पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन की चेतावनी: दोबारा इस्तेमाल होने वाली सीरिंज से 'मानव-निर्मित महामारी' का संकट

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पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन की चेतावनी: दोबारा इस्तेमाल होने वाली सीरिंज से 'मानव-निर्मित महामारी' का संकट

सारांश

पाकिस्तान में बैन के बावजूद दोबारा इस्तेमाल होने वाली सीरिंज धड़ल्ले से बिक रही हैं — और पीएमए का कहना है कि यह लापरवाही 'मानव-निर्मित महामारी' को जन्म दे रही है। 3.5 लाख से अधिक एचआईवी मरीज, बच्चों में तेजी से बढ़ते संक्रमण और 2030 तक 1.26 करोड़ हेपेटाइटिस-सी मामलों की चेतावनी — पाकिस्तान का स्वास्थ्य तंत्र एक बड़े संकट की दहलीज पर खड़ा है।

Key Takeaways

पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन (पीएमए) ने 2 मई 2026 को 'मानव-निर्मित महामारी' की गंभीर चेतावनी जारी की। 2021 में लगाया गया डिस्पोजेबल सीरिंज प्रतिबंध जमीनी स्तर पर विफल; 'ऑटो-डिसेबल' लेबल वाली सीरिंज असल में दोबारा इस्तेमाल योग्य पाई गईं। पाकिस्तान में 3,50,000 से 3,69,000 लोग एचआईवी के साथ जीवन जी रहे हैं; 2026 की पहली तिमाही में सिंध में 894 नए मामले, जिनमें 329 बच्चे शामिल। 2023 में एड्स संबंधी जटिलताओं से 1,100 से अधिक बच्चों की मौत; असुरक्षित सीरिंज प्रमुख कारण। पाकिस्तान हेपेटाइटिस-सी मामलों में विश्व में दूसरे स्थान पर; 2030 तक संख्या 1.26 करोड़ पहुँचने की आशंका। ग्लोबल फंड की टीम जल्द इस्लामाबाद दौरे पर; संस्था ने पिछले दो दशकों में एक अरब डॉलर से अधिक निवेश किया।

पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन (पीएमए) ने 2 मई 2026 को चेतावनी दी है कि देश में एक 'मानव-निर्मित महामारी' फैलने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। पीएमए के अनुसार, इस्लामाबाद सहित पूरे पाकिस्तान में देशव्यापी प्रतिबंध के बावजूद दोबारा इस्तेमाल होने वाली सीरिंज का निर्माण और उपयोग बेरोकटोक जारी है, जिससे लाखों लोगों की जान खतरे में है।

मुख्य घटनाक्रम

'डॉन' अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएमए ने माँग की है कि देशभर के सभी मेडिकल स्टॉक्स की तत्काल जाँच की जाए और नियमों का उल्लंघन करने वाले अथवा गलत लेबल वाले सामान को तत्काल जब्त किया जाए। संगठन ने पाकिस्तान ड्रग रेगुलेटरी अथॉरिटी (डीआरएपी) और प्रांतीय अधिकारियों को इस गंभीर चूक के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है।

पीएमए ने विशेष रूप से उन सीरिंजों पर चिंता जताई है जिन पर 'ऑटो-डिसेबल' का लेबल लगाकर बाजार में बेचा जा रहा है, लेकिन असल में उन्हें दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। संगठन ने इसे एक गंभीर धोखाधड़ी और अपराध करार दिया है। साथ ही उच्चस्तरीय जाँच की माँग की गई है कि आखिर ये गलत लेबल वाली सीरिंज किस प्रकार गुणवत्ता जाँच पास करके बाजार तक पहुँच गईं।

नीति सिर्फ कागजों तक सीमित

पीएमए ने याद दिलाया कि पाकिस्तान में सामान्य डिस्पोजेबल सीरिंज पर 2021 में प्रतिबंध लगाया गया था, जिसका उद्देश्य संक्रामक रोगों के प्रसार को रोकना था। हालाँकि, संगठन का कहना है कि यह नीति अब केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है और जमीनी स्तर पर इसका कोई प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा। पीएमए ने सरकार से आपातकालीन जागरूकता अभियान चलाने की भी अपील की है, ताकि आम लोगों को असली ऑटो-डिसेबल सीरिंज की पहचान करना सिखाया जा सके।

एचआईवी और हेपेटाइटिस-सी के चौंकाने वाले आँकड़े

पीएमए के अनुसार, पाकिस्तान में फिलहाल करीब 3,50,000 से 3,69,000 लोग एचआईवी के साथ जीवन जी रहे हैं। 2026 की पहली तिमाही में अकेले सिंध प्रांत में 894 नए मामले सामने आए, जिनमें 329 बच्चे शामिल हैं। गौरतलब है कि 0 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों में एचआईवी संक्रमण के मामले 2010 में 530 से बढ़कर अब हर साल 1,800 से अधिक हो गए हैं।

रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि 2023 में एड्स से जुड़ी जटिलताओं के कारण 1,100 से अधिक बच्चों की मौत हुई, जिसका कारण बड़े पैमाने पर दोबारा इस्तेमाल की गई सीरिंज और असुरक्षित चिकित्सा पद्धतियाँ मानी जा रही हैं। इसके अतिरिक्त, पीएमए ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान हेपेटाइटिस-सी के मामलों में दुनिया में दूसरे स्थान पर है और यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो 2030 तक यह संख्या 1.26 करोड़ तक पहुँच सकती है।

अंतरराष्ट्रीय निगरानी और वित्तीय सहयोग

रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल फंड की एक टीम जल्द ही स्थिति का जायजा लेने इस्लामाबाद आएगी। पिछले दो दशकों में इस अंतरराष्ट्रीय संस्था ने पाकिस्तान में एचआईवी, टीबी और मलेरिया से निपटने के लिए एक अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश किया है।

क्या होगा आगे

पीएमए ने स्पष्ट किया है कि यह महज एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लाखों नागरिकों की जान से जुड़ा संकट है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल और ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो पाकिस्तान में एचआईवी के मामले एक बड़े और बेकाबू राष्ट्रीय संकट का रूप ले सकते हैं। सभी सीरिंज निर्माता फैक्ट्रियों की जाँच, नियम-उल्लंघन करने वाले स्टॉक की जब्ती और जवाबदेही तय करना — ये तीन माँगें अब पाकिस्तानी स्वास्थ्य तंत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हैं।

Point of View

तो यह नीति-निर्माण की विफलता नहीं बल्कि नियामकीय व्यवस्था के पूर्ण पतन का संकेत है। डीआरएपी जैसी संस्था का गलत लेबल वाली सीरिंज को बाजार तक पहुँचने देना यह बताता है कि जवाबदेही तंत्र या तो भ्रष्ट है या पूरी तरह निष्क्रिय। बच्चों में एचआईवी संक्रमण का 2010 के बाद से तीन गुना से अधिक बढ़ना यह स्पष्ट करता है कि यह संकट अचानक नहीं आया — इसे वर्षों की उपेक्षा ने पाला है। ग्लोबल फंड के एक अरब डॉलर के निवेश के बावजूद यदि बुनियादी सीरिंज सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकी, तो पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय सहायता के उपयोग पर भी गहन आत्म-मंथन करना होगा।
NationPress
02/05/2026

Frequently Asked Questions

पाकिस्तान में 'मानव-निर्मित महामारी' का खतरा क्यों पैदा हुआ है?
पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार, 2021 में लगाए गए डिस्पोजेबल सीरिंज प्रतिबंध के बावजूद दोबारा इस्तेमाल होने वाली सीरिंज का निर्माण और उपयोग जारी है। इसके अलावा, 'ऑटो-डिसेबल' लेबल वाली नकली सीरिंज बाजार में बिक रही हैं, जिससे एचआईवी और हेपेटाइटिस-सी जैसे संक्रमणों के व्यापक प्रसार का खतरा पैदा हो गया है।
पाकिस्तान में एचआईवी की मौजूदा स्थिति कितनी गंभीर है?
पीएमए के अनुसार पाकिस्तान में अभी 3,50,000 से 3,69,000 लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं। 2026 की पहली तिमाही में केवल सिंध प्रांत में 894 नए मामले सामने आए, जिनमें 329 बच्चे शामिल हैं, और 2023 में एड्स संबंधी जटिलताओं से 1,100 से अधिक बच्चों की मौत हुई।
पीएमए ने सरकार से क्या माँगें की हैं?
पीएमए ने सभी सीरिंज निर्माता फैक्ट्रियों की तत्काल जाँच, नियम-उल्लंघन करने वाले स्टॉक की जब्ती, डीआरएपी और प्रांतीय अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और एक आपातकालीन जागरूकता अभियान चलाने की माँग की है। साथ ही उच्चस्तरीय जाँच की माँग की गई है कि गलत लेबल वाली सीरिंज गुणवत्ता जाँच कैसे पास कर गईं।
पाकिस्तान में हेपेटाइटिस-सी की स्थिति कितनी चिंताजनक है?
पीएमए के अनुसार पाकिस्तान हेपेटाइटिस-सी मामलों में दुनिया में दूसरे स्थान पर है। यदि तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो 2030 तक यह संख्या 1.26 करोड़ तक पहुँच सकती है, जो इसे एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपदा में बदल देगा।
ग्लोबल फंड का पाकिस्तान में क्या योगदान रहा है?
ग्लोबल फंड ने पिछले दो दशकों में पाकिस्तान में एचआईवी, टीबी और मलेरिया से लड़ने के लिए एक अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश किया है। संस्था की एक टीम जल्द ही मौजूदा स्थिति का जायजा लेने इस्लामाबाद आएगी।
Nation Press