ईरान ने मोसाद के लिए जासूसी करने वाले दो लोगों को फांसी दी, टेलीग्राम-व्हाट्सऐप से भेजते थे संवेदनशील जानकारी
सारांश
Key Takeaways
ईरान ने शनिवार, 2 मई 2026 को इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए जासूसी करने के आरोप में दो व्यक्तियों को फांसी दे दी। ईरानी न्यायपालिका की आधिकारिक समाचार एजेंसी मिजान ने यह जानकारी दी। दोनों दोषियों को ईरान की सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मृत्युदंड की पुष्टि के बाद, कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर फांसी पर लटकाया गया।
दोनों आरोपियों की पहचान और आरोप
फांसी पाने वाले दोनों व्यक्तियों की पहचान याकूब करीमपुर और नासर बेकरजादेह के रूप में की गई है। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मिजान ने बताया कि करीमपुर पर आरोप था कि उसने ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच 40 दिनों के युद्ध के दौरान मोसाद के साथ जानबूझकर अपना सक्रिय सहयोग जारी रखा।
करीमपुर कथित तौर पर टेलीग्राम ऐप के माध्यम से मोसाद के एक अधिकारी को ईरान की संवेदनशील जानकारी भेजता था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उस पर धमाकों से जुड़ी घटनाओं में भूमिका निभाने, मोसाद के आदेश पर नुकसानदेह कार्य करने, पश्चिमी ईरान में सैन्य ठिकानों की तस्वीरें और वीडियो बनाने तथा सुरक्षा एजेंसियों को गुमराह करने के लिए झूठी जानकारी देने के भी आरोप लगाए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, इन कार्यों के बदले उसे धनराशि भी प्राप्त हुई थी।
दूसरे आरोपी बेकरजादेह पर आरोप था कि उसने मोसाद को ईरान के विभिन्न सार्वजनिक और कानून-व्यवस्था से जुड़े स्थानों की जानकारी, तस्वीरें और वीडियो भेजे। इसके अतिरिक्त, उसने व्हाट्सऐप और ईमेल के माध्यम से सरकारी व प्रांतीय अधिकारियों तथा धार्मिक व्यक्तियों की जानकारी साझा की, और इसके बदले उसे भी भुगतान किया गया।
युद्ध की पृष्ठभूमि
यह फांसी उस व्यापक भू-राजनीतिक संघर्ष की पृष्ठभूमि में दी गई है, जिसमें 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर तेहरान और ईरान के अन्य शहरों पर हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सुप्रीम लीडर और वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की मौत हो गई थी। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इजरायल और मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
गौरतलब है कि यह संघर्ष 40 दिनों तक चला, जिसके बाद 8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच संघर्ष विराम हुआ। इसके बाद 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में शांति वार्ता आयोजित की गई, लेकिन कोई औपचारिक समझौता नहीं हो सका।
ट्रंप का बयान और युद्ध की समाप्ति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को अमेरिकी सांसदों को बताया कि ईरान के खिलाफ युद्ध समाप्त हो गया है, क्योंकि बिना कांग्रेस की मंजूरी के शुरू हुई यह सैन्य कार्रवाई 60 दिनों की कानूनी समय सीमा तक पहुंच चुकी है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान अपनी आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करने में जुटा है।
ईरान में जासूसी मामलों का संदर्भ
ईरान में मोसाद से संबंधित जासूसी के आरोपों में मृत्युदंड की यह पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में ईरानी न्यायपालिका ने कई ऐसे मामलों में फांसी की सजा दी है, जिन्हें अधिकारियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया। मानवाधिकार संगठन ईरान में मृत्युदंड के बढ़ते उपयोग पर लगातार चिंता व्यक्त करते रहे हैं, हालांकि ईरानी अधिकारी इन मामलों को संप्रभुता की रक्षा के लिए आवश्यक बताते हैं। आने वाले दिनों में ईरान की आंतरिक सुरक्षा नीति और अधिक कठोर होने की संभावना है।