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रांची में SSC GD परीक्षा-2026 में सिस्टम हैकिंग: सेंटर अधीक्षक समेत चार गिरफ्तार, ₹10 लाख तक की वसूली

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रांची में SSC GD परीक्षा-2026 में सिस्टम हैकिंग: सेंटर अधीक्षक समेत चार गिरफ्तार, ₹10 लाख तक की वसूली

सारांश

रांची में SSC GD परीक्षा-2026 के दौरान कंप्यूटर सिस्टम को रिमोटली हैक कर प्रश्नपत्र हल कराने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश। सेंटर अधीक्षक, इनविजलेटर, आईटी कर्मी और परीक्षार्थी — चारों बिहार से — गिरफ्तार। अभ्यर्थियों से ₹6-10 लाख वसूली, प्रमाण पत्र गिरवी रखे गए।

मुख्य बातें

रांची के जीनियस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में SSC GD कांस्टेबल परीक्षा-2026 के दौरान 22 मई को हैकिंग नेटवर्क का भंडाफोड़।
परीक्षा केंद्र के कंप्यूटरों को रिमोट एक्सेस और स्क्रीन मिररिंग के ज़रिए हैक किया जा रहा था।
अभ्यर्थियों से परीक्षा पास कराने के बदले ₹6 लाख से ₹10 लाख तक वसूले जाते थे।
गिरफ्तार चारों आरोपी बिहार के — सिवान, नालंदा और पटना से हैं।
बिहार के बिचौलियों के ज़रिए अभ्यर्थियों की 'सेटिंग' होती थी; कई के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र गिरवी रखे गए।
गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान हो चुकी है, टाटीसिलवे थाना में FIR दर्ज, छापेमारी जारी।

झारखंड की राजधानी रांची में एसएससी जीडी कांस्टेबल परीक्षा-2026 के दौरान कंप्यूटर सिस्टम हैकिंग के ज़रिए संगठित कदाचार कराने वाले एक आपराधिक गिरोह का 22 मई को भंडाफोड़ हुआ। रांची पुलिस ने इस मामले में एक परीक्षार्थी, इनविजलेटर, सेंटर अधीक्षक और आईटी कर्मी — कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि परीक्षा केंद्र के कंप्यूटरों को रिमोटली हैक कर प्रश्नपत्र हल कराए जा रहे थे और इसके बदले अभ्यर्थियों से ₹6 लाख से ₹10 लाख तक वसूले जाते थे।

कैसे हुआ खुलासा

21 मई को रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक को सूचना मिली कि टाटीसिलवे थाना क्षेत्र स्थित जीनियस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में कर्मचारी चयन आयोग (SSC) द्वारा आयोजित जीडी कांस्टेबल परीक्षा के दौरान कंप्यूटर सिस्टम हैक करने की कोशिश की जा रही है। इस सूचना पर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के निर्देशन और वरीय पुलिस उपाधीक्षक अमर कुमार पांडेय के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई।

मुख्य घटनाक्रम

जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि परीक्षा केंद्र की लैब-1 में एक अभ्यर्थी का कंप्यूटर परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले इनविजलेटर के निर्देश पर री-स्टार्ट कराया गया था। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सिस्टम को इंटरनेट और आईपी के ज़रिए रिमोटली एक्सेस किया जा रहा था, जिससे स्क्रीन मिररिंग और हैकिंग की आशंका प्रबल हो गई।

पूछताछ में अभ्यर्थी मृत्युंजय कुमार यादव और इनविजलेटर संजीत कुमार ने स्वीकार किया कि परीक्षा केंद्र के सामने स्थित एक मकान में सेंटर अधीक्षक विकास कुमार और आईटी कर्मी मुन्ना राज कंप्यूटर लगाकर ऑनलाइन सिस्टम को हैक कर रहे थे। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए विकास कुमार और मुन्ना राज को भी गिरफ्तार कर लिया।

