक्षाएं रद्द होने से हजारों अभ्यर्थियों की मेहनत पर पानी फिर गया है। सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी और सहायक प्रशासनिक पदों के लिए तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को अब पुनः परीक्षा का इंतजार करना होगा। परीक्षा की नई तारीखों की घोषणा अभी नहीं की गई है।

क्या होगा आगे

आर्थिक अपराध इकाई के अनुसार पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करना प्राथमिकता है। जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि इस संगठित गिरोह के तार कहाँ-कहाँ तक फैले हैं और क्या अन्य परीक्षाएं भी प्रभावित हुई हैं। डिजिटल फॉरेंसिक और वित्तीय लेनदेन की जांच समानांतर रूप से चल रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अगर एजेंसी के कर्मचारी ही साजिश में शामिल हों, तो तकनीक केवल भ्रष्टाचार का नया औजार बन जाती है। सवाल यह है कि सरकारी परीक्षाओं के लिए निजी एजेंसियों के चयन में जवाबदेही तंत्र कहाँ है, और क्या अनुबंध प्रक्रिया में पर्याप्त सत्यापन हुआ था। जब तक तीसरे पक्ष के अनुबंधों पर कड़ी निगरानी नहीं होगी, हर नई 'एंटी-चीटिंग' तकनीक एक नई कमज़ोरी बन सकती है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार BPSC परीक्षा घोटाला 2025 क्या है?
मार्च 2025 में BPSC द्वारा आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी और सहायक प्रशासनिक पदों की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए, जिसके बाद दोनों परीक्षाएं रद्द कर दी गईं और आर्थिक अपराध इकाई को जांच सौंपी गई। इस बार धांधली का तरीका पारंपरिक पेपर लीक से अलग — बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली में सेंध लगाने का आरोप है।
साए एडुक प्राइवेट लिमिटेड की इस मामले में क्या भूमिका बताई जा रही है?
जयपुर स्थित साए एडुक प्राइवेट लिमिटेड वह कंपनी है जिसे BPSC परीक्षाओं में बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए अनुबंधित किया गया था। जांच अधिकारियों के अनुसार, इसी कंपनी के कुछ कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से परीक्षा प्रणाली में फर्जीवाड़ा किया गया; हालांकि जांच अभी जारी है।
इस मामले की जांच कौन कर रहा है और अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
आर्थिक अपराध इकाई (EOU) इस मामले की जांच कर रही है। 12 जून 2025 तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, अनेक प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है। EOU के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मानवजीत सिंह ढिल्लों ने आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना जताई है।
रद्द हुई BPSC परीक्षाओं के अभ्यर्थियों का क्या होगा?
दोनों रद्द परीक्षाओं — सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी और सहायक प्रशासनिक पदों — के अभ्यर्थियों को पुनः परीक्षा का इंतजार करना होगा। नई परीक्षा तिथियों की घोषणा अभी नहीं की गई है।
बिहार में पहले भी परीक्षा घोटाले हुए हैं?
हाँ, बिहार में पिछले कुछ वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनकी जांच आर्थिक अपराध इकाई कर रही है। पहले के मामलों में प्रिंटिंग प्रेस या परिवहन से जुड़े लोग संदिग्ध पाए जाते थे, जबकि इस बार बायोमेट्रिक तकनीकी प्रणाली के दुरुपयोग का आरोप है, जो एक नई और गंभीर प्रवृत्ति है।
राष्ट्र प्रेस
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