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रांची में साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़: रॉक व्यू अपार्टमेंट से 5 गिरफ्तार, 50 फर्जी पासबुक बरामद

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रांची में साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़: रॉक व्यू अपार्टमेंट से 5 गिरफ्तार, 50 फर्जी पासबुक बरामद

सारांश

रांची के रॉक व्यू अपार्टमेंट से पाँच साइबर ठगों की गिरफ्तारी महज एक छापेमारी नहीं — यह फर्जी बैंक खातों के ज़रिए चलाए जा रहे एक सुनियोजित मनी-म्यूलिंग नेटवर्क का पर्दाफाश है। जामताड़ा से जुड़े तार और फरार मास्टरमाइंड 'निखिल भैया' की तलाश बताती है कि जाल अभी पूरी तरह नहीं टूटा।

मुख्य बातें

28-29 मई 2025 की रात रांची के गोंदा थाना क्षेत्र में साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़, 5 गिरफ्तार ।
बरामदगी में 50 पासबुक , 26 डेबिट कार्ड , 8 चेकबुक , 13 मोबाइल फोन और 3 आधार कार्ड शामिल।
आरोपियों में जामताड़ा , रामगढ़ और बोकारो के निवासी तथा एक नाबालिग शामिल।
फर्जी पहचान-पत्रों से बैंक खाते खुलवाकर मनी-म्यूलिंग के ज़रिए ठगी की रकम ट्रांसफर की जाती थी।
मुख्य संचालक 'निखिल भैया' फरार; पुलिस पूरे नेटवर्क की जाँच में जुटी।

रांची के गोंदा थाना क्षेत्र में पुलिस ने 28-29 मई 2025 की रात एक सक्रिय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया और पाँच संदिग्धों को गिरफ्तार किया। चांदनी चौक स्थित धावन नगर के रॉक व्यू अपार्टमेंट के एक फ्लैट से विभिन्न बैंकों की 50 पासबुक, 26 डेबिट कार्ड, 8 चेकबुक, 13 मोबाइल फोन और 3 आधार कार्ड बरामद किए गए। पुलिस के अनुसार ये सभी दस्तावेज़ फर्जी पहचान-पत्रों के आधार पर खोले गए बैंक खातों से जुड़े थे, जिनका उपयोग साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए किया जाता था।

छापेमारी का घटनाक्रम

रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) राकेश रंजन ने बताया कि 28 मई की रात लगभग 8 बजे गुप्त सूचना मिली कि रॉक व्यू अपार्टमेंट के एक फ्लैट में कुछ युवक साइबर अपराध को अंजाम दे रहे हैं। सूचना के सत्यापन के बाद सदर पुलिस उपाधीक्षक के नेतृत्व में गोंदा थाना प्रभारी अभय कुमार सिन्हा, पुलिस अवर निरीक्षक सनी कुमार, ओम प्रकाश प्रसाद, सहायक अवर निरीक्षक रामजन्म प्रसाद और सशस्त्र बल के जवानों की संयुक्त टीम गठित की गई।

टीम ने फ्लैट में दबिश दी और पाँचों संदिग्धों को संदिग्ध स्थिति में पकड़ा। तलाशी के दौरान बरामद सामग्री की संख्या और विविधता — अलग-अलग नामों से जारी दर्जनों बैंक दस्तावेज़ — ने एक सुनियोजित नेटवर्क की ओर इशारा किया।

गिरफ्तार आरोपी कौन हैं

हिरासत में लिए गए पाँच लोगों में जामताड़ा निवासी काजल कुमार मंडल, रामगढ़ निवासी आनंद कुमार और शाकिब अंसारी, बोकारो निवासी बिक्की कुमार तथा रामगढ़ का एक नाबालिग शामिल है। गौरतलब है कि जामताड़ा को देश में साइबर ठगी का एक कुख्यात केंद्र माना जाता रहा है, और इस गिरोह में उस ज़िले के आरोपी की मौजूदगी इस नेटवर्क की व्यापकता को रेखांकित करती है।

