एसएससी परीक्षा धांधली: ग्रेटर नोएडा में STF का छापा, सरगना प्रदीप चौहान समेत 7 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने 22 मई 2025 को ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क स्थित बालाजी डिजिटल जोन परीक्षा केंद्र पर छापा मारकर कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की ऑनलाइन परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया। मुख्य सरगना प्रदीप चौहान सहित 7 आरोपियों को मौके से गिरफ्तार किया गया। यह गिरोह CAPF, SSF कांस्टेबल (GD) और असम राइफल्स राइफलमैन भर्ती परीक्षा-2026 में प्रॉक्सी सर्वर और स्क्रीन शेयरिंग तकनीक के ज़रिए बाहर बैठे सॉल्वरों से पेपर हल कराता था।
मुख्य घटनाक्रम
STF नोएडा यूनिट को लंबे समय से विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में एक सक्रिय धांधली गिरोह की सूचना मिल रही थी। अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्रा के निर्देशन और पुलिस उपाधीक्षक नवेन्दु कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। जाँच के दौरान पुख्ता सूचना मिलने पर टीम ने बालाजी डिजिटल जोन पर छापा मारा और सभी सात आरोपियों को मौके पर ही दबोच लिया।
गिरफ्तार आरोपी और बरामदगी
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में प्रदीप चौहान (मुज़फ्फरनगर), अरुण कुमार (मथुरा), संदीप भाटी (बुलंदशहर), निशांत राघव (बुलंदशहर), अमित राणा (बागपत), शाकिर मलिक (बागपत) और विवेक कुमार (बुलंदशहर) शामिल हैं। इनमें शाकिर मलिक और विवेक कुमार परीक्षा के अभ्यर्थी बताए गए हैं।
आरोपियों के कब्जे से ₹50 लाख नकद, 10 मोबाइल फोन, 5 लैपटॉप, एक राउटर, अभ्यर्थियों की सूची, 2 प्रवेश पत्र और इडुक्विटी कंपनी के 4 पहचान पत्र बरामद किए गए।
धांधली का तरीका
पूछताछ में मुख्य आरोपी प्रदीप चौहान ने बताया कि उसने मेरठ कॉलेज से एमकॉम किया है और वह लंबे समय से ऑनलाइन परीक्षाओं में धांधली में संलिप्त था। परीक्षा केंद्र पर इडुक्विटी कंपनी द्वारा परीक्षा आयोजित कराई जा रही थी। गिरोह सर्वर को बायपास कर स्क्रीन शेयरिंग व्यूअर एप्लीकेशन के माध्यम से बाहर बैठे सॉल्वरों से प्रश्नपत्र हल कराता था।
जाँच में सामने आया कि अमित राणा ने परीक्षा केंद्र के सर्वर को बायपास करने की तकनीक तैयार की थी, जबकि अरुण कुमार प्रॉक्सी सर्वर लगाने का काम करता था। संदीप भाटी ऐसे अभ्यर्थियों को तलाश करता था जो पैसे देकर परीक्षा पास करना चाहते थे।
आम जनता और अभ्यर्थियों पर असर
गिरोह प्रति अभ्यर्थी ₹4 लाख वसूलता था। इसमें से ₹50,000 अभ्यर्थी लाने वाले दलाल को दिए जाते थे, जबकि शेष राशि गिरोह के सदस्यों और सॉल्वरों के बीच बाँटी जाती थी। यह धांधली उन ईमानदार अभ्यर्थियों के अवसर छीनती है जो सरकारी नौकरी के लिए वर्षों मेहनत करते हैं।
कानूनी कार्रवाई
इस मामले में थाना नॉलेज पार्क में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं, भर्ती परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम अध्यादेश-2023 तथा आईटी अधिनियम की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। स्थानीय पुलिस आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रही है और जाँच का दायरा बढ़ाए जाने की संभावना है।