राजस्थान SOG का बड़ा खुलासा: भर्ती परीक्षाओं में फर्जी उम्मीदवारों के नेटवर्क का भंडाफोड़, 4 गिरफ्तार

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राजस्थान SOG का बड़ा खुलासा: भर्ती परीक्षाओं में फर्जी उम्मीदवारों के नेटवर्क का भंडाफोड़, 4 गिरफ्तार

सारांश

राजस्थान SOG ने RPSC और RSMSSB की भर्ती परीक्षाओं में फर्जी उम्मीदवारों के नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। तीन मामलों में ₹5 लाख से ₹7.5 लाख तक के सौदे सामने आए हैं और 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। विशेष सॉफ्टवेयर और उन्नत विश्लेषण से पहचान संभव हुई।

Key Takeaways

SOG ने 2 मई 2025 को राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में फर्जी उम्मीदवारों के तीन बड़े मामले उजागर किए। मनोहर लाल (जालौर) ने ₹5 लाख में RPSC परीक्षा में डेराराम की जगह परीक्षा दी; 1 मई 2025 को गिरफ्तार। अशोक जानी (फलौदी) ने पूर्व सैनिक रामूराम की जगह ₹7.5 लाख में परीक्षा दी; 30 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार। सुनील और मध्यस्थ अनिल बिश्नोई ने ₹6 लाख के सौदे में शारीरिक शिक्षा भर्ती परीक्षा में धोखाधड़ी की; 1 मई 2025 को गिरफ्तार। सभी पर राजस्थान लोक परीक्षा अधिनियम, 2022 , IPC और IT अधिनियम के तहत मामले दर्ज। APS तरुण सोमानी के नेतृत्व में व्यापक नेटवर्क की जांच जारी; मुख्य आरोपी डेराराम अभी भी फरार।

स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने 2 मई 2025 को राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जी उम्मीदवारों के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विशाल बंसल ने बताया कि राज्य भर में इस कार्रवाई के तहत तीन बड़े मामले उजागर हुए हैं, जिनमें कम शैक्षणिक योग्यता वाले उम्मीदवारों ने मोटी रकम देकर अपनी जगह अधिक योग्य व्यक्तियों को परीक्षा दिलाई। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने एडमिट कार्ड की फोटो और पहचान संबंधी दस्तावेजों में व्यापक हेराफेरी की।

पहला मामला: RPSC साहित्य परीक्षा में धोखाधड़ी

पहला मामला राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा 15 अक्टूबर 2022 को आयोजित लिटरेचर (हिंदी - स्कूल एजुकेशन) परीक्षा से जुड़ा है। जालौर के द्वितीय श्रेणी के शिक्षक मनोहर लाल ने लगभग ₹5 लाख के सौदे के बाद डेराराम की जगह फर्जी उम्मीदवार बनकर परीक्षा दी। आरोपियों ने एडमिट कार्ड की फोटो और उपस्थिति रिकॉर्ड में हेराफेरी की।

मनोहर लाल को 1 मई 2025 को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि मुख्य आरोपी डेराराम अभी भी फरार है। यह मामला जयपुर के SOG पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है।

दूसरा मामला: पूर्व सैनिक की जगह बैठा फर्जी उम्मीदवार

दूसरा मामला भी RPSC की इसी परीक्षा से संबंधित है। फलौदी निवासी अशोक जानी ने पूर्व सैनिक रामूराम की जगह ₹7.5 लाख में फर्जी उम्मीदवार बनकर परीक्षा दी। आरोपियों ने धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए पहचान संबंधी विवरणों में व्यापक फेरबदल किया।

रामूराम को पहले ही गिरफ्तार कर चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जबकि अशोक जानी को 30 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया गया।

तीसरा मामला: शारीरिक शिक्षा भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी

तीसरा मामला राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB) द्वारा 25 सितंबर 2023 को आयोजित शारीरिक शिक्षा शिक्षक भर्ती परीक्षा-2022 से जुड़ा है। जालोर के ग्रेड तृतीय शिक्षक सुनील ने मध्यस्थ अनिल बिश्नोई की मदद से विमल कुमार पाटीदार की जगह परीक्षा दी। इस सौदे में ₹6 लाख तय हुए, जिनमें से ₹1.5 लाख अग्रिम भुगतान किया गया था। सुनील और अनिल बिश्नोई दोनों को 1 मई 2025 को गिरफ्तार किया गया।

तकनीकी विश्लेषण से हुई पहचान

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक बंसल ने स्वीकार किया कि सावधानीपूर्वक तैयार किए गए जाली दस्तावेजों के कारण फर्जी उम्मीदवारों की पहचान करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। हालांकि, पेरिस देशमुख के नेतृत्व में विशेष सॉफ्टवेयर और उन्नत विश्लेषण की मदद से सटीक पहचान और गिरफ्तारियाँ संभव हो पाईं। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर जनता में गहरा आक्रोश है।

कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच

सभी आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता, राजस्थान लोक परीक्षा अधिनियम, 2022 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2008 की संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक तरुण सोमानी के नेतृत्व में जांच जारी है और व्यापक नेटवर्क का पर्दाफाश करने के प्रयास चल रहे हैं। SOG ने परीक्षा धोखाधड़ी के प्रति अपनी जीरो टोलरेंस नीति को दोहराते हुए भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है।

Point of View

बल्कि एक गहरी जड़ें जमाए प्रणालीगत समस्या का प्रतिबिंब है। गौरतलब है कि राज्य पहले भी पेपर लीक और नकल के कई बड़े कांडों का गवाह रह चुका है, जिनमें REET और कांस्टेबल भर्ती परीक्षाएँ शामिल हैं। SOG की तकनीकी सफलता सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि इतने वर्षों तक ये फर्जीवाड़े पकड़ में क्यों नहीं आए और जो अभ्यर्थी वैध रूप से चयनित हो चुके हैं, उनके मामलों की जांच कब होगी। बिना प्रणालीगत सुधार और परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन के, ये गिरफ्तारियाँ हिमशैल की नोक भर हैं।
NationPress
02/05/2026

Frequently Asked Questions

राजस्थान SOG ने भर्ती परीक्षाओं में क्या खुलासा किया?
SOG ने RPSC और RSMSSB की भर्ती परीक्षाओं में फर्जी उम्मीदवारों के तीन बड़े मामले उजागर किए, जिनमें कम योग्य उम्मीदवारों ने ₹5 लाख से ₹7.5 लाख तक की रकम देकर अपनी जगह अधिक योग्य व्यक्तियों को परीक्षा दिलाई। इस कार्रवाई में अब तक 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
इन मामलों में कितनी रकम का लेनदेन हुआ?
तीनों मामलों में अलग-अलग रकम तय हुई — पहले मामले में ₹5 लाख, दूसरे में ₹7.5 लाख और तीसरे में ₹6 लाख (जिसमें ₹1.5 लाख अग्रिम भुगतान किया गया)। आरोपियों ने पहचान दस्तावेजों और एडमिट कार्ड की फोटो में हेराफेरी कर धोखाधड़ी को अंजाम दिया।
फर्जी उम्मीदवारों की पहचान कैसे हुई?
पेरिस देशमुख के नेतृत्व में विशेष सॉफ्टवेयर और उन्नत विश्लेषण की मदद से फर्जी उम्मीदवारों की पहचान की गई। ADG विशाल बंसल के अनुसार, सावधानीपूर्वक तैयार किए गए जाली दस्तावेजों के कारण यह काम अत्यंत चुनौतीपूर्ण था।
आरोपियों पर कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
सभी आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता, राजस्थान लोक परीक्षा अधिनियम 2022 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2008 की संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक तरुण सोमानी के नेतृत्व में जारी है।
क्या सभी आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं?
अब तक 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन पहले मामले का मुख्य आरोपी डेराराम अभी भी फरार है। SOG ने व्यापक नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए जांच जारी रखने की बात कही है।
Nation Press