बिहार में 'सहयोग शिविर': पंचायत स्तर पर हर महीने दो बार मिलेगा समस्याओं का समाधान, 19 मई से शुरुआत
सारांश
Key Takeaways
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार ने 2 मई 2025 को घोषणा की कि राज्य में पंचायत स्तर पर 'सहयोग शिविर' आयोजित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं और शिकायतों का 30 दिनों के भीतर समाधान करना है। ये शिविर हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को लगाए जाएंगे और इनकी शुरुआत 19 मई 2025 से होगी।
सहयोग शिविर क्या है और कैसे काम करेगा
इन शिविरों में बिहार का कोई भी आम नागरिक प्रशासनिक अधिकारियों के सामने सीधे अपनी समस्या या शिकायत रख सकेगा। शिविर में उपस्थित अधिकारी उन शिकायतों का तत्काल निपटारा करेंगे, और जिन मामलों में समय लगे, उनका समाधान अधिकतम एक महीने (30 दिन) के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा। शिविर आयोजन से पूर्व संबंधित पंचायत के राजस्व से जुड़े सभी लंबित मामलों का नियमानुसार निष्पादन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देश और कार्यशाला
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिविर की घोषणा से दो दिन पहले राज्य के सभी जिलों के जिला पदाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ एक दिवसीय कार्यशाला एवं समीक्षात्मक बैठक आयोजित की। इस बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के माध्यम से विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों से संवेदनशीलता, तत्परता और पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ जनसेवा सुनिश्चित करने को कहा।
'सात निश्चय-3' से जुड़ी यह पहल
सहयोग शिविर 'सात निश्चय-3' के अंतर्गत 'सबका सम्मान-जीवन आसान' कार्यक्रम की एक कड़ी है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नागरिकों के जीवन को सरल, पारदर्शी और सुखद बनाना है। इस पहल के तहत जनसमस्याओं का त्वरित निपटारा, डिजिटल सेवाएँ और बेहतर बुनियादी ढाँचा — जैसे बिजली, पानी और सड़क — उपलब्ध कराकर, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, जीवन स्तर को ऊँचा उठाने का प्रयास किया जा रहा है।
निरीक्षण और जवाबदेही
इन सहयोग शिविरों के निरीक्षण का दायित्व सीधे जिलाधिकारियों को सौंपा गया है, जिससे शिविरों की गुणवत्ता और प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सके। यह व्यवस्था बिहार सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है जिसमें जमीनी स्तर पर प्रशासन को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले महीनों में इन शिविरों की नियमितता और प्रभाव ही इस योजना की असली कसौटी होगी।