राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा ने अग्निशमन सेवा सप्ताह की शुरुआत की, 12 अधिकारियों को राष्ट्रपति पदक से नवाजा
सारांश
Key Takeaways
- अग्निशमन सेवा सप्ताह का उद्घाटन
- 12 अधिकारियों को राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया
- आग से संबंधित नई चुनौतियों का सामना
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग
- 614 करोड़ रुपए के बजट से आधुनिकीकरण
मुंबई, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा ने मंगलवार को ‘राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा दिवस’ के अवसर पर लोक भवन में ‘अग्निशमन सेवा सप्ताह’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर, राज्यपाल ने 12 अधिकारियों और कर्मियों को उनकी विशिष्ट सेवा के लिए ‘राष्ट्रपति अग्निशमन सेवा पदक’ से सम्मानित किया।
सम्मान पाने वालों में मुख्य अग्निशमन अधिकारी संतोष वारिक, उप मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनिल परब, और हरीशचंद्र रघु शेट्टी, मंडल अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र पाटिल सहित अन्य कर्मी शामिल हैं।
राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा ने बताया कि पिछले कुछ दशकों में अग्निशमन सेवाओं के समक्ष आने वाली चुनौतियां कई गुना बढ़ गई हैं। तेजी से हो रहे शहरीकरण, ऊंची इमारतों का विकास, भूमिगत और एलिवेटेड मेट्रो नेटवर्क एवं औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार ने आपात स्थितियों को अधिक जटिल बना दिया है। इसके अलावा, बड़े गोदामों और डेटा केंद्रों की बढ़ती संख्या ने आग से जुड़ी घटनाओं के स्वरूप को भी बदल दिया है।
उन्होंने बताया कि आज अग्निशमन सेवाएं सिर्फ आग बुझाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे, औद्योगिक परिसंपत्तियों और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। गैस और रसायनों से लगने वाली आग के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहनों और लिथियम-आयन बैटरियों से जुड़ी घटनाओं ने नई चुनौतियों को जन्म दिया है। ऐसे में आग की रोकथाम, पहचान और विश्लेषण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग अत्यंत आवश्यक हो गया है।
राज्यपाल ने अग्निशमन कर्मियों के कौशल और प्रशिक्षण के निरंतर उन्नयन पर बल देते हुए कहा कि 15वें वित्त आयोग के तहत स्वीकृत 614 करोड़ रुपए की राशि से राज्य में अग्निशमन सेवाओं का आधुनिकीकरण किया जाएगा। इससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
उन्होंने अग्निशमन विज्ञान में अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए समर्पित संस्थान स्थापित करने की आवश्यकता भी जताई। साथ ही, विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को अग्निशमन सुरक्षा जागरूकता, ड्रिल्स और आपदा प्रबंधन अभियानों में शामिल करने पर जोर दिया।
ज्ञात हो कि 14 अप्रैल को बॉम्बे डॉक विस्फोट 1944 में शहीद हुए अग्निशमन कर्मियों की स्मृति में ‘राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा दिवस’ मनाया जाता है, जिसके साथ ही पूरे सप्ताह ‘अग्निशमन सेवा सप्ताह’ के रूप में आयोजित किया जाता है।