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JSSC जूनियर इंजीनियर पेपर लीक: परीक्षा एजेंसी का निदेशक अरुण कुमार मुंबई से गिरफ्तार

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JSSC जूनियर इंजीनियर पेपर लीक: परीक्षा एजेंसी का निदेशक अरुण कुमार मुंबई से गिरफ्तार

सारांश

JSSC के 2022 के जूनियर इंजीनियर पेपर लीक मामले में रांची SIT ने परीक्षा एजेंसी के निदेशक अरुण कुमार को मुंबई से दबोचा। परीक्षा शुरू होने से पहले ही उत्तरमाला वायरल हो गई थी, जिससे 1,279 पदों की परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। अब तक कुल छह आरोपी गिरफ्तार, कुछ अभी भी फरार।

मुख्य बातें

रांची SIT ने JSSC जूनियर इंजीनियर पेपर लीक मामले में परीक्षा एजेंसी के निदेशक अरुण कुमार को मुंबई से गिरफ्तार किया।
3 जुलाई 2022 को 1,279 पदों के लिए आयोजित परीक्षा प्रथम पाली की उत्तरमाला वायरल होने के बाद रद्द कर दी गई थी।
परीक्षा संचालन का जिम्मा नई दिल्ली स्थित बायनसिस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था।
सिंडिकेट के जरिए पटना में अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले उत्तर रटवाए गए थे।
इससे पहले 5 आरोपी — रंजीत मंडल, दीपक कुमार, अभिषेक कुमार, दीपक श्रीवास्तव और कृष्ण कुमार — गिरफ्तार होकर न्यायिक हिरासत में हैं।
कुछ आरोपी अभी भी फरार; पुलिस की छापेमारी जारी है।

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की 2022 में आयोजित कनीय अभियंता (डिप्लोमा) प्रतियोगी परीक्षा के पेपर लीक मामले में रांची पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने परीक्षा संचालन एजेंसी के निदेशक अरुण कुमार को मुंबई से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, जांच में परीक्षा संचालन एजेंसी की कथित संलिप्तता के ठोस साक्ष्य मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई। अरुण कुमार बिहार के नालंदा जिले के चिकसौरा थाना क्षेत्र के खोखुना गांव का निवासी है।

मुख्य घटनाक्रम

JSSC ने 3 जुलाई 2022 को कनीय अभियंता (डिप्लोमा) के 1,279 पदों पर नियुक्ति के लिए यह परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रथम पाली की उत्तरमाला सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और प्रश्नपत्र लीक होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद आयोग ने परीक्षा रद्द कर दी। अभ्यर्थी मिथलेश कुमार महतो की लिखित शिकायत पर 14 जुलाई 2022 को नामकुम थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।

मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 120बी, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 तथा बिहार परीक्षा संचालन अधिनियम की धारा 10 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

एजेंसी और सिंडिकेट की भूमिका

जांच में सामने आया कि परीक्षा संचालन का जिम्मा नई दिल्ली स्थित बायनसिस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान पेपर लीक कराने वाले एक सिंडिकेट का भी पर्दाफाश हुआ। इस सिंडिकेट के माध्यम से पटना में कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले ही प्रश्नों के उत्तर रटवाए गए थे।

अब तक की गिरफ्तारियाँ

इस मामले में इससे पहले कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस के अनुसार, परीक्षार्थी एवं प्राथमिक आरोपी रंजीत मंडल, सिंडिकेट के सदस्य दीपक कुमार, अभिषेक कुमार और दीपक श्रीवास्तव तथा परीक्षा संचालन एजेंसी के सीनियर मैनेजर कृष्ण कुमार को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। सभी को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। अब निदेशक अरुण कुमार की गिरफ्तारी इस मामले में SIT की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

आगे क्या होगा

पुलिस के अनुसार, मामले में अभी कुछ अन्य आरोपी फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी जारी है। विशेष जांच दल पेपर लीक के पूरे नेटवर्क और उसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रहा है। 1,279 पदों के लिए परीक्षा रद्द होने के बाद से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और क्या 1,279 पदों के लिए प्रभावित अभ्यर्थियों को समयबद्ध पुनर्परीक्षा का आश्वासन मिलेगा।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

JSSC जूनियर इंजीनियर पेपर लीक मामला क्या है?
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने 3 जुलाई 2022 को कनीय अभियंता (डिप्लोमा) के 1,279 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रथम पाली की उत्तरमाला वायरल हो गई और प्रश्नपत्र लीक हुआ, जिसके बाद परीक्षा रद्द कर दी गई और नामकुम थाने में FIR दर्ज हुई।
अरुण कुमार को क्यों गिरफ्तार किया गया?
अरुण कुमार परीक्षा संचालन एजेंसी बायनसिस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक हैं। रांची SIT की जांच में एजेंसी की पेपर लीक में कथित संलिप्तता के साक्ष्य मिले, जिसके बाद वे मुंबई में छिपे थे और वहीं से उन्हें गिरफ्तार किया गया।
इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हो चुके हैं?
अरुण कुमार सहित अब तक कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है — रंजीत मंडल, दीपक कुमार, अभिषेक कुमार, दीपक श्रीवास्तव और कृष्ण कुमार पहले गिरफ्तार हो चुके हैं और सभी न्यायिक हिरासत में हैं। कुछ अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं।
पेपर लीक सिंडिकेट ने कैसे काम किया?
पुलिस के अनुसार, सिंडिकेट के माध्यम से पटना में कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले ही प्रश्नों के उत्तर रटवाए गए थे। परीक्षा संचालन एजेंसी और उसके संचालक की भूमिका जांच में सामने आई, जिसके आधार पर गिरफ्तारियाँ की गईं।
JSSC पेपर लीक मामले में आगे क्या होगा?
रांची SIT फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी जारी रखे हुए है। जांच दल पेपर लीक के पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रहा है। 1,279 पदों के लिए प्रभावित अभ्यर्थियों की पुनर्परीक्षा के बारे में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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