बरामदगी और नेटवर्क का विस्तार

आरोपियों के कब्जे से कंप्यूटर सिस्टम, मोबाइल फोन, ब्रॉडबैंड डिवाइस, बैंक चेक और अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र समेत कई आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि बिहार के बिचौलियों के माध्यम से अभ्यर्थियों की 'सेटिंग' कराई जाती थी और कई मामलों में अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र गिरवी रख लिए जाते थे।

गिरफ्तार चारों आरोपी बिहार से हैं — सिवान निवासी मृत्युंजय कुमार यादव (परीक्षार्थी), नालंदा निवासी संजीत कुमार (इनविजलेटर), नालंदा निवासी विकास कुमार (सेंटर अधीक्षक) और पटना निवासी मुन्ना राज (आईटी कर्मी)।

आगे की जांच

पुलिस के अनुसार इस मामले में एक संगठित आपराधिक गिरोह सक्रिय है, जिसके अन्य सदस्यों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। टाटीसिलवे थाना में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में तकनीकी कदाचार की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

परीक्षा केंद्र के कर्मचारी और तकनीकी विशेषज्ञ मिलकर सरकारी भर्ती प्रक्रिया को व्यापार बना देते हैं। गौरतलब है कि NEET, NET और अब SSC जैसी परीक्षाओं में बार-बार सामने आने वाले ऐसे कांड यह सवाल उठाते हैं कि परीक्षा एजेंसियों की ऑडिट और केंद्र-सत्यापन प्रक्रिया कितनी कारगर है। ₹10 लाख तक की वसूली और प्रमाण पत्र गिरवी रखने जैसी व्यवस्था बताती है कि यह सुनियोजित और दीर्घकालिक ऑपरेशन था, न कि तात्कालिक अवसरवाद। जब तक परीक्षा केंद्रों की रियल-टाइम निगरानी और थर्ड-पार्टी तकनीकी ऑडिट अनिवार्य नहीं होती, ऐसे गिरोह सिस्टम की खामियों का फायदा उठाते रहेंगे।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रांची SSC GD परीक्षा हैकिंग मामले में क्या हुआ?
22 मई 2026 को रांची के जीनियस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में SSC GD कांस्टेबल परीक्षा के दौरान कंप्यूटर सिस्टम को रिमोटली हैक कर प्रश्नपत्र हल कराने का भंडाफोड़ हुआ। पुलिस ने सेंटर अधीक्षक, इनविजलेटर, आईटी कर्मी और एक परीक्षार्थी — कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया।
इस हैकिंग नेटवर्क में कौन-कौन शामिल थे?
गिरफ्तार आरोपियों में बिहार के सिवान निवासी परीक्षार्थी मृत्युंजय कुमार यादव, नालंदा निवासी इनविजलेटर संजीत कुमार, नालंदा निवासी सेंटर अधीक्षक विकास कुमार और पटना निवासी आईटी कर्मी मुन्ना राज शामिल हैं। बिहार के बिचौलिए भी इस नेटवर्क का हिस्सा बताए जा रहे हैं।
अभ्यर्थियों से कितनी रकम वसूली जाती थी?
परीक्षा पास कराने के बदले अभ्यर्थियों से ₹6 लाख से ₹10 लाख तक वसूले जाते थे। कई मामलों में अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र भी गिरवी रख लिए जाते थे।
तकनीकी तरीके से हैकिंग कैसे की जाती थी?
परीक्षा केंद्र के सामने स्थित एक मकान से कंप्यूटर के ज़रिए इंटरनेट और आईपी का उपयोग कर परीक्षा केंद्र के सिस्टम को रिमोटली एक्सेस किया जाता था। स्क्रीन मिररिंग के ज़रिए प्रश्नपत्र देखकर बाहर से उत्तर भेजे जाते थे; परीक्षा शुरू होने से पहले अभ्यर्थी का कंप्यूटर री-स्टार्ट कराना इसी प्रक्रिया का हिस्सा था।
इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी?
टाटीसिलवे थाना में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस के अनुसार गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान हो चुकी है और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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