झारखंड उत्पाद सिपाही परीक्षा में पेपर लीक का बड़ा खुलासा, 164 आरोपी गिरफ्तार
सारांश
Key Takeaways
- रांची पुलिस ने पेपर लीक की साजिश का भंडाफोड़ किया।
- 164 लोगों की गिरफ्तारी, जिनमें 159 अभ्यर्थी हैं।
- मुख्य सरगना का आपराधिक इतिहास लंबा है।
- गिरोह ने अभ्यर्थियों से भारी रकम वसूली।
- पुलिस द्वारा गहन जांच की जा रही है।
रांची, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) द्वारा रविवार को आयोजित झारखंड उत्पाद सिपाही प्रतियोगिता परीक्षा में पेपर लीक की साजिश का रांची पुलिस ने खुलासा किया है, जिससे एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस कार्रवाई में गिरोह के मुख्य सरगना सहित कुल 164 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 159 अभ्यर्थी शामिल हैं, जिनमें से सात महिलाएं भी हैं।
एसएसपी राकेश रंजन को मिली गुप्त सूचना के आधार पर ग्रामीण एसपी के नेतृत्व में एक टीम ने तमाड़ थाना क्षेत्र के एक निर्माणाधीन भवन में छापेमारी की। पुलिस के अनुसार, 11 अप्रैल की रात की गई इस कार्रवाई के दौरान वहां अफरा-तफरी मच गई, और लोग भागने की कोशिश करने लगे। हालांकि, पुलिस ने सभी को घेराबंदी कर पकड़ लिया।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि गिरोह के एजेंट अभ्यर्थियों से परीक्षा पास कराने के नाम पर 10 से 15 लाख रुपये तक वसूल कर रहे थे। अभ्यर्थियों को सुनसान स्थान पर ले जाकर कथित तौर पर लीक प्रश्न-पत्र और उनके उत्तर दिए जाते थे। पुलिस ने मौके से प्रश्न-उत्तर के सेट, प्रिंटर, कई मोबाइल फोन, फटे हुए एडमिट कार्ड, अभ्यर्थियों के द्वारा दिए गए बैंक चेक और आठ वाहन जब्त किए हैं।
पुलिस के अनुसार, कई अभ्यर्थियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए अपने मोबाइल फोन और एडमिट कार्ड गिरोह के सदस्यों को दे दिए थे। बरामद वाहनों के मालिकों की भी जांच की जा रही है।
मामले में तमाड़ थाना में कांड संख्या 21/26, दिनांक 12 अप्रैल 2026 को प्राथमिकी दर्ज की गई है। रांची पुलिस ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के साथ मिलकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह का मुख्य सरगना अतुल वत्स भी शामिल है, जो बिहार के जहानाबाद जिले का निवासी है। पुलिस के अनुसार, उसका आपराधिक इतिहास लंबा है और वह कई बड़े परीक्षा घोटालों में शामिल रहा है, जिसमें राजस्थान क्लर्क भर्ती परीक्षा (2017), नीट पेपर लीक (2024), बिहार में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर भर्ती परीक्षा (2024), उत्तर प्रदेश आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा (2024), और उत्तर प्रदेश सिपाही भर्ती परीक्षा (2024) शामिल हैं। आरओ/एआरओ मामले में उसे यूपी एसटीएफ द्वारा पहले गिरफ्तार किया जा चुका है।
पुलिस का कहना है कि इस संगठित गिरोह के अन्य सदस्यों, स्थानीय एजेंटों और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की जा रही है। साथ ही बैंक खातों, चेक और मोबाइल डेटा की भी जांच जारी है। पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह लंबे समय से विभिन्न राज्यों में प्रतियोगी परीक्षाओं को प्रभावित कर रहा है।