पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन की चेतावनी: दोबारा इस्तेमाल होने वाली सीरिंज से 'मानव-निर्मित महामारी' का संकट
सारांश
Key Takeaways
पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन (पीएमए) ने 2 मई 2026 को चेतावनी दी है कि देश में एक 'मानव-निर्मित महामारी' फैलने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। पीएमए के अनुसार, इस्लामाबाद सहित पूरे पाकिस्तान में देशव्यापी प्रतिबंध के बावजूद दोबारा इस्तेमाल होने वाली सीरिंज का निर्माण और उपयोग बेरोकटोक जारी है, जिससे लाखों लोगों की जान खतरे में है।
मुख्य घटनाक्रम
'डॉन' अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएमए ने माँग की है कि देशभर के सभी मेडिकल स्टॉक्स की तत्काल जाँच की जाए और नियमों का उल्लंघन करने वाले अथवा गलत लेबल वाले सामान को तत्काल जब्त किया जाए। संगठन ने पाकिस्तान ड्रग रेगुलेटरी अथॉरिटी (डीआरएपी) और प्रांतीय अधिकारियों को इस गंभीर चूक के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है।
पीएमए ने विशेष रूप से उन सीरिंजों पर चिंता जताई है जिन पर 'ऑटो-डिसेबल' का लेबल लगाकर बाजार में बेचा जा रहा है, लेकिन असल में उन्हें दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। संगठन ने इसे एक गंभीर धोखाधड़ी और अपराध करार दिया है। साथ ही उच्चस्तरीय जाँच की माँग की गई है कि आखिर ये गलत लेबल वाली सीरिंज किस प्रकार गुणवत्ता जाँच पास करके बाजार तक पहुँच गईं।
नीति सिर्फ कागजों तक सीमित
पीएमए ने याद दिलाया कि पाकिस्तान में सामान्य डिस्पोजेबल सीरिंज पर 2021 में प्रतिबंध लगाया गया था, जिसका उद्देश्य संक्रामक रोगों के प्रसार को रोकना था। हालाँकि, संगठन का कहना है कि यह नीति अब केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है और जमीनी स्तर पर इसका कोई प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा। पीएमए ने सरकार से आपातकालीन जागरूकता अभियान चलाने की भी अपील की है, ताकि आम लोगों को असली ऑटो-डिसेबल सीरिंज की पहचान करना सिखाया जा सके।
एचआईवी और हेपेटाइटिस-सी के चौंकाने वाले आँकड़े
पीएमए के अनुसार, पाकिस्तान में फिलहाल करीब 3,50,000 से 3,69,000 लोग एचआईवी के साथ जीवन जी रहे हैं। 2026 की पहली तिमाही में अकेले सिंध प्रांत में 894 नए मामले सामने आए, जिनमें 329 बच्चे शामिल हैं। गौरतलब है कि 0 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों में एचआईवी संक्रमण के मामले 2010 में 530 से बढ़कर अब हर साल 1,800 से अधिक हो गए हैं।
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि 2023 में एड्स से जुड़ी जटिलताओं के कारण 1,100 से अधिक बच्चों की मौत हुई, जिसका कारण बड़े पैमाने पर दोबारा इस्तेमाल की गई सीरिंज और असुरक्षित चिकित्सा पद्धतियाँ मानी जा रही हैं। इसके अतिरिक्त, पीएमए ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान हेपेटाइटिस-सी के मामलों में दुनिया में दूसरे स्थान पर है और यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो 2030 तक यह संख्या 1.26 करोड़ तक पहुँच सकती है।
अंतरराष्ट्रीय निगरानी और वित्तीय सहयोग
रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल फंड की एक टीम जल्द ही स्थिति का जायजा लेने इस्लामाबाद आएगी। पिछले दो दशकों में इस अंतरराष्ट्रीय संस्था ने पाकिस्तान में एचआईवी, टीबी और मलेरिया से निपटने के लिए एक अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश किया है।
क्या होगा आगे
पीएमए ने स्पष्ट किया है कि यह महज एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लाखों नागरिकों की जान से जुड़ा संकट है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल और ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो पाकिस्तान में एचआईवी के मामले एक बड़े और बेकाबू राष्ट्रीय संकट का रूप ले सकते हैं। सभी सीरिंज निर्माता फैक्ट्रियों की जाँच, नियम-उल्लंघन करने वाले स्टॉक की जब्ती और जवाबदेही तय करना — ये तीन माँगें अब पाकिस्तानी स्वास्थ्य तंत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हैं।