फर्जी खातों से ठगी का तरीका

पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि फर्जी पहचान-पत्र तैयार कर विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे। इन्हीं खातों में साइबर ठगी की राशि मँगाई जाती थी और फिर उसे आगे ट्रांसफर कर दिया जाता था। यह मनी-म्यूलिंग का एक सुस्थापित तरीका है जिसमें असली अपराधी पकड़ से बचे रहते हैं।

आरोपियों ने यह भी बताया कि जिस फ्लैट में वे रह रहे थे, वह 'निखिल भैया' नामक व्यक्ति का है। उन्हीं के निर्देश पर उन्हें वहाँ बुलाया गया था और साइबर अपराध के तरीके सिखाए गए थे। पुलिस इस 'निखिल भैया' की पहचान और ठिकाने की तलाश में जुटी है।

आगे की कार्रवाई

गोंदा थाना में मामला दर्ज कर लिया गया है और बरामद सामग्री को जब्त कर फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा जा रहा है। पुलिस के अनुसार पूरे नेटवर्क की पड़ताल जारी है और फरार आरोपियों — विशेषकर मुख्य संचालक 'निखिल भैया' — की तलाश तेज़ कर दी गई है। यह मामला झारखंड में बढ़ते साइबर अपराध के उस व्यापक पैटर्न का हिस्सा है जिसमें छोटे शहरों के युवाओं को मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि असली संचालक — इस मामले में 'निखिल भैया' — पर्दे के पीछे रहते हैं। 50 पासबुक और 26 डेबिट कार्ड की बरामदगी बताती है कि यह कोई छोटा ऑपरेशन नहीं था, बल्कि एक व्यवस्थित मनी-म्यूलिंग श्रृंखला थी। असली सवाल यह है कि इन खातों से कितनी राशि कितने पीड़ितों से ठगी गई — और क्या पुलिस मास्टरमाइंड तक पहुँच पाएगी या यह मामला भी निचले पायदान के आरोपियों तक सिमट कर रह जाएगा।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रांची साइबर गिरोह भंडाफोड़ में क्या हुआ?
रांची के गोंदा थाना क्षेत्र में पुलिस ने 28-29 मई 2025 की रात रॉक व्यू अपार्टमेंट पर छापा मारकर एक साइबर ठगी गिरोह के पाँच सदस्यों को गिरफ्तार किया। इनके पास से 50 फर्जी पासबुक, 26 डेबिट कार्ड और 13 मोबाइल फोन सहित बड़ी मात्रा में दस्तावेज़ बरामद हुए।
गिरफ्तार आरोपी कहाँ के रहने वाले हैं?
पाँच गिरफ्तार आरोपियों में जामताड़ा निवासी काजल कुमार मंडल, रामगढ़ निवासी आनंद कुमार और शाकिब अंसारी, बोकारो निवासी बिक्की कुमार और रामगढ़ का एक नाबालिग शामिल है। ये सभी झारखंड के विभिन्न ज़िलों से हैं।
इस गिरोह का साइबर ठगी का तरीका क्या था?
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि फर्जी पहचान-पत्रों के आधार पर विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे। इन्हीं खातों में साइबर ठगी की रकम मँगाई जाती थी और फिर उसे आगे ट्रांसफर कर दिया जाता था — यह मनी-म्यूलिंग का एक सुस्थापित तरीका है।
'निखिल भैया' कौन है और वह अभी भी फरार क्यों है?
आरोपियों के अनुसार 'निखिल भैया' वह व्यक्ति है जिसका फ्लैट था और जिसने उन्हें वहाँ बुलाकर साइबर अपराध के तरीके सिखाए। पुलिस उसकी पहचान और ठिकाने की तलाश में जुटी है; अभी तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
गोंदा थाना में मामला दर्ज कर लिया गया है और बरामद सामग्री जब्त कर जाँच जारी है। पुलिस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने और फरार आरोपियों को पकड़ने की कोशिश कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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